Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अरहामुकुम — तुम्हारे रिश्तेदारियाँ (खून के रिश्ते)
- यफ़सिलु — अलग करेगा, फ़ैसला करेगा
- बसीर — सब कुछ देखने वाला, पूर्ण ज्ञान रखने वाला
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में साफ़ फ़रमा रहे हैं कि क़यामत के दिन न तो तुम्हारे रिश्तेदारियाँ तुम्हारे काम आएँगी और न ही तुम्हारी औलाद। यानी जो लोग अपने रिश्तेदारों और बच्चों की ख़ातिर कुफ़्फ़ार से मोहब्बत और वफ़ादारी का रिश्ता रखते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि ये रिश्ते उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकते।
क़यामत का दिन वो दिन होगा जब अल्लाह तआला हर इंसान का फ़ैसला उसके ईमान और अमल के आधार पर करेगा। उस दिन अल्लाह अपने फ़रमाँबरदार बंदों को जन्नत में दाख़िल करेगा और नाफ़रमानों को जहन्नम में डाल देगा। वहाँ न कोई रिश्ता काम आएगा, न कोई सिफ़ारिश। माँ-बाप अपने बच्चों से अलग होंगे, भाई अपने भाई से जुदा होंगे — हर शख्स अपने ही अमल के सामने खड़ा होगा।
अल्लाह तआला इस आयत के आख़िर में फ़रमाते हैं कि वो हर उस अमल को देख रहा है जो तुम करते हो। कोई भी नेकी या बदी उससे छिपी नहीं है। चाहे वो ज़ुबान से कहा गया कलिमा हो, चाहे दिल में छिपा इरादा हो, चाहे हाथ-पैर से किया गया काम हो — सब कुछ अल्लाह के इल्म में है और उसका पूरा-पूरा बदला उस दिन मिलेगा।
दावती पहलू:
ये आयत हम मुसलमानों के लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। आज हम में से कई लोग अपने रिश्तेदारों या बच्चों की मोहब्बत में दीन के मामले में ढील दे देते हैं — किसी ग़ैर-मुस्लिम रिश्तेदार की ख़ातिर अपने ईमान से समझौता कर लेते हैं, या दुनियावी मोहब्बत में अल्लाह के हुक्म को भूल जाते हैं। ये आयत हमें जगाती है कि सबसे बड़ा रिश्ता अल्लाह से है। अगर हम अल्लाह के हुक्मों पर चलेंगे, तो अल्लाह हमें जन्नत में अपने करीब बुलाएगा — और वहीं असली कामयाबी है। रिश्तेदार और औलाद तो इस दुनिया की ज़ीनत हैं, लेकिन उनकी मोहब्बत हमें अल्लाह की नाफ़रमानी की तरफ़ नहीं ले जानी चाहिए। अल्लाह से डरो, उसकी राह पर चलो, और यक़ीन रखो कि जो अल्लाह के पास है वही बेहतर और बाक़ी रहने वाला है।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-मुमतहिना
अनुवाद — अल-मुमतहिना 3
सूरा अल-मुमतहिना आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क़यामत के दिन न तुम्हारे रिश्ते नाते ही कुछ काम…सूरा आयत 3/13 — सूरा अल-मुमतहिना الممتحنة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुमतहिना सुनें, सूरा अल-मुमतहिना अनुवाद, सूरा अल-मुमतहिना mp3, सूरा अल-मुमतहिना pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुमतहिना
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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