Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ: उनके दिल डर जाते हैं, काँप उठते हैं (अल्लाह की अज़मत और महानता के डर से)।
- زَادَتْهُمْ إِيمَانًا: उनके ईमान में इज़ाफ़ा हो जाता है (यक़ीन और तस्दीक़ बढ़ जाती है)।
- يَتَوَكَّلُونَ: वे भरोसा करते हैं, अपने सारे मामले अल्लाह के सुपुर्द कर देते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में सच्चे और कामिल ईमान वालों की पहचान बयान कर रहा है। सच्चे मोमिन वे हैं जिनके दिलों पर जब अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल काँप उठते हैं — यह डर अल्लाह की अज़मत, उसके हुक्म की पालना और उसके अज़ाब के ख़ौफ़ से होता है। यह सिर्फ़ ज़बानी दावा नहीं, बल्कि दिल की गहराई से पैदा होने वाला एहसास है।
जब उनके सामने अल्लाह की आयतें (क़ुरआन) पढ़ी जाती हैं, तो वे उन्हें सिर्फ़ सुनते ही नहीं, बल्कि उन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं। इस तदब्बुर (चिंतन) की बरकत से उनका ईमान और मज़बूत हो जाता है, उनका यक़ीन और रूसुख़ बढ़ जाता है। हर नई आयत उनके दिल में रौशनी और हिदायत का इज़ाफ़ा करती है।
और वे अपने रब ही पर भरोसा रखते हैं। अपनी ज़रूरतों को पूरा करने, अपने मामलों को दुरुस्त करने और मुसीबतों से बचने के लिए वे किसी और की तरफ़ नहीं देखते, बल्कि अपने परवरदिगार ही पर तवक्कुल करते हैं। वे उसी से उम्मीद रखते हैं और उसी से डरते हैं, किसी और से नहीं।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़बान का दावा नहीं, बल्कि दिल का हाल है। जिसके दिल में अल्लाह की मुहब्बत और ख़ौफ़ होगा, उसका अमल भी उसी के मुताबिक़ होगा।
- क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ना या सुनना काफ़ी नहीं, बल्कि उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना ज़रूरी है। जितना हम क़ुरआन को समझेंगे, हमारा ईमान उतना ही मज़बूत होता जाएगा।
- तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) मोमिन की सबसे बड़ी ताक़त है। जो इंसान अल्लाह पर भरोसा कर लेता है, उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रहती, और अल्लाह उसके लिए हर मुश्किल से निकलने का रास्ता बना देता है।
- यह आयत हमें बताती है कि ईमान एक ज़िंदा चीज़ है जो बढ़ता और घटता है। क़ुरआन की तिलावत, ज़िक्र और नेक अमल से इसे बढ़ाया जा सकता है। इसलिए हमें हमेशा अपने ईमान को तरोताज़ा रखने की कोशिश करनी चाहिए।
📜 आयत 1-4 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 2
सूरा अल-अनफाल आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके…सूरा आयत 2/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


