अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जन्नत: यहाँ अर्थ है बाग़ (बगीचा)।
- नख़ील: खजूर के पेड़।
- अ'नाब: अंगूर के पेड़ (बेलें)।
- इ'सार: तेज़ और प्रचंड हवा का झोंका जो धूल उड़ाती है, यहाँ आशय है आँधी।
- ज़ुर्रियyah: संतान, औलाद।
- अयवद्दु: क्या कोई पसंद करता है या चाहता है।
विस्तृत तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में एक बहुत ही स्पष्ट और मार्मिक उदाहरण देकर हमें सच्चे इरादे और ख़ुलूस (निष्ठा) से नेक काम करने की शिक्षा दे रहा है। वह पूछता है: क्या तुम में से कोई यह पसंद करेगा कि उसके पास एक ऐसा हरा-भरा बाग़ हो, जिसमें खजूर के ऊँचे-ऊँचे पेड़ हों और अंगूर की बेलें फैली हों, जिसके नीचे नहरें बह रही हों, और उस बाग़ में हर तरह के मीठे और बेहतरीन फल मौजूद हों? यह बाग़ उसकी सबसे बड़ी पूँजी और आराम का ज़रिया हो।
अब सोचिए, उस शख्स की उम्र ढल चुकी है, वह बूढ़ा हो गया है, उसमें दोबारा पेड़ लगाने या कमाने की ताकत नहीं रही। उसके छोटे-छोटे कमज़ोर बच्चे हैं जो अभी कुछ नहीं कर सकते, वे पूरी तरह उसी बाग़ पर निर्भर हैं। उस वक़्त, जब उसे और उसके बच्चों को उस बाग़ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, अचानक एक ऐसी आँधी आती है जिसमें आग लपटें ले रही होती हैं, और वह पूरा बाग़ जलकर खाक हो जाता है। उस बूढ़े आदमी के पास कुछ नहीं बचता, न पूँजी, न उम्मीद, सिर्फ पछतावा और बर्बादी।
यह उदाहरण उस व्यक्ति का है जो अपने अच्छे काम, अपना खर्च और अपनी इबादत सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए करता है (रिया)। वह दुनिया में तो लोगों से वाह-वाही पा लेता है, लेकिन आख़िरत में, जब उसे अपने अच्छे कामों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी, वहाँ उसे कुछ भी नहीं मिलेगा। उसके सारे अच्छे काम ऐसे ही जल जाएँगे जैसे वह बाग़ जल गया, और वह खाली हाथ खड़ा रह जाएगा।
अल्लाह तआला यह आयत इसलिए बयान कर रहा है ताकि हम गहराई से सोचें कि हमारे कामों की नीयत क्या है। क्या हम अल्लाह के लिए काम कर रहे हैं या लोगों की तारीफ़ के लिए? अगर हमने अपने कामों में ख़ुलूस (सच्ची निष्ठा) पैदा कर ली, तो हमारे काम हमेशा के लिए महफ़ूज़ रहेंगे और आख़िरत में हमें उनका अच्छा बदला मिलेगा। यह आयत हमें सिखाती है कि अपने दिल को साफ रखें, अपने इरादों को सिर्फ अल्लाह के लिए बनाएँ, क्योंकि सच्ची नियत ही वह चीज़ है जो हमारे आमाल को अल्लाह के यहाँ क़बूल करवाती है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 264-268 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 266
सूरा अल-बकरा आयत 266 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला तुम में कोई भी इसको पसन्द करेगा कि उसके…सूरा आयत 266/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 264–268. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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