उनके वास्ते उनके परवरदिगार के यहाँ अमन व चैन का घर (बेहश्त) है और दुनिया में जो कारगुज़ारियाँ उन्होने की थीं उसके ऐवज़ ख़ुदा उन का सरपरस्त होगा
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
دَارُ السَّلَامِ: वह घर जो हर आफत और बला से सुरक्षित हो, यानी जन्नत।
وَلِیُّهُمْ: उनका मददगार, संरक्षक और सहायक।
بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ: उनके उन अच्छे कर्मों के बदले जो वे दुनिया में करते थे।
तफसीर:
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का ज़िक्र कर रहा है जो उसकी निशानियों पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं और उसकी याद को अपने दिलों में जगह देते हैं। ऐसे लोगों के लिए उनके रब के पास "दारुस्सलाम" यानी जन्नत है, जो हर किसी तकलीफ, डर, ग़म और अज़ाब से पाक और महफूज़ है। यह वह जगह है जहाँ हर तरह की सलामती और इत्मिनान हासिल होगा।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह जन्नत उनके रब के पास उनके लिए मुक़र्रर है, यानी यह उनका हक़ बन चुकी है और अल्लाह ने अपने फ़ज़ल से उन्हें यह इनाम देने का वादा किया है। साथ ही अल्लाह तआला उनका वली और मददगार है — दुनिया में वह उन्हें नेकी की तौफ़ीक़ देता है, गुनाहों से बचाता है, और आख़िरत में उन्हें जन्नत अता करके उनके अच्छे कर्मों का बदला देता है। यह सब उनके उन अमलों की बदौलत है जो उन्होंने अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की रज़ा के लिए किए।
फ़ायदे:
अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को जन्नत की ख़ुशख़बरी देता है, जो हर बुराई और तकलीफ से सलामत है — यह मोमिन के लिए सबसे बड़ी उम्मीद और सहारा है।
अल्लाह का वली होना सबसे बड़ी नेमत है; जब अल्लाह किसी का मददगार बन जाए तो दुनिया और आख़िरत दोनों में उसकी हिफ़ाज़त होती है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे कर्मों का अंजाम अच्छा होता है — हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए और अल्लाह की राह में नेकियाँ करनी चाहिए।
जन्नत सिर्फ़ ईमान का नतीजा नहीं, बल्कि अमल का भी इनाम है — इसलिए हमें अपने ईमान के साथ-साथ अपने कर्मों को भी सुधारना चाहिए।
तो ख़ुदा जिस शख़्श को राह रास्त दिखाना चाहता है उसके सीने को इस्लाम (की दौलियत) के वास्ते (साफ़ और) कुशादा (चौड़ा) कर देता है और जिसको गुमराही की हालत में छोड़ना चाहता है उनके सीने को तंग दुश्वार ग़ुबार कर देता है गोया (कुबूल ईमान) उसके लिए आसमान पर चढ़ना है जो लोग ईमान नहीं लाते ख़ुदा उन पर बुराई को उसी तरह मुसल्लत कर देता है
और (ऐ रसूल वह दिन याद दिलाओ) जिस दिन ख़ुदा सब लोगों को जमा करेगा और शयातीन से फरमाएगा, ऐ गिरोह जिन्नात तुमने तो बहुतेरे आदमियों को (बहका बहका कर) अपनी जमाअत बड़ी कर ली (और) आदमियों से जो लोग (उन शयातीन के दुनिया में) दोस्त थे कहेंगे ऐ हमारे पालने वाले (दुनिया में) हमने एक दूसरे से फायदा हासिल किया और अपने किए की सज़ा पाने को, जो वक्त तू ने हमारे लिए मुअय्युन किया था अब हम अपने उस वक्त (क़यामत) में पहुँच गए ख़ुदा उसके जवाब में, फरमाएगा तुम सब का ठिकाना जहन्नुम है और उसमें हमेशा रहोगे मगर जिसे ख़ुदा चाहे (नजात दे) बेशक तेरा परवरदिगार हिकमत वाला वाक़िफकार है
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