अल-अनफाल · 2/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَإِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ آيَاتُهُ زَادَتْهُمْ إِيمَانًا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ ۝٢
Innamal mu`minoonal lazeena izaa zukiral laahu wajilat quloobuhum wa izaa tuliyat `alaihim Aayaatuhoo zaadat hum eemaananw wa `alaa Rabbihim yatawakkaloon
📖 हिंदी अर्थ
सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके सामने) ख़ुदा का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल हिल जाते हैं और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनके ईमान को और भी ज्यादा कर देती हैं और वह लोग बस अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ: उनके दिल डर जाते हैं, काँप उठते हैं (अल्लाह की अज़मत और महानता के डर से)।
  • زَادَتْهُمْ إِيمَانًا: उनके ईमान में इज़ाफ़ा हो जाता है (यक़ीन और तस्दीक़ बढ़ जाती है)।
  • يَتَوَكَّلُونَ: वे भरोसा करते हैं, अपने सारे मामले अल्लाह के सुपुर्द कर देते हैं।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में सच्चे और कामिल ईमान वालों की पहचान बयान कर रहा है। सच्चे मोमिन वे हैं जिनके दिलों पर जब अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल काँप उठते हैं — यह डर अल्लाह की अज़मत, उसके हुक्म की पालना और उसके अज़ाब के ख़ौफ़ से होता है। यह सिर्फ़ ज़बानी दावा नहीं, बल्कि दिल की गहराई से पैदा होने वाला एहसास है।

जब उनके सामने अल्लाह की आयतें (क़ुरआन) पढ़ी जाती हैं, तो वे उन्हें सिर्फ़ सुनते ही नहीं, बल्कि उन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं। इस तदब्बुर (चिंतन) की बरकत से उनका ईमान और मज़बूत हो जाता है, उनका यक़ीन और रूसुख़ बढ़ जाता है। हर नई आयत उनके दिल में रौशनी और हिदायत का इज़ाफ़ा करती है।

और वे अपने रब ही पर भरोसा रखते हैं। अपनी ज़रूरतों को पूरा करने, अपने मामलों को दुरुस्त करने और मुसीबतों से बचने के लिए वे किसी और की तरफ़ नहीं देखते, बल्कि अपने परवरदिगार ही पर तवक्कुल करते हैं। वे उसी से उम्मीद रखते हैं और उसी से डरते हैं, किसी और से नहीं।

फ़ायदे:

  • यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़बान का दावा नहीं, बल्कि दिल का हाल है। जिसके दिल में अल्लाह की मुहब्बत और ख़ौफ़ होगा, उसका अमल भी उसी के मुताबिक़ होगा।
  • क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ना या सुनना काफ़ी नहीं, बल्कि उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना ज़रूरी है। जितना हम क़ुरआन को समझेंगे, हमारा ईमान उतना ही मज़बूत होता जाएगा।
  • तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) मोमिन की सबसे बड़ी ताक़त है। जो इंसान अल्लाह पर भरोसा कर लेता है, उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रहती, और अल्लाह उसके लिए हर मुश्किल से निकलने का रास्ता बना देता है।
  • यह आयत हमें बताती है कि ईमान एक ज़िंदा चीज़ है जो बढ़ता और घटता है। क़ुरआन की तिलावत, ज़िक्र और नेक अमल से इसे बढ़ाया जा सकता है। इसलिए हमें हमेशा अपने ईमान को तरोताज़ा रखने की कोशिश करनी चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — अल-अनफाल

1يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْأَنفَالِ ۖ قُلِ الْأَنفَالُ لِلَّهِ وَالرَّسُولِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَصْلِحُوا ذَاتَ بَيْنِكُمْ ۖ وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे में पूछा करते हैं तुम कह दो कि अनफाल मख़सूस ख़ुदा और रसूल के वास्ते है तो ख़ुदा से डरो (और) अपने बाहमी (आपसी) मामलात की इसलाह करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो
2إِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ الَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ اللَّهُ وَجِلَتْ قُلُوبُهُمْ وَإِذَا تُلِيَتْ عَلَيْهِمْ آيَاتُهُ زَادَتْهُمْ إِيمَانًا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके सामने) ख़ुदा का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल हिल जाते हैं और जब उनके सामने उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनके ईमान को और भी ज्यादा कर देती हैं और वह लोग बस अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं
3الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ
नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और जो हम ने उन्हें दिया हैं उसमें से (राहे ख़ुदा में) ख़र्च करते हैं
4أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُمْ دَرَجَاتٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
यही तो सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के लिए उनके परवरदिगार के हॉ (बड़े बड़े) दरजे हैं और बख्शिश और इज्ज़त और आबरू के साथ रोज़ी है (ये माले ग़नीमत का झगड़ा वैसा ही है)
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
2आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 2

सूरा अल-अनफाल आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सच्चे ईमानदार तो बस वही लोग हैं कि जब (उनके…

सूरा आयत 2/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए