अज़-ज़ुमर · 16/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
لَهُم مِّن فَوْقِهِمْ ظُلَلٌ مِّنَ النَّارِ وَمِن تَحْتِهِمْ ظُلَلٌ ۚ ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ اللَّهُ بِهِ عِبَادَهُ ۚ يَا عِبَادِ فَاتَّقُونِ ۝١٦
Lahum min fawqihim zulalum minan Naari wa min tahtihim zulal; zaalika yukhaw wiful laahu bihee `ibaadah; yaa `ibaadi fattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
और उनके नीचे भी (आग ही के) बिछौने ये वह अज़ाब है जिससे खुदा अपने बन्दों को डराता है तो ऐ मेरे बन्दों मुझी से डरते रहो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظُلَلٌ: परतें, छतरियाँ या साये (यहाँ आग के टुकड़े और धुएँ की परतें मुराद हैं)।
  • يُخَوِّفُ: डराता है, भय दिखाता है।
  • فَاتَّقُونِ: मुझसे डरो, मेरी नाफ़रमानी से बचो।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के हाल का वर्णन कर रही है जिन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया और उसके दीन को झुठलाया। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों के लिए क़ियामत के दिन जहन्नम में उनके ऊपर आग की परतें होंगी—धुआँ, लपटें और जलती हुई चीज़ें जो उन्हें ढक लेंगी, और उनके नीचे भी आग की ही परतें होंगी जो उनके बिछौने और फ़र्श का काम देंगी। यानी वे चारों तरफ़ से आग में घिरे होंगे—ऊपर से भी और नीचे से भी, और यह अज़ाब उन्हें हर तरफ़ से घेर लेगा।

यह वर्णन अल्लाह तआला ने अपने बंदों को डराने के लिए बयान किया है, ताकि वे इस अज़ाब से बचें और अपने रब की नाफ़रमानी से परहेज़ करें। अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान है, इसलिए वह पहले से आगाह कर देता है ताकि कोई बंदा जहानत में न जाए। फिर अल्लाह तआला प्यार भरे अंदाज़ में फ़रमाता है: "ऐ मेरे बंदो! मुझसे डरो"—यानी मेरे हुक्मों की पालना करो, मेरी मनाही से बचो, और मेरे अज़ाब से अपनी हिफ़ाज़त करो। यह अल्लाह की रहमत और शफ़्क़त का दौर है कि वह अपने बंदों को जहन्नम के अज़ाब से डराकर जन्नत की राह दिखाता है।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को मुख़ातिब करके फ़रमाता है: "ऐ मेरे बंदो!"—यह निहायत मुहब्बत भरा ख़िताब है। अल्लाह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, उसकी इबादत करें और उसके अज़ाब से बचें। यह ख़िताब हमें बताता है कि अल्लाह अपने बंदों से बेपनाह मुहब्बत करता है और उनकी भलाई चाहता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के इस प्यार भरे ख़िताब का जवाब अपने अमल से दें—नमाज़ क़ायम करें, रोज़ा रखें, ज़कात दें, और हर उस काम से बचें जो अल्लाह को नापसंद है। याद रखें, अल्लाह का डर ही वह चीज़ है जो हमें जहन्नम से बचाकर जन्नत तक पहुँचाती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — अज़-ज़ुमर

14قُلِ اللَّهَ أَعْبُدُ مُخْلِصًا لَّهُ دِينِي
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं अपनी इबादत को उसी के वास्ते ख़ालिस करके खुदा ही की बन्दगी करता हूँ (अब रहे तुम) तो उसके सिवा जिसको चाहो पूजो
15فَاعْبُدُوا مَا شِئْتُم مِّن دُونِهِ ۗ قُلْ إِنَّ الْخَاسِرِينَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَأَهْلِيهِمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۗ أَلَا ذَٰلِكَ هُوَ الْخُسْرَانُ الْمُبِينُ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि फिल हक़ीक़त घाटे में वही लोग हैं जिन्होंने अपना और अपने लड़के वालों का क़यामत के दिन घाटा किया आगाह रहो कि सरीही (खुल्लम खुल्ला) घाटा यही है कि उनके लिए उनके ऊपर से आग ही के ओढ़ने होगें
16لَهُم مِّن فَوْقِهِمْ ظُلَلٌ مِّنَ النَّارِ وَمِن تَحْتِهِمْ ظُلَلٌ ۚ ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ اللَّهُ بِهِ عِبَادَهُ ۚ يَا عِبَادِ فَاتَّقُونِ
और उनके नीचे भी (आग ही के) बिछौने ये वह अज़ाब है जिससे खुदा अपने बन्दों को डराता है तो ऐ मेरे बन्दों मुझी से डरते रहो
17وَالَّذِينَ اجْتَنَبُوا الطَّاغُوتَ أَن يَعْبُدُوهَا وَأَنَابُوا إِلَى اللَّهِ لَهُمُ الْبُشْرَىٰ ۚ فَبَشِّرْ عِبَادِ
और जो लोग बुतों से उनके पूजने से बचे रहे और ख़ुदा ही की तरफ रूजु की उनके लिए (जन्नत की) ख़ुशख़बरी है
18الَّذِينَ يَسْتَمِعُونَ الْقَوْلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحْسَنَهُ ۚ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ هَدَاهُمُ اللَّهُ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمْ أُولُو الْأَلْبَابِ
तो (ऐ रसूल) तुम मेरे (ख़ास) बन्दों को खुशख़बरी दे दो जो बात को जी लगाकर सुनते हैं और फिर उसमें से अच्छी बात पर अमल करते हैं यही वह लोग हैं जिनकी खुदा ने हिदायत की और यही लोग अक्लमन्द हैं
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अनुवाद — अज़-ज़ुमर 16

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Tuesday, August 18, 2026

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