अल-बकरा · 239/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
فَإِنْ خِفْتُمْ فَرِجَالًا أَوْ رُكْبَانًا ۖ فَإِذَا أَمِنتُمْ فَاذْكُرُوا اللَّهَ كَمَا عَلَّمَكُم مَّا لَمْ تَكُونُوا تَعْلَمُونَ ۝٢٣٩
Fa in khiftum farijaalan aw rukbaanan fa izaaa amintum fazkurul laaha kamaa `allamakum maa lam takoonoo ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और पूरी नमाज़ न पढ़ सको तो सवार या पैदल जिस तरह बन पड़े पढ़ लो फिर जब तुम्हें इत्मेनान हो तो जिस तरह ख़ुदा ने तुम्हें (अपने रसूल की मआरफत इन बातों को सिखाया है जो तुम नहीं जानते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَرِجَالًا: पैदल चलते हुए।
  • رُكْبَانًا: सवार होकर (घोड़े, ऊँट आदि पर)।
  • أَمِنتُمْ: जब खतरा टल जाए और तुम्हें शांति प्राप्त हो जाए।
  • فَاذْكُرُوا اللَّهَ: अल्लाह को याद करो, जिसमें नमाज़ भी शामिल है।

तफसीर (व्याख्या):

जब तुम्हें किसी दुश्मन या किसी और खतरे का डर हो, और तुम पूरी तरह से नमाज़ अदा न कर सको, तो उस स्थिति में नमाज़ को उसी रूप में पढ़ो जिस रूप में संभव हो—चाहे पैदल चलते हुए, सवारी पर बैठे हुए, या किसी भी हालत में, और यदि संभव हो तो इशारे से भी नमाज़ पूरी कर सकते हो। इसका उद्देश्य यह है कि नमाज़ किसी भी हालत में न छूटे। जब खतरा समाप्त हो जाए और तुम्हें शांति मिल जाए, तो नमाज़ को उसके पूरे नियमों और अदा के साथ पढ़ो, और अल्लाह को उस तरह याद करो जिस तरह उसने तुम्हें सिखाया है। अल्लाह ने तुम्हें वह ज्ञान और मार्गदर्शन दिया है जो पहले तुम्हें नहीं था, इसलिए उसकी शिक्षा के अनुसार उसकी इबादत करो और उसका शुक्र अदा करो।

फ़ायदे (सीख):

  1. इस्लाम में नमाज़ की अहमियत इतनी अधिक है कि खतरे के समय भी इसे छोड़ा नहीं जाता, बल्कि हालात के अनुसार इसका तरीका बदल दिया जाता है। यह दिखाता है कि नमाज़ हर हाल में मुसलमान की ज़िंदगी का हिस्सा है।
  2. अल्लाह ने इंसान को नमाज़ और इबादत के तरीके सिखाए हैं, जो उसे खुद नहीं आते थे। यह अल्लाह की रहमत और मेहरबानी की निशानी है कि उसने अपने बंदों को सही रास्ता दिखाया।
  3. जब खतरा टल जाए, तो अल्लाह को याद करना और उसका शुक्र अदा करना चाहिए। यह इंसान को अल्लाह के करीब लाता है और उसकी नेमतों के लिए शुक्रगुज़ार बनाता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अल्लाह से रिश्ता नहीं तोड़ना चाहिए, और जब हालात आसान हों तो इबादत को और अच्छे तरीके से अदा करना चाहिए।


📜 आयत 237-241 — सूरा अल-बकरा

237وَإِن طَلَّقْتُمُوهُنَّ مِن قَبْلِ أَن تَمَسُّوهُنَّ وَقَدْ فَرَضْتُمْ لَهُنَّ فَرِيضَةً فَنِصْفُ مَا فَرَضْتُمْ إِلَّا أَن يَعْفُونَ أَوْ يَعْفُوَ الَّذِي بِيَدِهِ عُقْدَةُ النِّكَاحِ ۚ وَأَن تَعْفُوا أَقْرَبُ لِلتَّقْوَىٰ ۚ وَلَا تَنسَوُا الْفَضْلَ بَيْنَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
और अगर तुम उन औरतों का मेहर तो मुअय्यन कर चुके हो मगर हाथ लगाने के क़ब्ल ही तलाक़ दे दो तो उन औरतों को मेहर मुअय्यन का आधा दे दो मगर ये कि ये औरतें ख़ुद माफ कर दें या उन का वली जिसके हाथ में उनके निकाह का एख्तेयार हो माफ़ कर दे (तब कुछ नही) और अगर तुम ही सारा मेहर बख्श दो तो परहेज़गारी से बहुत ही क़रीब है और आपस की बुर्ज़ुगी तो मत भूलो और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा ज़रुर देख रहा है
238حَافِظُوا عَلَى الصَّلَوَاتِ وَالصَّلَاةِ الْوُسْطَىٰ وَقُومُوا لِلَّهِ قَانِتِينَ
और (मुसलमानों) तुम तमाम नमाज़ों की और ख़ुसूसन बीच वाली नमाज़ सुबह या ज़ोहर या अस्र की पाबन्दी करो और ख़ास ख़ुदा ही वास्ते नमाज़ में क़ुनूत पढ़ने वाले हो कर खड़े हो फिर अगर तुम ख़ौफ की हालत में हो
239فَإِنْ خِفْتُمْ فَرِجَالًا أَوْ رُكْبَانًا ۖ فَإِذَا أَمِنتُمْ فَاذْكُرُوا اللَّهَ كَمَا عَلَّمَكُم مَّا لَمْ تَكُونُوا تَعْلَمُونَ
और पूरी नमाज़ न पढ़ सको तो सवार या पैदल जिस तरह बन पड़े पढ़ लो फिर जब तुम्हें इत्मेनान हो तो जिस तरह ख़ुदा ने तुम्हें (अपने रसूल की मआरफत इन बातों को सिखाया है जो तुम नहीं जानते थे
240وَالَّذِينَ يُتَوَفَّوْنَ مِنكُمْ وَيَذَرُونَ أَزْوَاجًا وَصِيَّةً لِّأَزْوَاجِهِم مَّتَاعًا إِلَى الْحَوْلِ غَيْرَ إِخْرَاجٍ ۚ فَإِنْ خَرَجْنَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِي مَا فَعَلْنَ فِي أَنفُسِهِنَّ مِن مَّعْرُوفٍ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
उसी तरह ख़ुदा को याद करो और तुम में से जो लोग अपनी बीवियों को छोड़ कर मर जाएँ उन पर अपनी बीबियों के हक़ में साल भर तक के नान व नुफ्के (रोटी कपड़ा) और (घर से) न निकलने की वसीयत करनी (लाज़िम) है पस अगर औरतें ख़ुद निकल खड़ी हो तो जायज़ बातों (निकाह वगैरह) से कुछ अपने हक़ में करे उसका तुम पर कुछ इल्ज़ाम नही है और ख़ुदा हर यै पर ग़ालिब और हिक़मत वाला है
241وَلِلْمُطَلَّقَاتِ مَتَاعٌ بِالْمَعْرُوفِ ۖ حَقًّا عَلَى الْمُتَّقِينَ
और जिन औरतों को ताअय्युन मेहर और हाथ लगाए बगैर तलाक़ दे दी जाए उनके साथ जोड़े रुपए वगैरह से सुलूक करना लाज़िम है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
239आयत

अनुवाद — अल-बकरा 239

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Tuesday, September 29, 2026

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