अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मुतल्लक़ात (المطلقات): वे औरतें जिन्हें तलाक़ दिया जा चुका हो।
- मताअ (متاع): वह सामान या राशि जो तलाक़ के बाद औरत को दी जाए, जैसे कपड़े, खर्च या नकदी।
- बिल-मारूफ़ (بالمعروف): शरियत और समाज के सही मानकों के अनुसार, जो उचित और न्यायसंगत हो।
- हक़्क़न (حقًا): यह एक स्थापित और अनिवार्य अधिकार है।
- अल-मुत्तक़ीन (المتقين): वे लोग जो अल्लाह से डरते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला तलाक़शुदा औरतों के अधिकारों की रक्षा करते हुए फ़रमाता है कि जिन औरतों को तलाक़ दिया गया है, उनके लिए एक उचित और मुनासिब मताअ (सामान या राशि) देना अनिवार्य है। यह मताअ उनकी टूटी हुई भावनाओं को सांत्वना देने और उनके दिलों को जोड़ने के लिए है, ताकि तलाक़ के बाद उन्हें महसूस न हो कि उन्हें अकेला छोड़ दिया गया या उनकी कोई क़द्र नहीं।
यह मताअ "बिल-मारूफ़" होना चाहिए, यानी शरियत और समाज के सही मानकों के अनुसार, जिसमें शौहर की हैसियत और माली हालत का ख़याल रखा जाए। अगर शौहर अमीर है तो उसके हिसाब से और अगर ग़रीब है तो उसकी क़ुदरत के मुताबिक़, ताकि किसी पर ज़ुल्म न हो और न ही किसी को नुक़सान उठाना पड़े।
यह हुक्म सिर्फ़ एक नसीहत या सलाह नहीं है, बल्कि अल्लाह तआला इसे "हक़्क़न" यानी एक स्थापित और अनिवार्य अधिकार बताता है, जो उन लोगों पर लागू होता है जो अल्लाह से डरते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं। यानी असली मुत्तक़ी (परहेज़गार) वही है जो अल्लाह के इस हुक्म को पूरा करे और तलाक़शुदा औरत के साथ अच्छा सुलूक करे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें इस्लाम की उस खूबसूरत तालीमात से रूबरू कराती है जो औरतों के अधिकारों की पूरी रक्षा करती है। इस्लाम ने तलाक़ जैसे नाज़ुक मौक़े पर भी औरत को उसका हक़ देना सिखाया और उसकी इज़्ज़त को बचाए रखा। यह हमारे दीन की रहमत और इंसाफ़ की सबसे बड़ी मिसाल है। अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि दुश्मनी या नाराज़गी के बावजूद भी इंसाफ़ और अच्छाई का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। जो लोग अल्लाह से डरते हैं, वे दूसरों के साथ भलाई करते हैं, ख़ासकर उनके साथ जो कमज़ोर हालत में हों। यही तक़वा (परहेज़गारी) की असली पहचान है। आओ हम सब इस तालीम पर अमल करें और अपने समाज में औरतों के अधिकारों का पूरा ख़याल रखें, ताकि हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 239-243 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 241
सूरा अल-बकरा आयत 241 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन औरतों को ताअय्युन मेहर और हाथ लगाए बगैर…सूरा आयत 241/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 239–243. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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