अल-अनफाल · 6/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
يُجَادِلُونَكَ فِي الْحَقِّ بَعْدَمَا تَبَيَّنَ كَأَنَّمَا يُسَاقُونَ إِلَى الْمَوْتِ وَهُمْ يَنظُرُونَ ۝٦
Yujaadiloonaka fil haqqi ba`da maa tabaiyana kaannamaa yasaaqoona ilal mawti wa hum uanzuroon
📖 हिंदी अर्थ
कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी तुमसे (ख्वाह माख्वाह) सच्ची बात में झगड़तें थें और इस तरह (करने लगे) गोया (ज़बरदस्ती) मौत के मुँह में ढकेले जा रहे हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُجَادِلُونَكَ — वे आपसे झगड़ा कर रहे हैं / विवाद कर रहे हैं
  • الْحَقّ — सत्य (यहाँ अर्थ: युद्ध का आदेश)
  • تَبَيَّنَ — स्पष्ट हो गया / प्रकट हो गया
  • يُسَاقُونَ — वे हाँके जा रहे हैं / ले जाए जा रहे हैं
  • يَنظُرُونَ — वे देख रहे हैं (आँखों से सामने देखना)

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! आपके कुछ साथी (मोमिनीन) उस सत्य (युद्ध के आदेश) के बारे में आपसे विवाद कर रहे थे, जबकि उन्हें यह स्पष्ट हो चुका था कि युद्ध अवश्य होगा और उन्हें विजय प्राप्त होगी। अल्लाह ने अपने नबी के माध्यम से उन्हें यह बात बता दी थी कि वे क़ुरैश के काफ़िले (व्यापारिक क़ाफ़िले) के बजाय युद्ध के मैदान में जाएँगे। इसके बावजूद वे आपसे झगड़ा कर रहे थे और कह रहे थे: "हम तो केवल क़ाफ़िले (व्यापारिक कारवाँ) के लिए निकले थे, युद्ध के लिए नहीं। यदि आपने हमें पहले बता दिया होता तो हम अपनी तैयारी पूरी कर लेते।"

उनकी यह स्थिति ऐसी थी जैसे उन्हें मौत की ओर हाँका जा रहा हो और वे उसे अपनी आँखों से देख रहे हों। यह उनकी स्वाभाविक मानवीय कमज़ोरी थी कि वे युद्ध से डर रहे थे, क्योंकि उन्होंने युद्ध की तैयारी नहीं की थी और न ही उनके पास पर्याप्त हथियार और साज़ो-सामान था। यह डर और झिझक उनके ईमान की कमज़ोरी के कारण नहीं थी, बल्कि मानवीय फ़ितरत (स्वभाव) के कारण थी, क्योंकि मौत से डरना हर इंसान की फ़ितरत है।


फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह के आदेश पर बिना किसी शर्त के अमल करना चाहिए। जब अल्लाह और उसके रसूल का आदेश स्पष्ट हो जाए तो उसमें विवाद और झगड़ा नहीं करना चाहिए, भले ही वह आदेश हमारी इच्छा के ख़िलाफ़ क्यों न हो।
  2. युद्ध की तैयारी हमेशा रखनी चाहिए। मुसलमान को हर वक़्त अपनी रक्षा और युद्ध की तैयारी में रहना चाहिए, ताकि जब ज़रूरत पड़े तो वह कमज़ोर न हो।
  3. नबी (ﷺ) की बात पर भरोसा करना चाहिए। अल्लाह के नबी को जो बात अल्लाह की ओर से बताई जाती है, वह सत्य होती है, भले ही वह हमारी समझ में न आए।
  4. मानवीय कमज़ोरी माफ़ की जा सकती है। अल्लाह ने अपने नबी के साथियों की इस कमज़ोरी को माफ़ कर दिया, क्योंकि यह उनके ईमान की कमज़ोरी नहीं थी, बल्कि इंसानी फ़ितरत थी। इससे हमें सीख मिलती है कि हमें दूसरों की कमज़ोरियों पर रहम करना चाहिए।
  5. अल्लाह की मदद उसके आदेश की पालना में है। जब सहाबा ने नबी (ﷺ) के आदेश का पालन किया और युद्ध के लिए निकले, तो अल्लाह ने उन्हें विजय प्रदान की। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह के आदेश की पालना में ही हमारी भलाई और कामयाबी है।


📜 आयत 4-8 — सूरा अल-अनफाल

4أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُمْ دَرَجَاتٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
यही तो सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के लिए उनके परवरदिगार के हॉ (बड़े बड़े) दरजे हैं और बख्शिश और इज्ज़त और आबरू के साथ रोज़ी है (ये माले ग़नीमत का झगड़ा वैसा ही है)
5كَمَا أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِن بَيْتِكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ لَكَارِهُونَ
जिस तरह तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें बिल्कुल ठीक (मसलहत से) तुम्हारे घर से (जंग बदर) में निकाला था और मोमिनीन का एक गिरोह (उससे) नाखुश था
6يُجَادِلُونَكَ فِي الْحَقِّ بَعْدَمَا تَبَيَّنَ كَأَنَّمَا يُسَاقُونَ إِلَى الْمَوْتِ وَهُمْ يَنظُرُونَ
कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी तुमसे (ख्वाह माख्वाह) सच्ची बात में झगड़तें थें और इस तरह (करने लगे) गोया (ज़बरदस्ती) मौत के मुँह में ढकेले जा रहे हैं
7وَإِذْ يَعِدُكُمُ اللَّهُ إِحْدَى الطَّائِفَتَيْنِ أَنَّهَا لَكُمْ وَتَوَدُّونَ أَنَّ غَيْرَ ذَاتِ الشَّوْكَةِ تَكُونُ لَكُمْ وَيُرِيدُ اللَّهُ أَن يُحِقَّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ وَيَقْطَعَ دَابِرَ الْكَافِرِينَ
और उसे (अपनी ऑंखों से) देख रहे हैं और (ये वक्त था) जब ख़ुदा तुमसे वायदा कर रहा था कि (कुफ्फार मक्का) दो जमाअतों में से एक तुम्हारे लिए ज़रूरी हैं और तुम ये चाहते थे कि कमज़ोर जमाअत तुम्हारे हाथ लगे (ताकि बग़ैर लड़े भिड़े माले ग़नीमत हाथ आ जाए) और ख़ुदा ये चाहता था कि अपनी बातों से हक़ को साबित (क़दम) करें और काफिरों की जड़ काट डाले
8لِيُحِقَّ الْحَقَّ وَيُبْطِلَ الْبَاطِلَ وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُونَ
ताकि हक़ को (हक़) साबित कर दे और बातिल का मटियामेट कर दे अगर चे गुनाहगार (कुफ्फार उससे) नाखुश ही क्यों न हो
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 6

सूरा अल-अनफाल आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी…

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Wednesday, September 30, 2026

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