अल-अंकबूत · 48/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَمَا كُنتَ تَتْلُو مِن قَبْلِهِ مِن كِتَابٍ وَلَا تَخُطُّهُ بِيَمِينِكَ ۖ إِذًا لَّارْتَابَ الْمُبْطِلُونَ ۝٤٨
Wa maa kunta tatloo min qablihee min kitaabinw wa laa takhuttubhoo bi yameenika izal lartaabal mubtiloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) क़ुरान से पहले न तो तुम कोई किताब ही पढ़ते थे और न अपने हाथ से तुम लिखा करते थे ऐसा होता तो ये झूठे ज़रुर (तुम्हारी नबुवत में) शक करते

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • तत्लू – पढ़ना, पाठ करना
  • तखुत्तुहु – उसे लिखना
  • यमीनिक – अपने दाहिने हाथ से
  • मुब्तिलून – झूठ बोलने वाले, बातिल (असत्य) के पक्षधर, जो सत्य को मिटाना चाहते हैं

तफ़सीर:

ऐ नबी! यह आपकी सबसे बड़ी निशानी और स्पष्ट प्रमाण है कि आपने इस क़ुरआन से पहले कभी कोई किताब नहीं पढ़ी और न ही अपने दाहिने हाथ से कुछ लिखा। आप उम्मी (अनपढ़) थे, न पढ़ना जानते थे, न लिखना। आपके क़ौम के लोग, आपके दुश्मन और दोस्त सभी यह बात अच्छी तरह जानते थे कि आपने कभी किसी विद्वान के पास बैठकर शिक्षा नहीं ली, किसी पुस्तक को नहीं पढ़ा और न ही कभी लिखने का प्रयास किया।

यही आपकी नुबूव्वत (पैग़म्बरी) की सबसे बड़ी दलील है। जब यह क़ुरआन — जो अपने बलाग़त (वाक्पटुता), फ़साहत (स्पष्टता), ज्ञान और सत्यता में अद्वितीय है — एक अनपढ़ व्यक्ति पर उतरा, तो यह साबित करता है कि यह अल्लाह का कलाम (वचन) है, न कि किसी इंसान की रचना। यदि आप पढ़े-लिखे होते, तो बातिल (असत्य) के लोगों को शक होता कि शायद आपने पिछली किताबों से सीखकर यह क़ुरआन रच लिया है या उनमें से कुछ उद्धृत कर लिया है। लेकिन आपकी उम्मी (अनपढ़) होने की स्थिति ने उनके हर शक और संदेह का दरवाज़ा बंद कर दिया।

यह आज भी हमारे लिए एक जीवंत सबक है कि अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) के आगे हर संभव और असंभव चीज़ है। उसने एक अनपढ़ व्यक्ति को दुनिया का सबसे महान शिक्षक बनाया, जिसकी शिक्षाओं ने पूरी दुनिया को रोशन किया। यह हमारे ईमान की मज़बूती का ज़रिया है कि क़ुरआन अल्लाह की किताब है, और हमें इसे पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने की कोशिश करनी चाहिए। जो लोग सत्य को झुठलाते हैं, उनके पास कोई दलील नहीं है, बल्कि वे सिर्फ़ अपने अहंकार और हठधर्मिता के कारण सत्य को स्वीकार नहीं करते। अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं को मिलती है जो सच्चे दिल से सत्य की तलाश करते हैं।



📜 आयत 46-50 — अल-अंकबूत

46۞ وَلَا تُجَادِلُوا أَهْلَ الْكِتَابِ إِلَّا بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ إِلَّا الَّذِينَ ظَلَمُوا مِنْهُمْ ۖ وَقُولُوا آمَنَّا بِالَّذِي أُنزِلَ إِلَيْنَا وَأُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمْ وَاحِدٌ وَنَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ
और (ऐ ईमानदारों) अहले किताब से मनाज़िरा न किया करो मगर उमदा और शाएस्ता अलफाज़ व उनवान से लेकिन उनमें से जिन लोगों ने तुम पर ज़ुल्म किया (उनके साथ रिआयत न करो) और साफ साफ कह दो कि जो किताब हम पर नाज़िल हुई और जो किताब तुम पर नाज़िल हुई है हम तो सब पर ईमान ला चुके और हमारा माबूद और तुम्हारा माबूद एक ही है और हम उसी के फरमाबरदार है
47وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَا إِلَيْكَ الْكِتَابَ ۚ فَالَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَمِنْ هَٰؤُلَاءِ مَن يُؤْمِنُ بِهِ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا الْكَافِرُونَ
और (ऐ रसूल जिस तरह अगले पैग़म्बरों पर किताबें उतारी) उसी तरह हमने तुम्हारे पास किताब नाज़िल की तो जिन लोगों को हमने (पहले) किताब अता की है वह उस पर भी ईमान रखते हैं और (अरबो) में से बाज़ वह हैं जो उस पर ईमान रखते हैं और हमारी आयतों के तो बस पक्के कट्टर काफिर ही मुनकिर है
48وَمَا كُنتَ تَتْلُو مِن قَبْلِهِ مِن كِتَابٍ وَلَا تَخُطُّهُ بِيَمِينِكَ ۖ إِذًا لَّارْتَابَ الْمُبْطِلُونَ
और (ऐ रसूल) क़ुरान से पहले न तो तुम कोई किताब ही पढ़ते थे और न अपने हाथ से तुम लिखा करते थे ऐसा होता तो ये झूठे ज़रुर (तुम्हारी नबुवत में) शक करते
49بَلْ هُوَ آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ فِي صُدُورِ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا الظَّالِمُونَ
मगर जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म अता हुआ है उनके दिल में ये (क़ुरान) वाजेए व रौशन आयतें हैं और सरकशी के सिवा हमारी आयतो से कोई इन्कार नहीं करता
50وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَاتٌ مِّن رَّبِّهِ ۖ قُلْ إِنَّمَا الْآيَاتُ عِندَ اللَّهِ وَإِنَّمَا أَنَا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
और (कुफ्फ़ार अरब) कहते हैं कि इस (रसूल) पर उसके परवरदिगार की तरफ से मौजिज़े क्यों नही नाज़िल होते (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि मौजिज़े तो बस ख़ुदा ही के पास हैं और मै तो सिर्फ साफ साफ (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला हूँ
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
48आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 48

सूरा अल-अंकबूत आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) क़ुरान से पहले न तो तुम कोई…

सूरा आयत 48/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए