Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَثْقَفُوكُمْ (यस्क़फूकुम): अर्थात वे तुम्हें पा लें, तुम पर क़ाबू पा लें, तुम्हें अपने हाथ में कर लें।
- يَبْسُطُوا (यब्सुतू): फैलाएँ, बढ़ाएँ।
- بِالسُّوءِ (बिस्सू): बुराई के साथ, अत्याचार और नुक़्सान पहुँचाने के इरादे से।
- وَدُّوا (वद्दू): उन्होंने चाहा, कामना की।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को उन लोगों से सावधान कर रहे हैं जिनसे वे दिल लगा बैठे थे या जिनसे मोहब्बत का इज़हार कर रहे थे। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर ये काफ़िर तुम पर क़ाबू पा लें, तुम्हें अपने हत्थे चढ़ा लें, तो वे तुम्हारे सबसे बड़े दुश्मन बन जाएँगे। उनकी दोस्ती और मुहब्बत का कोई फ़ायदा नहीं होगा। वे तुम्हारे साथ जो सुलूक करेंगे, वह सिर्फ़ दुश्मनी का सुलूक होगा।
वे अपने हाथ तुम्हारी तरफ़ बढ़ाएँगे — यानी तुम्हें मारेंगे, पीटेंगे, क़ैद करेंगे, और यहाँ तक कि तुम्हें ग़ुलाम बना लेंगे। और अपनी ज़ुबानों से भी तुम्हें बुरा भला कहेंगे, गालियाँ देंगे, तुम्हारी बेइज़्ज़ती करेंगे और तुम्हें नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे। उनके दिलों में तुम्हारे लिए सिर्फ़ नफ़रत और कड़वाहट है, और वे चाहते हैं कि तुम भी उनकी तरह काफ़िर हो जाओ, ताकि तुम भी उन्हीं के रास्ते पर चलो और उनके साथ मिलकर अल्लाह की नाफ़रमानी करो।
यह आयत मुसलमानों को एक बहुत बड़ा सबक़ देती है कि काफ़िरों से मुहब्बत और उनसे दिल लगाव रखना कितना ख़तरनाक है। उनकी दोस्ती का नतीजा हमेशा नुक़्सान ही होता है। वे चाहे मुस्कुराते हुए मिलें, लेकिन जब मौक़ा मिलेगा, तो वे अपनी असली हक़ीक़त ज़ाहिर कर देंगे। इसलिए अल्लाह अपने बंदों को नसीहत करता है कि अपनी मुहब्बत और वफ़ादारी सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ और मुसलमानों के लिए रखो। काफ़िरों से दोस्ती रखने वाला अल्लाह के दीन से दूर हो जाता है और उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़्सान उठाना पड़ता है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस्लाम हमें हक़ीक़त पर निगाह रखने की तालीम देता है। हमें दुश्मन की चिकनी चुपड़ी बातों में नहीं आना चाहिए, बल्कि उसकी असली नीयत को समझना चाहिए। अल्लाह तआला हमें साफ़-साफ़ बता रहा है कि ये लोग तुम्हारे दुश्मन हैं, चाहे वे कितनी भी मुहब्बत का इज़हार करें। इसलिए हमेशा चौकन्ने रहो और अपने दीन की हिफ़ाज़त करो। अल्लाह ही सबसे बड़ा हिमायती है, और उसी पर भरोसा रखना चाहिए।
📜 आयत 1-4 — सूरा अल-मुमतहिना
अनुवाद — अल-मुमतहिना 2
सूरा अल-मुमतहिना आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर ये लोग तुम पर क़ाबू पा जाएँ तो तुम्हारे…सूरा आयत 2/13 — सूरा अल-मुमतहिना الممتحنة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुमतहिना सुनें, सूरा अल-मुमतहिना अनुवाद, सूरा अल-मुमतहिना mp3, सूरा अल-मुमतहिना pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुमतहिना
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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