अल-अनफाल · 1/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْأَنفَالِ ۖ قُلِ الْأَنفَالُ لِلَّهِ وَالرَّسُولِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَصْلِحُوا ذَاتَ بَيْنِكُمْ ۖ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۝١
Yas`aloonaka `anil anfaali qulil anfaalu lillaahi war Rasooli fattaqul laaha wa ahlihoo zaata bainikum wa atee`ul laaha wa Rasoolahooo in kuntum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे में पूछा करते हैं तुम कह दो कि अनफाल मख़सूस ख़ुदा और रसूल के वास्ते है तो ख़ुदा से डरो (और) अपने बाहमी (आपसी) मामलात की इसलाह करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الأنفَال (अन्फ़ाल): यह 'नफ़ल' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है अतिरिक्त या बढ़ी हुई चीज़। यहाँ इसका अर्थ युद्ध में प्राप्त होने वाला धन (ग़नीमत) है, जिसे अल्लाह ने इस उम्मत के लिए एक विशेष उपहार के रूप में दिया है।
  • ذَاتَ بَيْنِكُمْ (ज़ाता बैनिकुम): इसका अर्थ है तुम्हारे बीच का संबंध, आपसी मेल-मिलाप और भाईचारे की स्थिति।
  • أَصْلِحُوا (अस्लिहू): सुधार करो, ठीक करो।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! आपके साथी आपसे उन ग़नीमतों (युद्ध में मिलने वाले धन) के बारे में पूछ रहे हैं जो बद्र के युद्ध के बाद प्राप्त हुईं, कि उन्हें कैसे बाँटा जाए और उनका फ़ैसला किसके हाथ में है? आप उन्हें उत्तर दें कि ग़नीमतों का मामला पूरी तरह अल्लाह और उसके रसूल के हाथ में है। अल्लाह ने अपने रसूल को यह अधिकार दिया है कि वे उन्हें अल्लाह के आदेश के अनुसार बाँटें। इसलिए तुम्हारा कर्तव्य केवल आज्ञा का पालन करना और उनके फ़ैसले पर संतुष्ट रहना है।

फिर अल्लाह तआला अपने बंदों को नसीहत करता है कि हे ईमानवालों! अल्लाह से डरो और उसकी अवज्ञा से बचो। इस दुनिया के मामूली धन के कारण आपस में झगड़ा और विवाद मत करो। अपने बीच की दरारों को सुधारो, आपसी नफ़रत और कटुता को दूर करो, और प्रेम, भाईचारे, क्षमा और अच्छे आचरण के साथ मिलजुल कर रहो। अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो, यदि तुम सच्चे ईमानवाले हो। क्योंकि सच्चा ईमान ही इंसान को अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा मानने और पापों से दूर रहने की प्रेरणा देता है।

यह प्रश्न बद्र के युद्ध के बाद उठा था, जब ग़नीमत के माल के वितरण को लेकर कुछ साथियों में स्वाभाविक रूप से उत्सुकता और चर्चा हुई। अल्लाह ने इस आयत के माध्यम से स्पष्ट कर दिया कि इस मामले का अधिकार केवल अल्लाह और उसके रसूल को है, और मोमिनों का काम है आज्ञा का पालन करना।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह और रसूल के फ़ैसले पर संतुष्टि: यह आयत हमें सिखाती है कि मुसलमान को अपने जीवन के हर मामले में अल्लाह और उसके रसूल के फ़ैसले को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार करना चाहिए। यही सच्चे ईमान की निशानी है।
  2. आपसी मेल-मिलाप की महत्ता: अल्लाह ने ग़नीमत के बंटवारे से पहले ही आपसी संबंधों को सुधारने का आदेश दिया। यह दर्शाता है कि इस्लाम में आपसी भाईचारा और एकता किसी भी दुनियावी माल से कहीं अधिक मूल्यवान है। एक मुसलमान को कभी भी दुनियावी चीज़ों के लिए अपने भाई से दुश्मनी नहीं करनी चाहिए।
  3. ईमान और आज्ञाकारिता का संबंध: आयत में कहा गया है कि यदि तुम मोमिन हो तो अल्लाह और रसूल की आज्ञा का पालन करो। इससे स्पष्ट होता है कि ईमान केवल ज़ुबान से कहने का नाम नहीं है, बल्कि यह दिल की वह हालत है जो इंसान को अच्छे कामों और आज्ञाकारिता की ओर ले जाती है। जिसके दिल में सच्चा ईमान होता है, वह स्वाभाविक रूप से अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करता है।
  4. दुनियावी माल से बढ़कर है अल्लाह की रज़ा: यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया का धन-दौलत बहुत छोटी चीज़ है, जिसके लिए झगड़ना और अल्लाह की नाराज़गी मोल लेना किसी बुद्धिमान का काम नहीं है। बुद्धिमान वही है जो अल्लाह की रज़ा को सबसे बड़ा लक्ष्य बनाए।


📜 आयत 1-3 — सूरा अल-अनफाल

1يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْأَنفَالِ ۖ قُلِ الْأَنفَالُ لِلَّهِ وَالرَّسُولِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَصْلِحُوا ذَاتَ بَيْنِكُمْ ۖ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे में पूछा करते हैं तुम कह दो कि अनफाल मख़सूस ख़ुदा और रसूल के वास्ते है तो ख़ुदा से डरो (और) अपने बाहमी (आपसी) मामलात की इसलाह करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो
2إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَإِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ آيَاتُهُ زَادَتْهُمْ إِيمَانًا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके सामने) ख़ुदा का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल हिल जाते हैं और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनके ईमान को और भी ज्यादा कर देती हैं और वह लोग बस अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं
3الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ
नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और जो हम ने उन्हें दिया हैं उसमें से (राहे ख़ुदा में) ख़र्च करते हैं
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 1

सूरा अल-अनफाल आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे…

सूरा आयत 1/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Wednesday, September 30, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए