अल-अनआम · 125/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
فَمَن يُرِدِ اللَّهُ أَن يَهْدِيَهُ يَشْرَحْ صَدْرَهُ لِلْإِسْلَامِ ۖ وَمَن يُرِدْ أَن يُضِلَّهُ يَجْعَلْ صَدْرَهُ ضَيِّقًا حَرَجًا كَأَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِي السَّمَاءِ ۚ كَذَٰلِكَ يَجْعَلُ اللَّهُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ ۝١٢٥
Famai yuridil laahu ai yahdiyahoo yashrah sadrahoo lil islaami wa mai yurid ai yudillaho yaj`al sadrahoo daiyiqan harajan ka annamaa yassa` `adu fis samaaa`; kazaalika yaj`alul laahur rijsa `alal lazeena la yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
तो ख़ुदा जिस शख़्श को राह रास्त दिखाना चाहता है उसके सीने को इस्लाम (की दौलियत) के वास्ते (साफ़ और) कुशादा (चौड़ा) कर देता है और जिसको गुमराही की हालत में छोड़ना चाहता है उनके सीने को तंग दुश्वार ग़ुबार कर देता है गोया (कुबूल ईमान) उसके लिए आसमान पर चढ़ना है जो लोग ईमान नहीं लाते ख़ुदा उन पर बुराई को उसी तरह मुसल्लत कर देता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَشْرَحْ صَدْرَهُ: उसका सीना खोल दे, उसके हृदय को विस्तृत कर दे।
  • حَرَجًا: अत्यधिक संकीर्ण, जिसमें कोई जगह ही न हो।
  • يَصَّعَّدُ: ऊपर चढ़ने की कोशिश करना।
  • الرِّجْسَ: गंदगी, अपवित्रता, यहाँ अर्थ है यातना और अपमान।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में ईमान और कुफ्र की हकीकत को बयान करते हुए फरमाता है कि जिस व्यक्ति के लिए अल्लाह ने हिदायत (मार्गदर्शन) का इरादा किया, उसका सीना इस्लाम के लिए खोल देता है। यानी उसके दिल को रोशन कर देता है और उसमें ईमान की गुंजाइश पैदा कर देता है, जिससे वह तौहीद और ईमान को आसानी से कबूल कर लेता है। उसका दिल सच्चाई के लिए खुल जाता है और वह अल्लाह की इबादत में मीठास महसूस करता है।

इसके विपरीत, जिसे अल्लाह गुमराही में छोड़ना चाहता है, उसका सीना इतना संकीर्ण और तंग कर देता है कि हक़ की कोई बात उसके दिल में दाखिल नहीं हो पाती। उसकी यह हालत ऐसे व्यक्ति जैसी होती है जो आसमान की ऊंचाइयों पर चढ़ने की कोशिश कर रहा हो — जैसे-जैसे वह ऊपर जाता है, सांस लेना मुश्किल होता जाता है और उसका सीना दबने लगता है। ठीक उसी तरह काफिर का दिल हक़ को कबूल करने से इतना तंग हो जाता है कि ईमान उसमें दाखिल ही नहीं हो पाता।

फिर अल्लाह फरमाता है कि जिस तरह वह काफिरों के दिलों को तंग करता है, उसी तरह वह उन लोगों पर यातना और अपमान नाज़िल करता है जो ईमान नहीं लाते। यह अल्लाह की सुन्नत (कानून) है कि जो हक़ से मुंह मोड़ता है, उसे वह उसी की हालत पर छोड़ देता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि ईमान अल्लाह की देन है और हिदायत उसी के हाथ में है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह से दुआ करें कि वह हमारे सीने को इस्लाम के लिए खोल दे और हमें सच्चे दिल से ईमान की नेमत अता फरमाए। जो व्यक्ति अल्लाह की तरफ आता है, अल्लाह उसके दिल में रौशनी डालता है और उसे सुकून व इत्मिनान अता करता है। यही सबसे बड़ी कामयाबी है। आइए हम अपने दिलों को अल्लाह की याद और उसकी इबादत के लिए खोलें, क्योंकि जिस दिल में ईमान की रौशनी होती है, वह दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाब होता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 123-127 — अल-अनआम

123وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا فِي كُلِّ قَرْيَةٍ أَكَابِرَ مُجْرِمِيهَا لِيَمْكُرُوا فِيهَا ۖ وَمَا يَمْكُرُونَ إِلَّا بِأَنفُسِهِمْ وَمَا يَشْعُرُونَ
(कि भला ही भला नज़र आता है) और जिस तरह मक्के में है उसी तरह हमने हर बस्ती में उनके कुसूरवारों को सरदार बनाया ताकि उनमें मक्कारी किया करें और वह लोग जो कुछ करते हैं अपने ही हक़ में (बुरा) करते हैं और समझते (तक) नहीं
124وَإِذَا جَاءَتْهُمْ آيَةٌ قَالُوا لَن نُّؤْمِنَ حَتَّىٰ نُؤْتَىٰ مِثْلَ مَا أُوتِيَ رُسُلُ اللَّهِ ۘ اللَّهُ أَعْلَمُ حَيْثُ يَجْعَلُ رِسَالَتَهُ ۗ سَيُصِيبُ الَّذِينَ أَجْرَمُوا صَغَارٌ عِندَ اللَّهِ وَعَذَابٌ شَدِيدٌ بِمَا كَانُوا يَمْكُرُونَ
और जब उनके पास कोई निशानी (नबी की तसदीक़ के लिए) आई है तो कहते हैं जब तक हमको ख़ुद वैसी चीज़ (वही वग़ैरह) न दी जाएगी जो पैग़म्बराने ख़ुदा को दी गई है उस वक्त तक तो हम ईमान न लाएँगे और ख़ुदा जहाँ (जिस दिल में) अपनी पैग़म्बरी क़रार देता है उसकी (काबलियत व सलाहियत) को ख़ूब जानता है जो लोग (उस जुर्म के) मुजरिम हैं उनको अनक़रीब उनकी मक्कारी की सज़ा में ख़ुदा के यहाँ बड़ी ज़िल्लत और सख्त अज़ाब होगा
125فَمَن يُرِدِ اللَّهُ أَن يَهْدِيَهُ يَشْرَحْ صَدْرَهُ لِلْإِسْلَامِ ۖ وَمَن يُرِدْ أَن يُضِلَّهُ يَجْعَلْ صَدْرَهُ ضَيِّقًا حَرَجًا كَأَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِي السَّمَاءِ ۚ كَذَٰلِكَ يَجْعَلُ اللَّهُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ
तो ख़ुदा जिस शख़्श को राह रास्त दिखाना चाहता है उसके सीने को इस्लाम (की दौलियत) के वास्ते (साफ़ और) कुशादा (चौड़ा) कर देता है और जिसको गुमराही की हालत में छोड़ना चाहता है उनके सीने को तंग दुश्वार ग़ुबार कर देता है गोया (कुबूल ईमान) उसके लिए आसमान पर चढ़ना है जो लोग ईमान नहीं लाते ख़ुदा उन पर बुराई को उसी तरह मुसल्लत कर देता है
126وَهَٰذَا صِرَاطُ رَبِّكَ مُسْتَقِيمًا ۗ قَدْ فَصَّلْنَا الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَذَّكَّرُونَ
और (ऐ रसूल) ये (इस्लाम) तुम्हारे परवरदिगार का (बनाया हुआ) सीधा रास्ता है इबरत हासिल करने वालों के वास्ते हमने अपने आयात तफसीलन बयान कर दिए हैं
127۞ لَهُمْ دَارُ السَّلَامِ عِندَ رَبِّهِمْ ۖ وَهُوَ وَلِيُّهُم بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
उनके वास्ते उनके परवरदिगार के यहाँ अमन व चैन का घर (बेहश्त) है और दुनिया में जो कारगुज़ारियाँ उन्होने की थीं उसके ऐवज़ ख़ुदा उन का सरपरस्त होगा
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अनुवाद — अल-अनआम 125

सूरा अल-अनआम आयत 125 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो ख़ुदा जिस शख़्श को राह रास्त दिखाना चाहता है…

सूरा आयत 125/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 123–127. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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