अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अफ़ाअ (أَفَاءَ): लौटाना, देना, या माल को फ़ई (बिना युद्ध के मिलने वाला धन) के रूप में प्रदान करना।
- औजफ़्तुम (أَوْجَفْتُمْ): तेज़ी से दौड़ाना, घोड़े या ऊँट को तेज़ चलाना।
- ख़ैल (خَيْل): घोड़े।
- रिकाब (رِكَاب): ऊँट, विशेष रूप से सवारी के ऊँट।
- युसल्लितु (يُسَلِّطُ): अधिकार देना, शक्ति प्रदान करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत बनी नज़ीर (मदीना के यहूदी क़बीले) के माल के बारे में है, जो बिना किसी युद्ध के अल्लाह के रसूल (ﷺ) को मिला। जब यहूदियों ने धोखा किया और संधि तोड़ी, तो अल्लाह ने उनके दिलों में भय डाल दिया और उन्होंने अपने घर-बार और माल छोड़कर जाना स्वीकार किया। यह माल (फ़ई) मुसलमानों को बिना किसी कठिनाई के मिला — न घोड़े दौड़ाने पड़े, न ऊँट हाँकने पड़े, न कोई जंग लड़नी पड़ी।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और जो माल अल्लाह ने अपने रसूल को उन (बनी नज़ीर) से दिया (फ़ई के रूप में), तो तुमने उसके लिए न घोड़े दौड़ाए और न ऊँट, बल्कि अल्लाह अपने रसूलों को जिस पर चाहता है अधिकार दे देता है। और अल्लाह हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है।"
इस आयत में अल्लाह तआला ने सिखाया कि विजय और धन केवल ताकत या साधनों से नहीं मिलते, बल्कि अल्लाह की इच्छा और शक्ति से मिलते हैं। जब अल्लाह चाहता है, वह अपने नबी को बिना किसी लड़ाई के दुश्मनों पर विजय दे देता है। यह अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है कि उसने अपने रसूल (ﷺ) को बनी नज़ीर के माल पर इस तरह क़ाबू दिया कि मुसलमानों को कोई मशक़्कत नहीं उठानी पड़ी।
यह माल विशेष रूप से रसूल (ﷺ) के लिए था, क्योंकि यह बिना युद्ध के मिला था। रसूल (ﷺ) ने इसे अपनी मर्ज़ी के अनुसार ख़र्च किया — मुहाजिरों (प्रवासियों) की ज़रूरतों को पूरा किया, क्योंकि वे अपना सब कुछ छोड़कर आए थे।
इस आयत से हमें कई सबक मिलते हैं:
- अल्लाह पर भरोसा: जीत और कामयाबी केवल साधनों से नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद से मिलती है। जब अल्लाह किसी काम को करना चाहता है, तो वह आसान कर देता है।
- रसूल (ﷺ) की विशेष स्थिति: यह आयत रसूल (ﷺ) के सम्मान और अल्लाह की ओर से उनकी विशेष मदद को दर्शाती है। अल्लाह ने उन्हें ऐसी फ़तह दी जिसमें कोई खून नहीं बहा।
- अल्लाह की क़ुदरत: अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है — वह जिसे चाहे इज़्ज़त दे, जिसे चाहे ज़िल्लत। वह बिना किसी साधन के भी अपने बंदों की मदद कर सकता है।
- मुसलमानों के लिए ख़ुशख़बरी: यह आयत मुसलमानों को यह विश्वास दिलाती है कि जब वे अल्लाह के रास्ते में हों, तो अल्लाह उन्हें ऐसे तरीकों से मदद देता है जिनकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती।
आज भी जब हम इस आयत को पढ़ते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि हमारी कामयाबी अल्लाह के हाथ में है। अगर हम अल्लाह के दीन की मदद करेंगे, तो अल्लाह हमारी मदद करेगा — चाहे साधन कम हों, चाहे ताकत कम हो। अल्लाह की शक्ति असीमित है, और वह हर मुश्किल को आसान कर सकता है। हमें अपने कामों में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और यह यकीन रखना चाहिए कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।
📜 आयत 4-8 — अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 6
सूरा अल-हश्र आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो) जो माल ख़ुदा ने अपने रसूल को उन लोगों…सूरा आयत 6/24 — अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हश्र सुनें, अल-हश्र अनुवाद, अल-हश्र mp3, अल-हश्र pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








