अल-मुमतहिना · 1/13
अनुवाद उच्चारण — अल-मुमतहिना
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا عَدُوِّي وَعَدُوَّكُمْ أَوْلِيَاءَ تُلْقُونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ وَقَدْ كَفَرُوا بِمَا جَاءَكُم مِّنَ الْحَقِّ يُخْرِجُونَ الرَّسُولَ وَإِيَّاكُمْ ۙ أَن تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ رَبِّكُمْ إِن كُنتُمْ خَرَجْتُمْ جِهَادًا فِي سَبِيلِي وَابْتِغَاءَ مَرْضَاتِي ۚ تُسِرُّونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ وَأَنَا أَعْلَمُ بِمَا أَخْفَيْتُمْ وَمَا أَعْلَنتُمْ ۚ وَمَن يَفْعَلْهُ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَاءَ السَّبِيلِ ۝١
Yaa ayyuhal lazeena aamanoo laa tattakhizoo `aduwwee wa `aduwaakum awliyaaa`a tulqoona ilaihim bilmawaddati wa qad kafaroo bima jaaa`akum minal haqq, yukhrijoonar Rasoola wa iyyaakum an tu`minoo billaahi rabbikum in kuntum kharajtum jihaadan fee sabeelee wabtighaaa`a mardaatee; tusirroona ilaihim bilma waddati wa ana a`alamu bimaaa akhfaitum wa maaa a`lantum; wa many yaf`alhu minkum faqad dalla sawaaa`as sabeel
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों अगर तुम मेरी राह में जेहाद करने और मेरी ख़ुशनूदी की तमन्ना में (घर से) निकलते हो तो मेरे और अपने दुशमनों को दोस्त न बनाओ तुम उनके पास दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो और जो दीन हक़ तुम्हारे पास आया है उससे वह लोग इनकार करते हैं वह लोग रसूल को और तुमको इस बात पर (घर से) निकालते हैं कि तुम अपने परवरदिगार ख़ुदा पर ईमान ले आए हो (और) तुम हो कि उनके पास छुप छुप के दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो हालॉकि तुम कुछ भी छुपा कर या बिल एलान करते हो मैं उससे ख़ूब वाक़िफ़ हूँ और तुममें से जो शख़्श ऐसा करे तो वह सीधी राह से यक़ीनन भटक गया

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَوْلِيَاءَ: मित्र, सहायक, संरक्षक
  • تُلْقُونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ: उनसे प्रेम और स्नेह की बातें कहना, उन्हें अपनी भीतरी बातें बताना
  • سَوَاءَ السَّبِيلِ: सीधा मार्ग, सत्य का रास्ता

तफ़सीर:

ऐ ईमान लाने वालों! अल्लाह तआला तुम्हें सख्त तनबीह करता है कि मेरे दुश्मनों और तुम्हारे दुश्मनों को अपना दोस्त और हमदर्द न बनाओ। यानी काफ़िरों से मुहब्बत और रफ़ाक़त का रिश्ता न जोड़ो, और न ही उन्हें अपने भीतरी राज़ और मुसलमानों की ख़बरें पहुँचाओ। यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब हज़रत ख़ातिर बिन अबी बल्तआ रज़ियल्लाहु अन्हु ने मक्का के काफ़िरों को रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आमद की ख़बर लिख भेजी थी, ताकि अपने रिश्तेदारों की मदद हासिल कर सकें, लेकिन अल्लाह ने यह बात पसंद नहीं फ़रमाई।

अल्लाह फ़रमाता है: तुम उनसे मुहब्बत का इज़हार करते हो, हालाँकि उन्होंने उस हक़ (सच्चाई) का इन्कार किया जो तुम्हारे पास आई है—यानी क़ुरआन और ईमान का। उनका हाल यह है कि उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को और तुम्हें मक्का से निकाल दिया, सिर्फ इस जुर्म में कि तुम अल्लाह अपने रब पर ईमान लाए। उन्होंने न तो किसी रिश्ते की परवाह की और न ही किसी हक़ की।

अल्लाह फ़रमाता है: अगर तुम सच में मेरे रास्ते में जिहाद करने और मेरी ख़ुशनूदी हासिल करने के लिए निकले हो, तो फिर मेरे दुश्मनों से दोस्ती कैसे कर सकते हो? तुम चुपके से उन्हें मुहब्बत की ख़बरें भेजते हो, लेकिन मैं वह सब जानता हूँ जो तुम छिपाते हो और जो ज़ाहिर करते हो। मेरे इल्म से कोई चीज़ पोशीदा नहीं है।

फिर अल्लाह तआला सख्त तनबीह करता है: जो शख्स तुममें से ऐसा करेगा—यानी काफ़िरों से दोस्ती और मुहब्बत रखेगा—तो वह यक़ीनन सीधे रास्ते से भटक गया, हक़ से दूर हो गया और गुमराही में जा पड़ा।

दावती पहलू:

यह आयत हम मुसलमानों के लिए एक अज़ीम सबक़ है कि हमारी वफ़ादारी और मुहब्बत सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनीन के साथ होनी चाहिए। दुनिया में रिश्तेदारी, दोस्ती और मामलात के रिश्ते हों सकते हैं, लेकिन अगर किसी की दुश्मनी अल्लाह और उसके दीन से है, तो हमारा दिल उसके साथ नहीं हो सकता। यही वह पाक रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें अपने दीन पर साबित-क़दम रखे और हमारे दिलों को ईमान की मुहब्बत और कुफ़्र से नफ़रत से भर दे। आमीन।



📜 आयत 1-3 — अल-मुमतहिना

1يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا عَدُوِّي وَعَدُوَّكُمْ أَوْلِيَاءَ تُلْقُونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ وَقَدْ كَفَرُوا بِمَا جَاءَكُم مِّنَ الْحَقِّ يُخْرِجُونَ الرَّسُولَ وَإِيَّاكُمْ ۙ أَن تُؤْمِنُوا بِاللَّهِ رَبِّكُمْ إِن كُنتُمْ خَرَجْتُمْ جِهَادًا فِي سَبِيلِي وَابْتِغَاءَ مَرْضَاتِي ۚ تُسِرُّونَ إِلَيْهِم بِالْمَوَدَّةِ وَأَنَا أَعْلَمُ بِمَا أَخْفَيْتُمْ وَمَا أَعْلَنتُمْ ۚ وَمَن يَفْعَلْهُ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَاءَ السَّبِيلِ
ऐ ईमानदारों अगर तुम मेरी राह में जेहाद करने और मेरी ख़ुशनूदी की तमन्ना में (घर से) निकलते हो तो मेरे और अपने दुशमनों को दोस्त न बनाओ तुम उनके पास दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो और जो दीन हक़ तुम्हारे पास आया है उससे वह लोग इनकार करते हैं वह लोग रसूल को और तुमको इस बात पर (घर से) निकालते हैं कि तुम अपने परवरदिगार ख़ुदा पर ईमान ले आए हो (और) तुम हो कि उनके पास छुप छुप के दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो हालॉकि तुम कुछ भी छुपा कर या बिल एलान करते हो मैं उससे ख़ूब वाक़िफ़ हूँ और तुममें से जो शख़्श ऐसा करे तो वह सीधी राह से यक़ीनन भटक गया
2إِن يَثْقَفُوكُمْ يَكُونُوا لَكُمْ أَعْدَاءً وَيَبْسُطُوا إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ وَأَلْسِنَتَهُم بِالسُّوءِ وَوَدُّوا لَوْ تَكْفُرُونَ
अगर ये लोग तुम पर क़ाबू पा जाएँ तो तुम्हारे दुश्मन हो जाएँ और ईज़ा के लिए तुम्हारी तरफ अपने हाथ भी बढ़ाएँगे और अपनी ज़बाने भी और चाहते हैं कि काश तुम भी काफिर हो जाओ
3لَن تَنفَعَكُمْ أَرْحَامُكُمْ وَلَا أَوْلَادُكُمْ ۚ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَفْصِلُ بَيْنَكُمْ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
क़यामत के दिन न तुम्हारे रिश्ते नाते ही कुछ काम आएँगे न तुम्हारी औलाद (उस दिन) तो वही फ़ैसला कर देगा और जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे देख रहा है
अल-मुमतहिनाकुरान सूची
13आयत
मदनीRevelation
1आयत

अनुवाद — अल-मुमतहिना 1

सूरा अल-मुमतहिना आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों अगर तुम मेरी राह में जेहाद करने और…

सूरा आयत 1/13 — अल-मुमतहिना الممتحنة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुमतहिना सुनें, अल-मुमतहिना अनुवाद, अल-मुमतहिना mp3, अल-मुमतहिना pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए