अज़-ज़ुमर · 17/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
وَالَّذِينَ اجْتَنَبُوا الطَّاغُوتَ أَن يَعْبُدُوهَا وَأَنَابُوا إِلَى اللَّهِ لَهُمُ الْبُشْرَىٰ ۚ فَبَشِّرْ عِبَادِ ۝١٧
Wallazeenaj tanabut Taaghoota ai ya`budoohaa wa anaabooo ilal laahi lahumul bushraa; fabashshir `ibaad
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग बुतों से उनके पूजने से बचे रहे और ख़ुदा ही की तरफ रूजु की उनके लिए (जन्नत की) ख़ुशख़बरी है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ताग़ूत (الطَّاغُوت): अल्लाह के सिवा हर उस चीज़ की इबादत करना जो इंसान को अल्लाह की राह से भटकाए, चाहे वह मूर्ति हो, शैतान हो, या कोई सरकश इंसान। यह "तुग़यान" (सरकशी) से बना है, जिसमें अतिशयोक्ति के लिए "त" बढ़ाया गया है।
  • اجْتَنَبُوا: दूर रहे, पूरी तरह से परहेज़ किया।
  • أَنَابُوا: रुजू हुए, पूरी तरह से अल्लाह की ओर लौट आए, तौबा की।
  • الْبُشْرَىٰ: खुशखबरी, शुभ सूचना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की खुशखबरी सुना रहे हैं जो ताग़ूत की इबादत से बचते हैं। यानी जो लोग शैतान की इबादत, मूर्तियों की पूजा, और अल्लाह के सिवा किसी और की बंदगी से पूरी तरह परहेज़ करते हैं — चाहे वह किसी भी रूप में हो — और फिर सच्चे दिल से अल्लाह की ओर रुजू हो जाते हैं, उसकी इबादत को खालिस कर देते हैं, और अपने गुनाहों से तौबा कर लेते हैं, तो ऐसे लोगों के लिए हर हाल में खुशखबरी है।

यह खुशखबरी क्या है? पहले इस दुनिया में — उन्हें अच्छाई की तौफ़ीक़ मिलती है, लोगों के बीच अच्छा नाम मिलता है, और अल्लाह की तरफ से दिल को सुकून और इत्मिनान मिलता है। फिर मौत के वक़्त — फ़रिश्ते उन्हें जन्नत की खुशखबरी सुनाते हैं। क़ब्र में — उन्हें आराम और रोशनी मिलती है। और क़यामत के दिन — उन्हें अल्लाह की रज़ा और जन्नत के हमेशा रहने वाले नेअमतें मिलती हैं। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ से फ़रमाता है: "तो ऐ नबी! मेरे उन बंदों को खुशखबरी सुना दो" — यानी वे बंदे जो बात को सुनते हैं और उसके सबसे अच्छे हिस्से की पैरवी करते हैं। वे हर बात को सुनते हैं, लेकिन जो सबसे अच्छी और सबसे सीधी बात होती है, उसे अपना लेते हैं। सबसे अच्छी बात अल्लाह का कलाम (क़ुरआन) है, फिर उसके रसूल ﷺ की हदीस। ऐसे लोग ही हैं जिन्हें अल्लाह ने सीधी राह दिखाई, उन्हें अच्छे अख़लाक़ और अच्छे आमाल की तौफ़ीक़ दी। और यही लोग सच्ची अक़्ल वाले हैं — क्योंकि उन्होंने अपनी अक़्ल को शैतान की गुलामी से बचाकर अल्लाह की इबादत में लगाया।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के दरवाज़े पर लौटने में ही हमारी भलाई है। चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। ताग़ूत से दूर रहना और अल्लाह की ओर रुजू होना — यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता — हर कदम पर उन्हें खुशखबरी मिलती है। आइए, हम भी अपने दिल को ताग़ूत की गुलामी से आज़ाद करें और अल्लाह की रहमत की तरफ पूरी तरह लौट आएं। यही सबसे बड़ी सफलता है।



📜 आयत 15-19 — अज़-ज़ुमर

15فَاعْبُدُوا مَا شِئْتُم مِّن دُونِهِ ۗ قُلْ إِنَّ الْخَاسِرِينَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَأَهْلِيهِمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ أَلَا ذَٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُبِينُ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि फिल हक़ीक़त घाटे में वही लोग हैं जिन्होंने अपना और अपने लड़के वालों का क़यामत के दिन घाटा किया आगाह रहो कि सरीही (खुल्लम खुल्ला) घाटा यही है कि उनके लिए उनके ऊपर से आग ही के ओढ़ने होगें
16لَهُم مِّن فَوْقِهِمْ ظُلَلٌ مِّنَ النَّارِ وَمِن تَحْتِهِمْ ظُلَلٌ ۚ ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ اللَّهُ بِهِ عِبَادَهُ ۚ يَا عِبَادِ فَاتَّقُونِ
और उनके नीचे भी (आग ही के) बिछौने ये वह अज़ाब है जिससे खुदा अपने बन्दों को डराता है तो ऐ मेरे बन्दों मुझी से डरते रहो
17وَالَّذِينَ اجْتَنَبُوا الطَّاغُوتَ أَن يَعْبُدُوهَا وَأَنَابُوا إِلَى اللَّهِ لَهُمُ الْبُشْرَىٰ ۚ فَبَشِّرْ عِبَادِ
और जो लोग बुतों से उनके पूजने से बचे रहे और ख़ुदा ही की तरफ रूजु की उनके लिए (जन्नत की) ख़ुशख़बरी है
18الَّذِينَ يَسْتَمِعُونَ الْقَوْلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحْسَنَهُ ۚ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ هَدَاهُمُ اللَّهُ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمْ أُولُو الْأَلْبَابِ
तो (ऐ रसूल) तुम मेरे (ख़ास) बन्दों को खुशख़बरी दे दो जो बात को जी लगाकर सुनते हैं और फिर उसमें से अच्छी बात पर अमल करते हैं यही वह लोग हैं जिनकी खुदा ने हिदायत की और यही लोग अक्लमन्द हैं
19أَفَمَنْ حَقَّ عَلَيْهِ كَلِمَةُ الْعَذَابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِي النَّارِ
तो (ऐ रसूल) भला जिस शख्स पर अज़ाब का वायदा पूरा हो चुका हो तो क्या तुम उस शख्स की ख़लासी दे सकते हो
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
17आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 17

सूरा अज़-ज़ुमर आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग बुतों से उनके पूजने से बचे रहे…

सूरा आयत 17/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए