وَهَٰذَا صِرَاطُ رَبِّكَ مُسْتَقِيمًا ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ ١٢٦
🔤 Transliteration
Wa haazaa siraatu Rabbika Mustaqeemaa; qad fassalnal Aayaati liqawminy yazzakkaroon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) ये (इस्लाम) तुम्हारे परवरदिगार का (बनाया हुआ) सीधा रास्ता है इबरत हासिल करने वालों के वास्ते हमने अपने आयात तफसीलन बयान कर दिए हैं
🌐 Additional reference in اردو
शब्दार्थ:
- صِرَاطُ – मार्ग, रास्ता
- مُسْتَقِيمًا – सीधा, बिना किसी टेढ़ापन के
- فَصَّلْنَا – हमने विस्तार से स्पष्ट कर दिया
- الْآيَاتِ – निशानियाँ, प्रमाण, आयतें
- يَذَّكَّرُونَ – वे लोग जो सीख लेते हैं, चेतते हैं, विचार करते हैं
विस्तृत व्याख्या:
ऐ नबी! यह धर्म और मार्ग जिस पर आप चल रहे हैं—यही आपके रब का सीधा मार्ग है। यह वह रास्ता है जिसे अल्लाह ने अपने बंदों के लिए चुना है, और इसमें कोई टेढ़ापन, कोई कमी और कोई भटकाव नहीं है। यह मार्ग सीधा है, क्योंकि यह बंदे को उसके रब तक पहुँचाता है, उसे उसकी रज़ा और जन्नत तक ले जाता है।
अल्लाह तआला ने इस मार्ग को स्पष्ट करने के लिए अपनी आयतें और निशानियाँ विस्तार से बयान कर दी हैं। उसने कुरआन में हर प्रकार के प्रमाण, दलीलें और उपदेश रख दिए हैं, ताकि जो लोग समझना चाहें और अपनी अक्ल से काम लेना चाहें, वे इनसे सीख लें। ये आयतें उन लोगों के लिए हैं जो ध्यान से सुनते हैं, ग़ौर करते हैं और अपने दिलों को जगाते हैं। वे इन निशानियों को देखकर समझ जाते हैं कि सृष्टि का रचयिता, पालनहार और प्रभु केवल अल्लाह ही है, और उसी की इबादत करना ही सच्चा मार्ग है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- इस्लाम का मार्ग ही सच्चा और सीधा मार्ग है—यह वह रास्ता है जिसे अल्लाह ने स्वयं अपने बंदों के लिए चुना है। इस पर चलने वाला कभी भटकता नहीं और न ही उसे कोई नुक़सान उठाना पड़ता है।
- अल्लाह ने अपनी रहमत से कुरआन में हर युग और हर परिस्थिति के लिए मार्गदर्शन रख दिया है। जो कोई भी सच्चे दिल से इसे पढ़े और समझे, उसे हर समस्या का समाधान मिल जाता है।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की आयतें और निशानियाँ हर जगह बिखरी हुई हैं—कुरआन में, किताबों में, प्रकृति में और हमारे अपने अंदर। जो लोग इन पर ग़ौर करते हैं, वे सच्चाई तक पहुँच जाते हैं।
- सीधे मार्ग पर चलने का अर्थ है अल्लाह की रज़ा और उसकी जन्नत की ओर बढ़ना। यह मार्ग ही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया में सुकून और आख़िरत में कामयाबी देता है।
- अल्लाह ने अपनी आयतें विस्तार से बयान कर दी हैं, इसलिए किसी के पास कोई बहाना नहीं बचता। जो चाहे, इनसे सीख ले और अपनी ज़िंदगी को सीधे मार्ग पर ले आए।
📜 आयत 124-128 — सूरा अल-अनआम
124وَإِذَا جَاءَتْهُمْ آيَةٌ قَالُوا لَن نُّؤْمِنَ حَتَّىٰ نُؤْتَىٰ مِثْلَ مَا أُوتِيَ رُسُلُ اللَّهِ ۘ اللَّهُ أَعْلَمُ حَيْثُ يَجْعَلُ رِسَالَتَهُ ۗ سَيُصِيبُ الَّذِينَ أَجْرَمُوا صَغَارٌ عِندَ اللَّهِ وَعَذَابٌ شَدِيدٌ بِمَا كَانُوا يَمْكُرُونَ
और जब उनके पास कोई निशानी (नबी की तसदीक़ के लिए) आई है तो कहते हैं जब तक हमको ख़ुद वैसी चीज़ (वही वग़ैरह) न दी जाएगी जो पैग़म्बराने ख़ुदा को दी गई है उस वक्त तक तो हम ईमान न लाएँगे और ख़ुदा जहाँ (जिस दिल में) अपनी पैग़म्बरी क़रार देता है उसकी (काबलियत व सलाहियत) को ख़ूब जानता है जो लोग (उस जुर्म के) मुजरिम हैं उनको अनक़रीब उनकी मक्कारी की सज़ा में ख़ुदा के यहाँ बड़ी ज़िल्लत और सख्त अज़ाब होगा
125فَمَن يُرِدِ اللَّهُ أَن يَهْدِيَهُ يَشْرَحْ صَدْرَهُ لِلْإِسْلَامِ ۖ وَمَن يُرِدْ أَن يُضِلَّهُ يَجْعَلْ صَدْرَهُ ضَيِّقًا حَرَجًا كَأَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِي السَّمَاءِ ۚ كَذَٰلِكَ يَجْعَلُ اللَّهُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ
तो ख़ुदा जिस शख़्श को राह रास्त दिखाना चाहता है उसके सीने को इस्लाम (की दौलियत) के वास्ते (साफ़ और) कुशादा (चौड़ा) कर देता है और जिसको गुमराही की हालत में छोड़ना चाहता है उनके सीने को तंग दुश्वार ग़ुबार कर देता है गोया (कुबूल ईमान) उसके लिए आसमान पर चढ़ना है जो लोग ईमान नहीं लाते ख़ुदा उन पर बुराई को उसी तरह मुसल्लत कर देता है
126وَهَٰذَا صِرَاطُ رَبِّكَ مُسْتَقِيمًا ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ
और (ऐ रसूल) ये (इस्लाम) तुम्हारे परवरदिगार का (बनाया हुआ) सीधा रास्ता है इबरत हासिल करने वालों के वास्ते हमने अपने आयात तफसीलन बयान कर दिए हैं
127۞ لَهُمْ دَارُ السَّلَامِ عِندَ رَبِّهِمْ ۖ وَهُوَ وَلِيُّهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
उनके वास्ते उनके परवरदिगार के यहाँ अमन व चैन का घर (बेहश्त) है और दुनिया में जो कारगुज़ारियाँ उन्होने की थीं उसके ऐवज़ ख़ुदा उन का सरपरस्त होगा
128وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ قَدِ اسْتَكْثَرْتُم مِّنَ الْإِنسِ ۖ وَقَالَ أَوْلِيَاؤُهُم مِّنَ الْإِنسِ رَبَّنَا اسْتَمْتَعَ بَعْضُنَا بِبَعْضٍ وَبَلَغْنَا أَجَلَنَا الَّذِي أَجَّلْتَ لَنَا ۚ قَالَ النَّارُ مَثْوَاكُمْ خَالِدِينَ فِيهَا إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और (ऐ रसूल वह दिन याद दिलाओ) जिस दिन ख़ुदा सब लोगों को जमा करेगा और शयातीन से फरमाएगा, ऐ गिरोह जिन्नात तुमने तो बहुतेरे आदमियों को (बहका बहका कर) अपनी जमाअत बड़ी कर ली (और) आदमियों से जो लोग (उन शयातीन के दुनिया में) दोस्त थे कहेंगे ऐ हमारे पालने वाले (दुनिया में) हमने एक दूसरे से फायदा हासिल किया और अपने किए की सज़ा पाने को, जो वक्त तू ने हमारे लिए मुअय्युन किया था अब हम अपने उस वक्त (क़यामत) में पहुँच गए ख़ुदा उसके जवाब में, फरमाएगा तुम सब का ठिकाना जहन्नुम है और उसमें हमेशा रहोगे मगर जिसे ख़ुदा चाहे (नजात दे) बेशक तेरा परवरदिगार हिकमत वाला वाक़िफकार है
अनुवाद — अल-अनआम 126
सूरा अल-अनआम आयत 126 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) ये (इस्लाम) तुम्हारे परवरदिगार का (बनाया हुआ)…
सूरा आयत 126/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 124–128. हिंदी अर्थ: اردو.