अल-मुमतहिना · 2/13
अनुवाद उच्चारण — अल-मुमतहिना
إِن يَثْقَفُوكُمْ يَكُونُوا لَكُمْ أَعْدَاءً وَيَبْسُطُوا إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ وَأَلْسِنَتَهُم بِالسُّوءِ وَوَدُّوا لَوْ تَكْفُرُونَ ۝٢
Iny yasqafookum yakoonoo lakum a`daaa`anw wa yabsutooo ilaikum aydiyahum wa alsinatahum bissooo`i wa waddoo law takfuroon
📖 हिंदी अर्थ
अगर ये लोग तुम पर क़ाबू पा जाएँ तो तुम्हारे दुश्मन हो जाएँ और ईज़ा के लिए तुम्हारी तरफ अपने हाथ भी बढ़ाएँगे और अपनी ज़बाने भी और चाहते हैं कि काश तुम भी काफिर हो जाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَثْقَفُوكُمْ (यस्क़फूकुम): अर्थात वे तुम्हें पा लें, तुम पर क़ाबू पा लें, तुम्हें अपने हाथ में कर लें।
  • يَبْسُطُوا (यब्सुतू): फैलाएँ, बढ़ाएँ।
  • بِالسُّوءِ (बिस्सू): बुराई के साथ, अत्याचार और नुक़्सान पहुँचाने के इरादे से।
  • وَدُّوا (वद्दू): उन्होंने चाहा, कामना की।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को उन लोगों से सावधान कर रहे हैं जिनसे वे दिल लगा बैठे थे या जिनसे मोहब्बत का इज़हार कर रहे थे। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर ये काफ़िर तुम पर क़ाबू पा लें, तुम्हें अपने हत्थे चढ़ा लें, तो वे तुम्हारे सबसे बड़े दुश्मन बन जाएँगे। उनकी दोस्ती और मुहब्बत का कोई फ़ायदा नहीं होगा। वे तुम्हारे साथ जो सुलूक करेंगे, वह सिर्फ़ दुश्मनी का सुलूक होगा।

वे अपने हाथ तुम्हारी तरफ़ बढ़ाएँगे — यानी तुम्हें मारेंगे, पीटेंगे, क़ैद करेंगे, और यहाँ तक कि तुम्हें ग़ुलाम बना लेंगे। और अपनी ज़ुबानों से भी तुम्हें बुरा भला कहेंगे, गालियाँ देंगे, तुम्हारी बेइज़्ज़ती करेंगे और तुम्हें नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे। उनके दिलों में तुम्हारे लिए सिर्फ़ नफ़रत और कड़वाहट है, और वे चाहते हैं कि तुम भी उनकी तरह काफ़िर हो जाओ, ताकि तुम भी उन्हीं के रास्ते पर चलो और उनके साथ मिलकर अल्लाह की नाफ़रमानी करो।

यह आयत मुसलमानों को एक बहुत बड़ा सबक़ देती है कि काफ़िरों से मुहब्बत और उनसे दिल लगाव रखना कितना ख़तरनाक है। उनकी दोस्ती का नतीजा हमेशा नुक़्सान ही होता है। वे चाहे मुस्कुराते हुए मिलें, लेकिन जब मौक़ा मिलेगा, तो वे अपनी असली हक़ीक़त ज़ाहिर कर देंगे। इसलिए अल्लाह अपने बंदों को नसीहत करता है कि अपनी मुहब्बत और वफ़ादारी सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ और मुसलमानों के लिए रखो। काफ़िरों से दोस्ती रखने वाला अल्लाह के दीन से दूर हो जाता है और उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़्सान उठाना पड़ता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस्लाम हमें हक़ीक़त पर निगाह रखने की तालीम देता है। हमें दुश्मन की चिकनी चुपड़ी बातों में नहीं आना चाहिए, बल्कि उसकी असली नीयत को समझना चाहिए। अल्लाह तआला हमें साफ़-साफ़ बता रहा है कि ये लोग तुम्हारे दुश्मन हैं, चाहे वे कितनी भी मुहब्बत का इज़हार करें। इसलिए हमेशा चौकन्ने रहो और अपने दीन की हिफ़ाज़त करो। अल्लाह ही सबसे बड़ा हिमायती है, और उसी पर भरोसा रखना चाहिए।



📜 आयत 1-4 — अल-मुमतहिना

1يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا عَدُوِّي وَعَدُوَّكُمْ أَوْلِيَاءَ تُلْقُونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ وَقَدْ كَفَرُوا بِمَا جَاءَكُم مِّنَ الْحَقِّ يُخْرِجُونَ الرَّسُولَ وَإِيَّاكُمْ ۙ أَن تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ رَبِّكُمْ إِن كُنتُمْ خَرَجْتُمْ جِهَادًا فِي سَبِيلِي وَابْتِغَاءَ مَرْضَاتِي ۚ تُسِرُّونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ وَأَنَا أَعْلَمُ بِمَا أَخْفَيْتُمْ وَمَا أَعْلَنتُمْ ۚ وَمَن يَفْعَلْهُ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَاءَ السَّبِيلِ
ऐ ईमानदारों अगर तुम मेरी राह में जेहाद करने और मेरी ख़ुशनूदी की तमन्ना में (घर से) निकलते हो तो मेरे और अपने दुशमनों को दोस्त न बनाओ तुम उनके पास दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो और जो दीन हक़ तुम्हारे पास आया है उससे वह लोग इनकार करते हैं वह लोग रसूल को और तुमको इस बात पर (घर से) निकालते हैं कि तुम अपने परवरदिगार ख़ुदा पर ईमान ले आए हो (और) तुम हो कि उनके पास छुप छुप के दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो हालॉकि तुम कुछ भी छुपा कर या बिल एलान करते हो मैं उससे ख़ूब वाक़िफ़ हूँ और तुममें से जो शख़्श ऐसा करे तो वह सीधी राह से यक़ीनन भटक गया
2إِن يَثْقَفُوكُمْ يَكُونُوا لَكُمْ أَعْدَاءً وَيَبْسُطُوا إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ وَأَلْسِنَتَهُم بِالسُّوءِ وَوَدُّوا لَوْ تَكْفُرُونَ
अगर ये लोग तुम पर क़ाबू पा जाएँ तो तुम्हारे दुश्मन हो जाएँ और ईज़ा के लिए तुम्हारी तरफ अपने हाथ भी बढ़ाएँगे और अपनी ज़बाने भी और चाहते हैं कि काश तुम भी काफिर हो जाओ
3لَن تَنفَعَكُمْ أَرْحَامُكُمْ وَلَا أَوْلَادُكُمْ ۚ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَفْصِلُ بَيْنَكُمْ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
क़यामत के दिन न तुम्हारे रिश्ते नाते ही कुछ काम आएँगे न तुम्हारी औलाद (उस दिन) तो वही फ़ैसला कर देगा और जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है
4قَدْ كَانَتْ لَكُمْ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ فِي إِبْرَاهِيمَ وَالَّذِينَ مَعَهُ إِذْ قَالُوا لِقَوْمِهِمْ إِنَّا بُرَآءُ مِنكُمْ وَمِمَّا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ كَفَرْنَا بِكُمْ وَبَدَا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمُ الْعَدَاوَةُ وَالْبَغْضَاءُ أَبَدًا حَتَّىٰ تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَحْدَهُ إِلَّا قَوْلَ إِبْرَاهِيمَ لِأَبِيهِ لَأَسْتَغْفِرَنَّ لَكَ وَمَا أَمْلِكُ لَكَ مِنَ اللَّهِ مِن شَيْءٍ ۖ رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ
(मुसलमानों) तुम्हारे वास्ते तो इबराहीम और उनके साथियों (के क़ौल व फेल का अच्छा नमूना मौजूद है) कि जब उन्होने अपनी क़ौम से कहा कि हम तुमसे और उन (बुतों) से जिन्हें तुम ख़ुदा के सिवा पूजते हो बेज़ार हैं हम तो तुम्हारे (दीन के) मुनकिर हैं और जब तक तुम यकता ख़ुदा पर ईमान न लाओ हमारे तुम्हारे दरमियान खुल्लम खुल्ला अदावत व दुशमनी क़ायम हो गयी मगर (हाँ) इबराहीम ने अपने (मुँह बोले) बाप से ये (अलबत्ता) कहा कि मैं आपके लिए मग़फ़िरत की दुआ ज़रूर करूँगा और ख़ुदा के सामने तो मैं आपके वास्ते कुछ एख्तेयार नहीं रखता ऐ हमारे पालने वाले (ख़ुदा) हमने तुझी पर भरोसा कर लिया है और तेरी ही तरफ हम रूजू करते हैं
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अनुवाद — अल-मुमतहिना 2

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Tuesday, August 18, 2026

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