अनुवाद — Tafsir
بَلْ هُوَ آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ فِي صُدُورِ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا الظَّالِمُونَ
शब्दों के अर्थ:
- بَلْ: बल्कि, इससे पहले की बात को सही करने के लिए।
- آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ: स्पष्ट और प्रत्यक्ष निशानियाँ (जो अपने आप में सत्य को प्रकट करती हों)।
- فِي صُدُورِ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ: उन लोगों के सीनों में जिन्हें ज्ञान दिया गया है (अर्थात् विद्वान और सच्चे ज्ञानी)।
- يَجْحَدُ: इनकार करना, जानते हुए भी न मानना।
- الظَّالِمُونَ: अत्याचारी, जो अपनी ज़िद और हठधर्मी से सत्य को छिपाते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के जवाब में है जो कहते थे कि यह क़ुरआन किसी इंसान का बनाया हुआ है या जादू है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि स्पष्ट और प्रत्यक्ष निशानियाँ हैं जो सत्य को उजागर करती हैं। यह निशानियाँ उन लोगों के दिलों और सीनों में महफ़ूज़ हैं जिन्हें अल्लाह ने सच्चा ज्ञान दिया है — यानी विद्वान और ईमानवाले लोग। वे इसे समझते हैं, इस पर अमल करते हैं और इसे संजोकर रखते हैं। यह क़ुरआन ऐसा मो'जिज़ा है जो पढ़ने-लिखने वाले के लिए भी चुनौती है, और अनपढ़ नबी ﷺ पर उतरा, फिर भी इसकी फ़साहत और बलाग़त का मुक़ाबला कोई नहीं कर सका।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि इन आयतों का इनकार केवल वही लोग करते हैं जो अत्याचारी हैं — यानी जो सत्य को जानते हुए भी उसे छिपाते हैं, अपनी हठधर्मी और अहंकार की वजह से उसे नहीं मानते। यह ज़ुल्म (अत्याचार) उनका अपनी आत्मा पर होता है, क्योंकि वे अपने लिए सीधा रास्ता छोड़कर गुमराही को चुनते हैं। यहूदियों के विद्वान जो अपनी किताबों में नबी ﷺ की निशानियाँ पढ़ चुके थे, वे भी इसी श्रेणी में आते हैं — वे जानते थे फिर भी इनकार करते थे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन एक ज़िंदा मो'जिज़ा है जो आज तक क़ायम है। यह किताब दिलों में बसती है, हिफ़्ज़ की जाती है, और हर ज़माने में इसके विद्वान इसकी हिफ़ाज़त करते हैं। यह हमारे लिए अल्लाह की सबसे बड़ी ने'मत है। जो लोग इस पर ईमान लाते हैं और इस पर अमल करते हैं, अल्लाह उन्हें इज़्ज़त देता है। और जो लोग जानते हुए भी इनकार करते हैं, वे अपने ऊपर ज़ुल्म करते हैं। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम उन सच्चे ज्ञानियों में शामिल हों जिनके सीनों में यह आयतें महफ़ूज़ हैं। यही कामयाबी का रास्ता है — क़ुरआन को अपना रहनुमा बनाएँ, और अल्लाह की रहमत और हिदायत के दरवाज़े हमारे लिए खुल जाएँगे।
📜 आयत 47-51 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 49
सूरा अल-अंकबूत आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म अता…सूरा आयत 49/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 47–51. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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