अल-अंकबूत · 50/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَاتٌ مِّن رَّبِّهِ ۖ قُلْ إِنَّمَا الْآيَاتُ عِندَ اللَّهِ وَإِنَّمَا أَنَا نَذِيرٌ مُّبِينٌ ۝٥٠
Wa qaaloo law laaa unzila `alaihi aayaatum mir Rabbihee qul innamal aayaatu `indal laahi wa innamaaa ana nazeerum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और (कुफ्फ़ार अरब) कहते हैं कि इस (रसूल) पर उसके परवरदिगार की तरफ से मौजिज़े क्यों नही नाज़िल होते (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि मौजिज़े तो बस ख़ुदा ही के पास हैं और मै तो सिर्फ साफ साफ (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला हूँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَوْلَا (लौला): क्यों नहीं? / ऐसा क्यों नहीं हुआ?
  • آيَاتٌ (आयातुन): निशानियाँ, चमत्कार, मोजिज़े।
  • نَذِيرٌ (नज़ीर): डराने वाला, सावधान करने वाला।
  • مُبِينٌ (मुबीन): स्पष्ट, खुला हुआ, रोशन।

तफ़सीर (व्याख्या):

मक्का के मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने आप ﷺ से कहा कि "आप पर आपके रब की ओर से निशानियाँ (चमत्कार) क्यों नहीं उतारी गईं?" उनका मतलब था कि जैसे पिछले नबियों को मोजिज़े दिए गए — जैसे हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम को ऊँटनी, हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को असा (लाठी) — वैसे ही मुहम्मद ﷺ पर भी कोई प्रत्यक्ष चमत्कार क्यों नहीं भेजा गया? वे यह कहकर आप ﷺ की सच्चाई पर सवाल उठा रहे थे, हालाँकि उन्हें कुरआन जैसा अज़ीम चमत्कार पहले ही मिल चुका था।

अल्लाह तआला ने आप ﷺ को सिखाया कि आप उन्हें जवाब दें: "सारी निशानियाँ अल्लाह ही के पास हैं।" यानी चमत्कार भेजने का अधिकार सिर्फ़ अल्लाह को है। वह जब चाहे, जिसे चाहे, जैसे चाहे निशानी भेजता है। यह मेरे हाथ में नहीं है कि मैं तुम्हारी मर्ज़ी से कोई चमत्कार पेश कर दूँ। अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) यह है कि उसने मुझे चमत्कारों का दिखाने वाला नहीं, बल्कि "स्पष्ट रूप से डराने वाला" बनाकर भेजा है। मेरा काम यह है कि तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराऊँ, सीधा रास्ता बताऊँ और सच और झूठ में फ़र्क़ साफ़ कर दूँ। अगर तुम मानोगे तो भलाई तुम्हारे लिए है, और अगर नहीं मानोगे तो अल्लाह का अज़ाब तुम्हारे लिए है।

इस आयत में एक बड़ा सबक़ है कि नबी ﷺ का असली मोजिज़ा कुरआन है, जो हमेशा के लिए क़ायम है। पिछले मोजिज़े वक़्त के साथ ख़त्म हो गए, लेकिन कुरआन का चमत्कार क़यामत तक बाक़ी है। यह सबसे बड़ी निशानी है, जो अक्ल और दिल दोनों को संतुष्ट करती है।


दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ने जो कुछ भी भेजा है, वह हमारी भलाई के लिए है। कुरआन हमारे लिए सबसे बड़ी रहमत और निशानी है। आज भी जो शख्स दिल से कुरआन पढ़ता है और उस पर अमल करता है, उसे हर कदम पर अल्लाह की मदद और हिदायत मिलती है। हमें चाहिए कि हम नबी ﷺ की सुन्नत पर चलें और कुरआन को अपनी ज़िंदगी में उतारें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हमें सच्ची समझ अता करे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 48-52 — अल-अंकबूत

48وَمَا كُنتَ تَتْلُو مِن قَبْلِهِ مِن كِتَابٍ وَلَا تَخُطُّهُ بِيَمِينِكَ ۖ إِذًا لَّارْتَابَ الْمُبْطِلُونَ
और (ऐ रसूल) क़ुरान से पहले न तो तुम कोई किताब ही पढ़ते थे और न अपने हाथ से तुम लिखा करते थे ऐसा होता तो ये झूठे ज़रुर (तुम्हारी नबुवत में) शक करते
49بَلْ هُوَ آيَاتٌ بَيِّنَاتٌ فِي صُدُورِ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا الظَّالِمُونَ
मगर जिन लोगों को (ख़ुदा की तरफ से) इल्म अता हुआ है उनके दिल में ये (क़ुरान) वाजेए व रौशन आयतें हैं और सरकशी के सिवा हमारी आयतो से कोई इन्कार नहीं करता
50وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَاتٌ مِّن رَّبِّهِ ۖ قُلْ إِنَّمَا الْآيَاتُ عِندَ اللَّهِ وَإِنَّمَا أَنَا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
और (कुफ्फ़ार अरब) कहते हैं कि इस (रसूल) पर उसके परवरदिगार की तरफ से मौजिज़े क्यों नही नाज़िल होते (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि मौजिज़े तो बस ख़ुदा ही के पास हैं और मै तो सिर्फ साफ साफ (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाला हूँ
51أَوَلَمْ يَكْفِهِمْ أَنَّا أَنزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ يُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَرَحْمَةً وَذِكْرَىٰ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
क्या उनके लिए ये काफी नहीं कि हमने तुम पर क़ुरान नाज़िल किया जो उनके सामने पढ़ा जाता है इसमें शक नहीं कि ईमानदार लोगों के लिए इसमें (ख़ुदा की बड़ी) मेहरबानी और (अच्छी ख़ासी) नसीहत है
52قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ شَهِيدًا ۖ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ آمَنُوا بِالْبَاطِلِ وَكَفَرُوا بِاللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
तुम कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है जो सारे आसमान व ज़मीन की चीज़ों को जानता है-और जिन लोगों ने बातिल को माना और ख़ुदा से इन्कार किया वही लोग बड़े घाटे में रहेंगे
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
50आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 50

सूरा अल-अंकबूत आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (कुफ्फ़ार अरब) कहते हैं कि इस (रसूल) पर उसके…

सूरा आयत 50/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए