अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أمر جامع (एक ऐसा मामला जो सबको इकट्ठा करे): जैसे जिहाद, ईद, जुमुआ, या कोई सांझी मसलहत का काम।
- يستأذنوه (उनसे अनुमति माँगें): नबी ﷺ से जाने की इजाज़त लें।
- شأنهم (उनका कोई काम): कोई ज़रूरी या निजी मामला।
तफसीर:
यह आयत मोमिनों के उस असली रूप को बयान करती है जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर सच्चे दिल से ईमान लाते हैं और अपने अमल से उसे साबित करते हैं। ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल की गवाही और अमल की पाबंदी है। जब ये मोमिन नबी ﷺ के साथ किसी सांझे मामले में हों — जैसे जिहाद, ईद की नमाज़, जुमुआ, या किसी मुश्किल के हल के लिए मशवरा — तो वे बिना इजाज़त के वहाँ से नहीं जाते। वे नबी ﷺ की मौजूदगी और उनके हुक्म को अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मरकज़ मानते हैं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो लोग नबी ﷺ से जाने की इजाज़त माँगते हैं, वही सच्चे मोमिन हैं। यह उनके ईमान की निशानी है कि वे नबी ﷺ के साथ अपने रिश्ते को अहमियत देते हैं और उनके साथ रहकर उनके आदेश के आगे सर झुकाते हैं। जो बिना इजाज़त चले जाते हैं, उनका रवैया ईमान की कमज़ोरी की तरफ इशारा करता है।
फिर अल्लाह अपने नबी ﷺ को हिदायत देता है कि जब ये मोमिन किसी ज़रूरी काम के लिए इजाज़त माँगें, तो आप उनमें से जिसे चाहें इजाज़त दे दें — यह आपका अख्तियार है, और इसमें कोई रुकावट नहीं। साथ ही, आप उनके लिए अल्लाह से मग़फिरत की दुआ करें, क्योंकि वे इजाज़त लेकर गए हैं, लेकिन आपकी सोहबत से जुदा होने का मलाल दिल में रखते हैं। अल्लाह तआला अपने बंदों के तौबा करने वालों के गुनाह माफ़ करने वाला और उन पर रहम करने वाला है।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में नबी ﷺ की इताअत और अदब कितना अहम है। आज हम नबी ﷺ को नहीं देखते, लेकिन उनकी सुन्नत और उनके बताए हुए तरीक़ों पर अमल करके ही हम अपने ईमान को सच्चा बना सकते हैं। जो लोग अल्लाह और उसके रसूल की मोहब्बत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारते हैं, उनके लिए अल्लाह की रहमत और मग़फिरत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। यह आयत मोमिनों को तरग़ीब देती है कि वे नबी ﷺ के साथ अपने रिश्ते को मज़बूत करें, उनके हुक्म के आगे सर झुकाएँ, और अपनी ज़रूरतों में भी अदब और इताअत का दामन न छोड़ें। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो उसके रसूल की ताबेदारी में अपनी जान और माल कुर्बान कर देते हैं।
📜 आयत 60-64 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 62
सूरा अन-नूर आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सच्चे ईमानदार तो सिर्फ वह लोग हैं जो ख़ुदा और…सूरा आयत 62/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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