अल-अनफाल · 17/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
فَلَمْ تَقْتُلُوهُمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ قَتَلَهُمْ ۚ وَمَا رَمَيْتَ إِذْ رَمَيْتَ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ رَمَىٰ ۚ وَلِيُبْلِيَ الْمُؤْمِنِينَ مِنْهُ بَلَاءً حَسَنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ۝١٧
Falam taqtuloohum wa laakinnal laaha qatalahum; wa maa ramaita iz ramaita wa laakinnal laaha ramaa; wa liyubliyal mu`mineena minhu balaaa`an hasanaa; innal laaha Samee`un Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और (मुसलमानों) उन कुफ्फ़ार को कुछ तुमने तो क़त्ल किया नही बल्कि उनको तो ख़ुदा ने क़त्ल किया और (ऐ रसूल) जब तुमने तीर मारा तो कुछ तुमने नही मारा बल्कि ख़ुदा ख़ुदा ने तीर मारा और ताकि अपनी तरफ से मोमिनीन पर खूब एहसान करे बेशक ख़ुदा (सबकी) सुनता और (सब कुछ) जानता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلَمْ تَقْتُلُوهُمْ: तुमने उन्हें नहीं मारा (अपनी ताकत से)।
  • وَلَٰكِنَّ اللَّهَ قَتَلَهُمْ: बल्कि अल्लाह ने उन्हें मारा (अपनी मदद से)।
  • وَمَا رَمَيْتَ إِذْ رَمَيْتَ: और तूने नहीं फेंका जब तूने फेंका (अर्थात तेरे फेंकने का असर तेरी ताकत से नहीं था)।
  • وَلِيُبْلِيَ الْمُؤْمِنِينَ مِنْهُ بَلَاءً حَسَنًا: और ताकि अल्लाह मोमिनों को अपनी ओर से अच्छा इनाम दे (परीक्षण के बाद)।
  • سَمِيعٌ عَلِيمٌ: सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! बद्र के मैदान में जब तुमने मुशरिकों से जंग की, तो यह न समझना कि यह क़त्ल तुम्हारी अपनी ताकत और हिम्मत से हुआ। तुम्हारी संख्या कम थी, हथियार भी कम थे, लेकिन अल्लाह ने अपनी ग़ैबी मदद से उन्हें हराया और तुम्हें उन पर ग़लबा दिया। इसी तरह, ऐ नबी! जब आपने मुशरिकों की तरफ़ मुट्ठी भर मिट्टी फेंकी, तो वह फेंकना आपकी अपनी ताकत से नहीं था, बल्कि अल्लाह ने उस मिट्टी को उनकी आँखों तक पहुँचाया और हर एक की आँख में वह मिट्टी जा लगी, जिससे वे भाग खड़े हुए। यह सब कुछ अल्लाह की क़ुदरत का करिश्मा था। अल्लाह ने यह सब इसलिए किया ताकि मोमिनों को अपनी ओर से अच्छा इनाम दे — दुनिया में ग़नीमत का माल और आख़िरत में जन्नत — और उन्हें यह एहसास दिलाए कि कामयाबी अल्लाह के हाथ में है, ताकि वे उसके शुक्रगुज़ार बनें। बेशक अल्लाह तुम्हारी दुआओं को सुनता है और तुम्हारे दिलों के हाल को जानता है, और वही जानता है कि उसके बंदों के लिए क्या बेहतर है।

फ़ायदे (सबक):

  1. ताकत का स्रोत अल्लाह है: यह आयत हमें सिखाती है कि जंग या किसी भी काम में कामयाबी हमारी ताकत से नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद से होती है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और अपनी ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए।
  2. नबी की सुन्नत की अहमियत: जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मिट्टी फेंकी, तो अल्लाह ने उसे असरदार बनाया। इससे पता चलता है कि नबी के हर काम में बरकत होती है और उनकी पैरवी करने वालों को भी अल्लाह की मदद मिलती है।
  3. अल्लाह की सुनने और जानने की सिफ़त: अल्लाह हमारी दुआएँ सुनता है और हमारी नीयतों को जानता है। यह हमें सिखाता है कि हम अपने अंदर और बाहर दोनों को सुधारें, क्योंकि अल्लाह को सब पता है।
  4. शुक्रगुज़ारी का सबक: अल्लाह की नेअमतों पर शुक्र करना चाहिए। जब अल्लाह हमें कामयाबी देता है, तो उसे अपनी ताकत न समझें, बल्कि अल्लाह का एहसान मानें और उसके शुक्र में इबादत करें।
  5. इस्लाम में जिहाद की फज़ीलत: यह आयत जिहाद की अहमियत बताती है कि अल्लाह अपने मोमिन बंदों को जिहाद के ज़रिए बुलंद दर्जे देता है और उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इनाम देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-अनफाल

15يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا لَقِيتُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا زَحْفًا فَلَا تُوَلُّوهُمُ الْأَدْبَارَ
ऐ ईमानदारों जब तुमसे कुफ्फ़ार से मैदाने जंग में मुक़ाबला हुआ तो (ख़बरदार) उनकी तरफ पीठ न करना
16وَمَن يُوَلِّهِمْ يَوْمَئِذٍ دُبُرَهُ إِلَّا مُتَحَرِّفًا لِّقِتَالٍ أَوْ مُتَحَيِّزًا إِلَىٰ فِئَةٍ فَقَدْ بَاءَ بِغَضَبٍ مِّنَ اللَّهِ وَمَأْوَاهُ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
(याद रहे कि) उस शख़्स के सिवा जो लड़ाई वास्ते कतराए या किसी जमाअत के पास (जाकर) मौके पाए (और) जो शख़्स भी उस दिन उन कुफ्फ़ार की तरफ पीठ फेरेगा वह यक़ीनी (हिर फिर के) ख़ुदा के ग़जब में आ गया और उसका ठिकाना जहन्नुम ही हैं और वह क्या बुरा ठिकाना है
17فَلَمْ تَقْتُلُوهُمْ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ قَتَلَهُمْ ۚ وَمَا رَمَيْتَ إِذْ رَمَيْتَ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ رَمَىٰ ۚ وَلِيُبْلِيَ الْمُؤْمِنِينَ مِنْهُ بَلَاءً حَسَنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और (मुसलमानों) उन कुफ्फ़ार को कुछ तुमने तो क़त्ल किया नही बल्कि उनको तो ख़ुदा ने क़त्ल किया और (ऐ रसूल) जब तुमने तीर मारा तो कुछ तुमने नही मारा बल्कि ख़ुदा ख़ुदा ने तीर मारा और ताकि अपनी तरफ से मोमिनीन पर खूब एहसान करे बेशक ख़ुदा (सबकी) सुनता और (सब कुछ) जानता है
18ذَٰلِكُمْ وَأَنَّ اللَّهَ مُوهِنُ كَيْدِ الْكَافِرِينَ
ये तो ये ख़ुदा तो काफिरों की मक्कारी का कमज़ोर कर देने वाला है
19إِن تَسْتَفْتِحُوا فَقَدْ جَاءَكُمُ الْفَتْحُ ۖ وَإِن تَنتَهُوا فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ وَإِن تَعُودُوا نَعُدْ وَلَن تُغْنِيَ عَنكُمْ فِئَتُكُمْ شَيْئًا وَلَوْ كَثُرَتْ وَأَنَّ اللَّهَ مَعَ الْمُؤْمِنِينَ
(काफ़िर) अगर तुम ये चाहते हो (कि जो हक़ पर हो उसकी) फ़तेह हो (मुसलमानों की) फ़तेह भी तुम्हारे सामने आ मौजूद हुई अब क्या गुरूर बाक़ी है और अगर तुम (अब भी मुख़तलिफ़ इस्लाम) से बाज़ रहो तो तुम्हारे वास्ते बेहतर है और अगर कहीं तुम पलट पड़े तो (याद रहे) हम भी पलट पड़ेगें (और तुम्हें तबाह कर छोड़ देगें) और तुम्हारी जमाअत अगरचे बहुत ज्यादा भी हो हरगिज़ कुछ काम न आएगी और ख़ुदा तो यक़ीनी मामिनीन के साथ है
अल-अनफालकुरान सूची
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मदनीRevelation
17आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 17

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Tuesday, August 18, 2026

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