Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْلَا (लौला): क्यों नहीं? / ऐसा क्यों नहीं हुआ?
- آيَاتٌ (आयातुन): निशानियाँ, चमत्कार, मोजिज़े।
- نَذِيرٌ (नज़ीर): डराने वाला, सावधान करने वाला।
- مُبِينٌ (मुबीन): स्पष्ट, खुला हुआ, रोशन।
तफ़सीर (व्याख्या):
मक्का के मुशरिकीन (बहुदेववादियों) ने आप ﷺ से कहा कि "आप पर आपके रब की ओर से निशानियाँ (चमत्कार) क्यों नहीं उतारी गईं?" उनका मतलब था कि जैसे पिछले नबियों को मोजिज़े दिए गए — जैसे हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम को ऊँटनी, हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को असा (लाठी) — वैसे ही मुहम्मद ﷺ पर भी कोई प्रत्यक्ष चमत्कार क्यों नहीं भेजा गया? वे यह कहकर आप ﷺ की सच्चाई पर सवाल उठा रहे थे, हालाँकि उन्हें कुरआन जैसा अज़ीम चमत्कार पहले ही मिल चुका था।
अल्लाह तआला ने आप ﷺ को सिखाया कि आप उन्हें जवाब दें: "सारी निशानियाँ अल्लाह ही के पास हैं।" यानी चमत्कार भेजने का अधिकार सिर्फ़ अल्लाह को है। वह जब चाहे, जिसे चाहे, जैसे चाहे निशानी भेजता है। यह मेरे हाथ में नहीं है कि मैं तुम्हारी मर्ज़ी से कोई चमत्कार पेश कर दूँ। अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) यह है कि उसने मुझे चमत्कारों का दिखाने वाला नहीं, बल्कि "स्पष्ट रूप से डराने वाला" बनाकर भेजा है। मेरा काम यह है कि तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराऊँ, सीधा रास्ता बताऊँ और सच और झूठ में फ़र्क़ साफ़ कर दूँ। अगर तुम मानोगे तो भलाई तुम्हारे लिए है, और अगर नहीं मानोगे तो अल्लाह का अज़ाब तुम्हारे लिए है।
इस आयत में एक बड़ा सबक़ है कि नबी ﷺ का असली मोजिज़ा कुरआन है, जो हमेशा के लिए क़ायम है। पिछले मोजिज़े वक़्त के साथ ख़त्म हो गए, लेकिन कुरआन का चमत्कार क़यामत तक बाक़ी है। यह सबसे बड़ी निशानी है, जो अक्ल और दिल दोनों को संतुष्ट करती है।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ने जो कुछ भी भेजा है, वह हमारी भलाई के लिए है। कुरआन हमारे लिए सबसे बड़ी रहमत और निशानी है। आज भी जो शख्स दिल से कुरआन पढ़ता है और उस पर अमल करता है, उसे हर कदम पर अल्लाह की मदद और हिदायत मिलती है। हमें चाहिए कि हम नबी ﷺ की सुन्नत पर चलें और कुरआन को अपनी ज़िंदगी में उतारें। यही हमारी कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हमें सच्ची समझ अता करे। आमीन।
📜 आयत 48-52 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 50
सूरा अल-अंकबूत आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (कुफ्फ़ार अरब) कहते हैं कि इस (रसूल) पर उसके…सूरा आयत 50/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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