Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अफ़ाअल्लाहु (अल्लाह ने लौटाया/दिया): यानी बिना युद्ध के दुश्मनों से प्राप्त हुआ धन।
- अहलिल क़ुरा (बस्तियों के निवासी): यहाँ मुराद काफ़िरों के वे क़बीले हैं जिनसे बिना जंग के माल हासिल हुआ।
- दौलत (हाथों-हाथ घूमने वाला धन): यानी ऐसा माल जो सिर्फ़ अमीरों के बीच चलता रहे।
- इब्नुस सबील (राह का मुसाफ़िर): वह अजनबी जो सफ़र में हो और उसका ख़र्च ख़त्म हो गया हो।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में उस माल के बंटवारे का नियम बताया है जो बिना जंग और लड़ाई के काफ़िरों से मुसलमानों को मिलता है। यह माल सिर्फ़ किसी एक व्यक्ति या गिरोह का नहीं, बल्कि अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का है, और फिर उन लोगों का है जिनका इस माल में हक़ है। इसमें रसूल ﷺ के रिश्तेदार, अनाथ बच्चे, मिस्कीन और राह के मुसाफ़िर शामिल हैं। अल्लाह ने यह नियम इसलिए बनाया कि दौलत सिर्फ़ अमीरों के बीच ही न घूमती रहे, बल्कि ग़रीबों और ज़रूरतमंदों तक भी पहुँचे। यह इस्लाम का वह अद्भुत निज़ाम है जो समाज में बराबरी और भाईचारा पैदा करता है, ताकि कोई भूखा न सोए और कोई इतना अमीर न हो जाए कि दूसरों की परवाह ही न करे।
फिर अल्लाह तआला ने एक बहुत बड़ा उसूल बयान किया: "जो कुछ रसूल तुम्हें दें वह ले लो, और जिस चीज़ से वह मना करें उससे रुक जाओ।" यह आयत साबित करती है कि रसूल ﷺ की हर बात, हर हुक्म और हर मना करना अल्लाह की तरफ़ से है। चाहे वह माल का मामला हो, इबादत का, या ज़िंदगी के किसी भी पहलू का। इसलिए एक मुसलमान की ज़िंदगी पूरी तरह से क़ुरआन और सुन्नत के मुताबिक़ होनी चाहिए। जो बात रसूल ﷺ ने कही, उसे मानना हमारे ऊपर फ़र्ज़ है, और जिससे रोका है, उससे बचना ज़रूरी है। यही सच्ची इताअत है।
आख़िर में अल्लाह तआला डराते हुए फ़रमाता है: "अल्लाह से डरो, बेशक अल्लाह सख़्त अज़ाब वाला है।" यानी अल्लाह के हुक्मों की ख़िलाफ़वरी करने वालों, रसूल ﷺ की बात न मानने वालों और माल के मामले में नाइंसाफ़ी करने वालों के लिए अल्लाह का अज़ाब बहुत सख़्त है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह के हुक्मों का पालन करे, रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनाए और अपने माल और ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के लिए खर्च करे। यही कामयाबी का रास्ता है, और यही वह रास्ता है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त दिलाता है।
📜 आयत 5-9 — सूरा अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 7
सूरा अल-हश्र आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो जो माल ख़ुदा ने अपने रसूल को देहात वालों…सूरा आयत 7/24 — सूरा अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हश्र सुनें, सूरा अल-हश्र अनुवाद, सूरा अल-हश्र mp3, सूरा अल-हश्र pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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