Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَوْلِيَاءَ: मित्र, सहायक, संरक्षक
- تُلْقُونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ: उनसे प्रेम और स्नेह की बातें कहना, उन्हें अपनी भीतरी बातें बताना
- سَوَاءَ السَّبِيلِ: सीधा मार्ग, सत्य का रास्ता
तफ़सीर:
ऐ ईमान लाने वालों! अल्लाह तआला तुम्हें सख्त तनबीह करता है कि मेरे दुश्मनों और तुम्हारे दुश्मनों को अपना दोस्त और हमदर्द न बनाओ। यानी काफ़िरों से मुहब्बत और रफ़ाक़त का रिश्ता न जोड़ो, और न ही उन्हें अपने भीतरी राज़ और मुसलमानों की ख़बरें पहुँचाओ। यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब हज़रत ख़ातिर बिन अबी बल्तआ रज़ियल्लाहु अन्हु ने मक्का के काफ़िरों को रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आमद की ख़बर लिख भेजी थी, ताकि अपने रिश्तेदारों की मदद हासिल कर सकें, लेकिन अल्लाह ने यह बात पसंद नहीं फ़रमाई।
अल्लाह फ़रमाता है: तुम उनसे मुहब्बत का इज़हार करते हो, हालाँकि उन्होंने उस हक़ (सच्चाई) का इन्कार किया जो तुम्हारे पास आई है—यानी क़ुरआन और ईमान का। उनका हाल यह है कि उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को और तुम्हें मक्का से निकाल दिया, सिर्फ इस जुर्म में कि तुम अल्लाह अपने रब पर ईमान लाए। उन्होंने न तो किसी रिश्ते की परवाह की और न ही किसी हक़ की।
अल्लाह फ़रमाता है: अगर तुम सच में मेरे रास्ते में जिहाद करने और मेरी ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए निकले हो, तो फिर मेरे दुश्मनों से दोस्ती कैसे कर सकते हो? तुम चुपके से उन्हें मुहब्बत की ख़बरें भेजते हो, लेकिन मैं वह सब जानता हूँ जो तुम छिपाते हो और जो ज़ाहिर करते हो। मेरे इल्म से कोई चीज़ पोशीदा नहीं है।
फिर अल्लाह तआला सख्त तनबीह करता है: जो शख्स तुममें से ऐसा करेगा—यानी काफ़िरों से दोस्ती और मुहब्बत रखेगा—तो वह यक़ीनन सीधे रास्ते से भटक गया, हक़ से दूर हो गया और गुमराही में जा पड़ा।
दावती पहलू:
यह आयत हम मुसलमानों के लिए एक अज़ीम सबक़ है कि हमारी वफ़ादारी और मुहब्बत सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनीन के साथ होनी चाहिए। दुनिया में रिश्तेदारी, दोस्ती और मामलात के रिश्ते हों सकते हैं, लेकिन अगर किसी की दुश्मनी अल्लाह और उसके दीन से है, तो हमारा दिल उसके साथ नहीं हो सकता। यही वह पाक रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें अपने दीन पर साबित-क़दम रखे और हमारे दिलों को ईमान की मुहब्बत और कुफ़्र से नफ़रत से भर दे। आमीन।
📜 आयत 1-3 — सूरा अल-मुमतहिना
अनुवाद — अल-मुमतहिना 1
सूरा अल-मुमतहिना आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों अगर तुम मेरी राह में जेहाद करने और…सूरा आयत 1/13 — सूरा अल-मुमतहिना الممتحنة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुमतहिना सुनें, सूरा अल-मुमतहिना अनुवाद, सूरा अल-मुमतहिना mp3, सूरा अल-मुमतहिना pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुमतहिना
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


