Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ابْتِغَاءَ مَرْضَاتِ اللهِ: अल्लाह की प्रसन्नता की खोज में, केवल उसकी रज़ा के लिए।
- تَثْبِيتًا مِنْ أَنْفُسِهِمْ: अपने दिलों में दृढ़ विश्वास और यक़ीन के साथ, बिना किसी संदेह के, अल्लाह के वादे पर पक्का भरोसा।
- جَنَّةٍ: बाग़, बगीचा।
- بِرَبْوَةٍ: ऊँची और उपजाऊ ज़मीन पर स्थित बाग़, जहाँ पानी न रुकता हो और न बहता हो, बल्कि ज़मीन को अच्छी तरह सींचता हो।
- وَابِلٌ: तेज़ और मूसलाधार बारिश।
- أُكُلَهَا: उसका फल, उसकी पैदावार।
- ضِعْفَيْنِ: दोगुना, दुगना फल।
- طَلٌّ: हल्की और लगातार बूँदा-बाँदी, हल्की बारिश।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की मिसाल बयान कर रहा है जो अपने माल को सिर्फ अल्लाह की रज़ा और खुशनूदी के लिए खर्च करते हैं, और उनके दिल अल्लाह के वादे पर पूरा यक़ीन रखते हैं। उनका यह खर्च किसी दिखावे या लोगों की तारीफ के लिए नहीं होता, बल्कि उनके दिलों में अल्लाह के इनाम और उसके वादे की सच्चाई पर गहरा विश्वास होता है।
उनके इस खर्च की मिसाल एक ऊँची और उपजाऊ ज़मीन पर स्थित उस बाग़ जैसी है, जिस पर मूसलाधार बारिश होती है, तो वह बाग़ दोगुना फल देता है। और अगर उस पर मूसलाधार बारिश न भी हो, तो हल्की बूँदा-बाँदी ही उसके लिए काफी होती है, क्योंकि उसकी ज़मीन अच्छी और उपजाऊ होती है। यानी उस बाग़ को चाहे जितनी भी बारिश मिले, वह हमेशा अच्छा फल देता है।
ठीक इसी तरह, अल्लाह के लिए खर्च करने वाले मोमिन का खर्च चाहे कम हो या ज़्यादा, अल्लाह उसे कबूल करता है और उसका अज्र (इनाम) बढ़ाता है। क्योंकि अल्लाह देखता है कि उसका खर्च कितना खालिस (शुद्ध) है और उसकी नीयत कितनी सच्ची है। अल्लाह तआला हर चीज़ को देखने वाला है, चाहे वह ज़ाहिर हो या बातिन (छिपी हुई), और वह हर इंसान को उसकी नीयत और खुलूस (शुद्धता) के अनुसार बदला देगा।
फ़ायदे (सबक):
- यह आयत हमें सिखाती है कि खर्च करने का सबसे बड़ा उद्देश्य अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए, न कि लोगों की तारीफ या दिखावा। जब नीयत खालिस होती है, तो अल्लाह उसे कबूल करता है और बरकत देता है।
- अल्लाह के वादे पर पक्का यक़ीन रखने वाला इंसान कभी निराश नहीं होता। उसे पता होता है कि उसका खर्च अल्लाह के यहाँ बेकार नहीं जाएगा, बल्कि उसे कई गुना बढ़ाकर वापस मिलेगा।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के रास्ते में खर्च करना किसी नुकसान का कारण नहीं, बल्कि यह एक ऐसा बाग़ है जो हमेशा फल देता है — चाहे हालात कैसे भी हों। कम खर्च भी अल्लाह के यहाँ बड़ा इनाम पा सकता है, बशर्ते नीयत सच्ची हो।
- अल्लाह हर काम को देखता है, और वह जानता है कि कौन सच्चे दिल से खर्च कर रहा है और कौन दिखावे के लिए। इसलिए हमें हमेशा अपनी नीयत को सुधारना चाहिए और सिर्फ अल्लाह के लिए काम करना चाहिए।
📜 आयत 263-267 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 265
सूरा अल-बकरा आयत 265 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के लिए और अपने…सूरा आयत 265/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 263–267. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


