Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُجَادِلُونَكَ — वे आपसे झगड़ा कर रहे हैं / विवाद कर रहे हैं
- الْحَقّ — सत्य (यहाँ अर्थ: युद्ध का आदेश)
- تَبَيَّنَ — स्पष्ट हो गया / प्रकट हो गया
- يُسَاقُونَ — वे हाँके जा रहे हैं / ले जाए जा रहे हैं
- يَنظُرُونَ — वे देख रहे हैं (आँखों से सामने देखना)
विस्तृत तफ़सीर:
ऐ नबी! आपके कुछ साथी (मोमिनीन) उस सत्य (युद्ध के आदेश) के बारे में आपसे विवाद कर रहे थे, जबकि उन्हें यह स्पष्ट हो चुका था कि युद्ध अवश्य होगा और उन्हें विजय प्राप्त होगी। अल्लाह ने अपने नबी के माध्यम से उन्हें यह बात बता दी थी कि वे क़ुरैश के काफ़िले (व्यापारिक क़ाफ़िले) के बजाय युद्ध के मैदान में जाएँगे। इसके बावजूद वे आपसे झगड़ा कर रहे थे और कह रहे थे: "हम तो केवल क़ाफ़िले (व्यापारिक कारवाँ) के लिए निकले थे, युद्ध के लिए नहीं। यदि आपने हमें पहले बता दिया होता तो हम अपनी तैयारी पूरी कर लेते।"
उनकी यह स्थिति ऐसी थी जैसे उन्हें मौत की ओर हाँका जा रहा हो और वे उसे अपनी आँखों से देख रहे हों। यह उनकी स्वाभाविक मानवीय कमज़ोरी थी कि वे युद्ध से डर रहे थे, क्योंकि उन्होंने युद्ध की तैयारी नहीं की थी और न ही उनके पास पर्याप्त हथियार और साज़ो-सामान था। यह डर और झिझक उनके ईमान की कमज़ोरी के कारण नहीं थी, बल्कि मानवीय फ़ितरत (स्वभाव) के कारण थी, क्योंकि मौत से डरना हर इंसान की फ़ितरत है।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह के आदेश पर बिना किसी शर्त के अमल करना चाहिए। जब अल्लाह और उसके रसूल का आदेश स्पष्ट हो जाए तो उसमें विवाद और झगड़ा नहीं करना चाहिए, भले ही वह आदेश हमारी इच्छा के ख़िलाफ़ क्यों न हो।
- युद्ध की तैयारी हमेशा रखनी चाहिए। मुसलमान को हर वक़्त अपनी रक्षा और युद्ध की तैयारी में रहना चाहिए, ताकि जब ज़रूरत पड़े तो वह कमज़ोर न हो।
- नबी (ﷺ) की बात पर भरोसा करना चाहिए। अल्लाह के नबी को जो बात अल्लाह की ओर से बताई जाती है, वह सत्य होती है, भले ही वह हमारी समझ में न आए।
- मानवीय कमज़ोरी माफ़ की जा सकती है। अल्लाह ने अपने नबी के साथियों की इस कमज़ोरी को माफ़ कर दिया, क्योंकि यह उनके ईमान की कमज़ोरी नहीं थी, बल्कि इंसानी फ़ितरत थी। इससे हमें सीख मिलती है कि हमें दूसरों की कमज़ोरियों पर रहम करना चाहिए।
- अल्लाह की मदद उसके आदेश की पालना में है। जब सहाबा ने नबी (ﷺ) के आदेश का पालन किया और युद्ध के लिए निकले, तो अल्लाह ने उन्हें विजय प्रदान की। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह के आदेश की पालना में ही हमारी भलाई और कामयाबी है।
📜 आयत 4-8 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 6
सूरा अल-अनफाल आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी…सूरा आयत 6/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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