अज़-ज़ुमर · 18/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
الَّذِينَ يَسْتَمِعُونَ الْقَوْلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحْسَنَهُ ۚ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ هَدَاهُمُ اللَّهُ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمْ أُولُو الْأَلْبَابِ ۝١٨
Allazeena yastami`oonal qawla fayattabi`oona ahsanah; ulaaa`ikal lazeena hadaahumul laahu wa ulaaa`ika hum ulul albaab
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम मेरे (ख़ास) बन्दों को खुशख़बरी दे दो जो बात को जी लगाकर सुनते हैं और फिर उसमें से अच्छी बात पर अमल करते हैं यही वह लोग हैं जिनकी खुदा ने हिदायत की और यही लोग अक्लमन्द हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَمِعُونَ الْقَوْلَ: वाणी को ध्यान से सुनते हैं।
  • فَيَتَّبِعُونَ أَحْسَنَهُ: फिर उसका सबसे अच्छा (उत्तम) भाग अपनाते हैं।
  • هَدَاهُمُ اللَّهُ: अल्लाह ने उन्हें मार्गदर्शन दिया।
  • أُولُو الْأَلْبَابِ: बुद्धिमान और समझदार लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन नेक बंदों की विशेषता बयान करती है जिन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत से नवाज़ा है। ये वे लोग हैं जो हर बात को ध्यान से सुनते हैं, उसे समझते हैं, और फिर उसमें से सबसे अच्छी और सबसे उपयोगी बात को चुनकर उस पर अमल करते हैं। वे किसी भी बात को सुनकर उस पर आँख बंद करके नहीं चलते, बल्कि अच्छे और बुरे में फर्क करते हैं, और जो बात उन्हें अल्लाह के करीब ले जाए, उसे ही अपनाते हैं।

सबसे अच्छी वाणी अल्लाह की किताब (क़ुरआन) और उसके रसूल (ﷺ) की शिक्षाएँ हैं। ये लोग क़ुरआन की उन आयतों को प्राथमिकता देते हैं जो क्षमा, सहनशीलता, धैर्य, नेकी और अच्छे आचरण की शिक्षा देती हैं। वे केवल सुनने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उस पर अमल करते हैं और अपने जीवन को उसी के अनुसार ढालते हैं।

ऐसे लोगों के बारे में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यही वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने सीधा रास्ता दिखाया है। अल्लाह ने उन्हें सही समझ, अच्छे कर्म और उत्तम आचरण की तौफ़ीक़ दी है। और यही लोग सच्चे बुद्धिमान हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी अक्ल का सही इस्तेमाल किया — उसे दुनिया की फ़ानी चीज़ों में नहीं लगाया, बल्कि अल्लाह की रज़ा और आख़िरत की भलाई की तरफ़ लगाया।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची बुद्धिमानी यह नहीं है कि इंसान कितना पढ़ा-लिखा है, बल्कि यह है कि वह सुनकर अच्छी बात को पहचाने और उस पर अमल करे। जो व्यक्ति हर बात को सुनता है, फिर उसमें से सबसे अच्छी बात को चुनता है और उस पर चलता है, वही दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब है।

प्यारे भाइयों और बहनों! आइए हम भी इस गुण को अपनाएँ। जब भी हम कोई बात सुनें — चाहे वह किसी से भी आए — तो उसे अक्ल की कसौटी पर परखें, क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में देखें, और फिर जो बात सबसे अच्छी और सबसे सच्ची हो, उसे ही अपनाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत, उसकी हिदायत और जन्नत की तरफ़ ले जाता है। अल्लाह हम सभी को अच्छी बात सुनने, समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 16-20 — सूरा अज़-ज़ुमर

16لَهُم مِّن فَوْقِهِمْ ظُلَلٌ مِّنَ النَّارِ وَمِن تَحْتِهِمْ ظُلَلٌ ۚ ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ اللَّهُ بِهِ عِبَادَهُ ۚ يَا عِبَادِ فَاتَّقُونِ
और उनके नीचे भी (आग ही के) बिछौने ये वह अज़ाब है जिससे खुदा अपने बन्दों को डराता है तो ऐ मेरे बन्दों मुझी से डरते रहो
17وَالَّذِينَ اجْتَنَبُوا الطَّاغُوتَ أَن يَعْبُدُوهَا وَأَنَابُوا إِلَى اللَّهِ لَهُمُ الْبُشْرَىٰ ۚ فَبَشِّرْ عِبَادِ
और जो लोग बुतों से उनके पूजने से बचे रहे और ख़ुदा ही की तरफ रूजु की उनके लिए (जन्नत की) ख़ुशख़बरी है
18الَّذِينَ يَسْتَمِعُونَ الْقَوْلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحْسَنَهُ ۚ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ هَدَاهُمُ اللَّهُ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمْ أُولُو الْأَلْبَابِ
तो (ऐ रसूल) तुम मेरे (ख़ास) बन्दों को खुशख़बरी दे दो जो बात को जी लगाकर सुनते हैं और फिर उसमें से अच्छी बात पर अमल करते हैं यही वह लोग हैं जिनकी खुदा ने हिदायत की और यही लोग अक्लमन्द हैं
19أَفَمَنْ حَقَّ عَلَيْهِ كَلِمَةُ الْعَذَابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِي النَّارِ
तो (ऐ रसूल) भला जिस शख्स पर अज़ाब का वायदा पूरा हो चुका हो तो क्या तुम उस शख्स की ख़लासी दे सकते हो
20لَٰكِنِ الَّذِينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ غُرَفٌ مِّن فَوْقِهَا غُرَفٌ مَّبْنِيَّةٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ وَعْدَ اللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ الْمِيعَادَ
जो आग में (पड़ा) हो मगर जो लोग अपने परवरदिगार से डरते रहे उनके ऊँचे-ऊँचे महल हैं (और) बाला ख़ानों पर बालाख़ाने बने हुए हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं ये खुदा का वायदा है (और) वायदा ख़िलाफी नहीं किया करता
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 18

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Thursday, October 1, 2026

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