अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُوَلِّهِمْ دُبُرَهُ: उन्हें अपनी पीठ दिखाना, अर्थात युद्ध के मैदान से भागना।
- مُتَحَرِّفًا لِّقِتَالٍ: युद्ध की चाल के लिए मुड़ना, यानी दुश्मन को धोखा देने के लिए पीछे हटना ताकि अचानक हमला किया जा सके।
- مُتَحَيِّزًا إِلَىٰ فِئَةٍ: किसी ऐसे समूह (फ़ौज) की ओर झुकना या उसमें शामिल होना जो मुसलमानों की मदद के लिए मौजूद हो।
- بَاءَ: लौटा, वापस हुआ, या अपने ऊपर लाद लिया।
- مَأْوَاهُ: उसका ठिकाना, निवास स्थान।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत युद्ध के मैदान से भागने की सख्त मनाही करती है। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि जो कोई उस दिन (युद्ध के दिन) दुश्मन से मुकाबले के वक़्त उन्हें अपनी पीठ दिखाकर भागेगा, तो वह अल्लाह के क्रोध का शिकार होगा। लेकिन इस नियम के दो अपवाद हैं:
- مُتَحَرِّفًا لِّقِتَالٍ: यानी अगर कोई योद्धा युद्ध की चाल के तौर पर पीछे हटे, ताकि दुश्मन को धोखा देकर अचानक पलटकर हमला कर सके, तो यह भागना नहीं है, बल्कि युद्ध की रणनीति है। यह जायज़ है।
- مُتَحَيِّزًا إِلَىٰ فِئَةٍ: यानी अगर कोई योद्धा अपनी फ़ौज से अलग होकर किसी दूसरे मुस्लिम समूह की ओर चला जाए जो जंग में मौजूद है, ताकि उनके साथ मिलकर दुश्मन का मुकाबला करे, तो यह भी जायज़ है। यह भागना नहीं माना जाएगा।
इन दो स्थितियों के अलावा, जो कोई भी युद्ध के मैदान से भागेगा, वह अल्लाह के ग़ज़ब (क्रोध) के साथ लौटेगा, यानी वह अल्लाह का क्रोध अपने ऊपर लाद लेगा। उसका ठिकाना जहन्नम (नरक) होगा, और वह कितना बुरा ठिकाना है!
यह ध्यान देने वाली बात है कि यह हुक्म उस स्थिति के लिए है जब दुश्मन की तादाद मुसलमानों से दोगुनी से ज़्यादा न हो। लेकिन अगर दुश्मन की तादाद मुसलमानों से दोगुनी से कहीं ज़्यादा हो (जैसा कि सूरह अनफाल की आयत 66 में अल्लाह ने आसानी दी है), तो पीछे हटना जायज़ है, क्योंकि अल्लाह ने अपने बंदों पर रहम करते हुए यह बोझ हल्का कर दिया।
फ़ायदे (सबक):
- युद्ध में साहस और स्थिरता: यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि जब वे सच्चे इरादे से जिहाद के लिए निकलें, तो उन्हें दुश्मन के सामने डटे रहना चाहिए। भागना कायरता है और अल्लाह को नापसंद है।
- रणनीति की अनुमति: इस्लाम युद्ध में समझदारी और रणनीति की इजाज़त देता है। पीछे हटना अगर युद्ध की चाल हो, तो यह कायरता नहीं बल्कि बुद्धिमानी है। इससे पता चलता है कि इस्लाम दीन में अक़्ल और तदबीर (समझदारी) की कितनी अहमियत है।
- एकता की ताकत: मुसलमानों को चाहिए कि वे अकेले न रहें, बल्कि अपनी फ़ौज या किसी और मुस्लिम समूह के साथ मिलकर काम करें। एकता में बरकत है और अकेले रहने से कमज़ोरी आती है।
- अल्लाह की पकड़ से डर: जो अल्लाह के हुक्म की खिलाफ़वरज़ी करता है, उसे अल्लाह के क्रोध और जहन्नम की सज़ा का सामना करना पड़ेगा। यह हर मुसलमान के लिए एक चेतावनी है कि वह अल्लाह के आदेशों का पालन करे।
- अल्लाह की रहमत: अल्लाह ने अपने बंदों पर रहम करते हुए कठिन परिस्थितियों में आसानी दी है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह अपने बंदों की कमज़ोरी को जानता है और उन पर बोझ नहीं डालता।
📜 आयत 14-18 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 16
सूरा अल-अनफाल आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (याद रहे कि) उस शख़्स के सिवा जो लड़ाई वास्ते…सूरा आयत 16/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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