अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- तत्लू – पढ़ना, पाठ करना
- तखुत्तुहु – उसे लिखना
- यमीनिक – अपने दाहिने हाथ से
- मुब्तिलून – झूठ बोलने वाले, बातिल (असत्य) के पक्षधर, जो सत्य को मिटाना चाहते हैं
तफ़सीर:
ऐ नबी! यह आपकी सबसे बड़ी निशानी और स्पष्ट प्रमाण है कि आपने इस क़ुरआन से पहले कभी कोई किताब नहीं पढ़ी और न ही अपने दाहिने हाथ से कुछ लिखा। आप उम्मी (अनपढ़) थे, न पढ़ना जानते थे, न लिखना। आपके क़ौम के लोग, आपके दुश्मन और दोस्त सभी यह बात अच्छी तरह जानते थे कि आपने कभी किसी विद्वान के पास बैठकर शिक्षा नहीं ली, किसी पुस्तक को नहीं पढ़ा और न ही कभी लिखने का प्रयास किया।
यही आपकी नुबूव्वत (पैग़म्बरी) की सबसे बड़ी दलील है। जब यह क़ुरआन — जो अपने बलाग़त (वाक्पटुता), फ़साहत (स्पष्टता), ज्ञान और सत्यता में अद्वितीय है — एक अनपढ़ व्यक्ति पर उतरा, तो यह साबित करता है कि यह अल्लाह का कलाम (वचन) है, न कि किसी इंसान की रचना। यदि आप पढ़े-लिखे होते, तो बातिल (असत्य) के लोगों को शक होता कि शायद आपने पिछली किताबों से सीखकर यह क़ुरआन रच लिया है या उनमें से कुछ उद्धृत कर लिया है। लेकिन आपकी उम्मी (अनपढ़) होने की स्थिति ने उनके हर शक और संदेह का दरवाज़ा बंद कर दिया।
यह आज भी हमारे लिए एक जीवंत सबक है कि अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) के आगे हर संभव और असंभव चीज़ है। उसने एक अनपढ़ व्यक्ति को दुनिया का सबसे महान शिक्षक बनाया, जिसकी शिक्षाओं ने पूरी दुनिया को रोशन किया। यह हमारे ईमान की मज़बूती का ज़रिया है कि क़ुरआन अल्लाह की किताब है, और हमें इसे पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने की कोशिश करनी चाहिए। जो लोग सत्य को झुठलाते हैं, उनके पास कोई दलील नहीं है, बल्कि वे सिर्फ़ अपने अहंकार और हठधर्मिता के कारण सत्य को स्वीकार नहीं करते। अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं को मिलती है जो सच्चे दिल से सत्य की तलाश करते हैं।
📜 आयत 46-50 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 48
सूरा अल-अंकबूत आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) क़ुरान से पहले न तो तुम कोई…सूरा आयत 48/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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