अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- دُعَاءَ الرَّسُولِ: रसूल (ﷺ) का पुकारना या उन्हें पुकारना।
- كَدُعَاءِ بَعْضِكُم بَعْضًا: जिस तरह तुम आपस में एक-दूसरे को पुकारते हो (जैसे: "ऐ फलाँ!") उसी तरह।
- يَتَسَلَّلُونَ: चुपके से निकल जाना, एक-एक करके खिसक जाना।
- لِوَاذًا: किसी के पीछे छिपकर, एक-दूसरे की आड़ लेकर।
- يُخَالِفُونَ عَنْ أَمْرِهِ: उसके (रसूल ﷺ) के आदेश की अवहेलना करना, उससे मुँह मोड़ना।
- فِتْنَةٌ: परीक्षा, आफत, बला, या गुमराही।
- عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक और भयंकर यातना।
विस्तृत तफसीर:
ऐ ईमान वालो! अल्लाह तआला तुम्हें एक बहुत ही अदब और तहज़ीब सिखा रहा है। जब तुम नबी करीम (ﷺ) को पुकारो, तो उन्हें उस तरह न पुकारो जैसे तुम आपस में एक-दूसरे को पुकारते हो — जैसे "ऐ मुहम्मद!" या "ऐ मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह!" — बल्कि उन्हें पूरे अदब और ताज़ीम के साथ पुकारो: "ऐ अल्लाह के रसूल!" "ऐ अल्लाह के नबी!" यह सिर्फ एक ज़बानी फर्क नहीं है, बल्कि इससे तुम्हारे दिल में रसूल (ﷺ) की मुहब्बत, इज़्ज़त और उनके मर्तबे का एहतराम ज़ाहिर होता है। यही अदब तुम्हारे ईमान की निशानी है।
और जब रसूल (ﷺ) तुम्हें किसी अच्छे काम के लिए बुलाएँ — किसी जिहाद, नेकी, या दीन के मामले में — तो उस बुलावे को हल्का न समझो, बल्कि तुरंत लब्बैक कहो और उनकी पुकार का जवाब दो। यह दुनिया के आम लोगों की बुलाहट जैसी नहीं है; यह अल्लाह की तरफ से वसीला है, जिसके ज़रिए तुम्हें हिदायत और बरकत मिलती है।
अल्लाह तआला उन मुनाफिकों को खूब जानता है जो नबी (ﷺ) की मजलिस से चुपके से, एक-दूसरे की आड़ लेकर, बिना इजाज़त के निकल जाते हैं। वे दिखावा करते हैं कि हम मौजूद हैं, लेकिन असल में भाग जाते हैं। अल्लाह उनके हर हरकत से वाकिफ है, और उनका कोई भेद उससे छिपा नहीं है।
इसलिए, ऐ लोगो! जो लोग रसूल (ﷺ) के हुक्म की खिलाफ़त करते हैं, उनके आदेश से मुँह मोड़ते हैं, उनकी सुन्नत को हल्का समझते हैं, या उनके फैसलों पर सवाल उठाते हैं — उन्हें डरना चाहिए कि कहीं उन पर कोई आफत और बला न आ जाए, या उनके दिलों में गुमराही और फितना न आ जाए, या आखिरत में उन्हें दर्दनाक अज़ाब न मिले। यह एक सख्त तनबीह है, जो हर उस शख्स के लिए है जो नबी (ﷺ) के हुक्म को अपनी ज़िंदगी में पेश नहीं करता।
याद रखो! नबी (ﷺ) की इताअत असल में अल्लाह की इताअत है। जो उनके आदेश को मानता है, वह सीधे रास्ते पर है, और जो उनकी नाफरमानी करता है, वह अपने लिए तबाही बुलाता है। अल्लाह तआला हम सबको नबी (ﷺ) की सुन्नत पर चलने की तौफीक दे, और उनके अदब और मुहब्बत को हमारे दिलों में बढ़ाए। आमीन।
📜 आयत 61-64 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 63
सूरा अन-नूर आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ ईमानदारों) जिस तरह तुम में से एक दूसरे को…सूरा आयत 63/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 61–64. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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