अल-अनफाल · 5/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
كَمَا أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِن بَيْتِكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ لَكَارِهُونَ ۝٥
Kaamaaa akhrajaka Rabbuka mim baitika bilhaqq; wa inna fareeqam minal mu`mineena lakaarihoon
📖 हिंदी अर्थ
जिस तरह तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें बिल्कुल ठीक (मसलहत से) तुम्हारे घर से (जंग बदर) में निकाला था और मोमिनीन का एक गिरोह (उससे) नाखुश था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَمَا أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِن بَيْتِكَ بِالْحَقِّ: जिस प्रकार आपके रब ने आपको सत्य के साथ आपके घर (मदीना) से निकाला।
  • وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ لَكَارِهُونَ: और निश्चय ही ईमानवालों में से एक समूह इसे नापसंद कर रहा था।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस स्थिति की ओर संकेत करती है जब अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को मदीना से बद्र के मैदान की ओर क़ुरैश के क़ाफ़िले (व्यापारिक कारवां) से मुक़ाबले के लिए निकलने का आदेश दिया। यह आदेश वह़्य (प्रकाशना) के माध्यम से आया था, जो सत्य और हिक्मत पर आधारित था। हालाँकि, कुछ ईमानवाले इस निकलने को नापसंद कर रहे थे, क्योंकि उन्होंने सोचा था कि वे केवल क़ाफ़िले को रोकने के लिए निकले हैं, जबकि अल्लाह की मंशा यह थी कि बद्र का निर्णायक युद्ध हो, जिसमें इस्लाम को शक्ति और सत्य का प्रकटीकरण हो। यहाँ अल्लाह तआला नबी ﷺ को समझाते हैं कि जिस प्रकार उन्होंने ग़नीमत (युद्ध-धन) के विभाजन के मामले में मुसलमानों की राय के विपरीत अपना फ़ैसला सुनाया और उसे अपने और अपने रसूल के अधिकार में रखा, उसी प्रकार बद्र की ओर निकलने का आदेश भी उनकी नापसंदगी के बावजूद सत्य और भलाई पर आधारित था। अल्लाह का आदेश हमेशा बंदों की भलाई के लिए होता है, चाहे उन्हें उसकी हिक्मत का पूरा एहसास न हो।

फ़ायदे (लाभ):

  1. अल्लाह के आदेशों में बंदों की भलाई छिपी होती है, भले ही वे उसे समझ न पाएँ। इसलिए मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह और उसके रसूल के फ़ैसले पर पूरा भरोसा रखे।
  2. नबी ﷺ की आज्ञाकारिता और उनके नेतृत्व को स्वीकार करना ईमान का हिस्सा है, चाहे कुछ परिस्थितियाँ नापसंद क्यों न हों।
  3. अल्लाह के फ़ैसले में बंदे की नापसंदगी का कोई वज़न नहीं होता; सच्चा ईमान उसी में है कि इंसान अपनी राय को अल्लाह और उसके रसूल की राय के आगे समर्पित कर दे।
  4. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि कठिन और नापसंद फ़ैसलों में भी अल्लाह की मदद और फ़तह (विजय) छिपी होती है, जैसे बद्र की जंग में इस्लाम को जो शक्ति मिली वह उसी नापसंद आदेश का नतीजा थी।


📜 आयत 3-7 — सूरा अल-अनफाल

3الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ
नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और जो हम ने उन्हें दिया हैं उसमें से (राहे ख़ुदा में) ख़र्च करते हैं
4أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّا ۚ لَّهُمْ دَرَجَاتٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَمَغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
यही तो सच्चे ईमानदार हैं उन्हीं के लिए उनके परवरदिगार के हॉ (बड़े बड़े) दरजे हैं और बख्शिश और इज्ज़त और आबरू के साथ रोज़ी है (ये माले ग़नीमत का झगड़ा वैसा ही है)
5كَمَا أَخْرَجَكَ رَبُّكَ مِن بَيْتِكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّ فَرِيقًا مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ لَكَارِهُونَ
जिस तरह तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें बिल्कुल ठीक (मसलहत से) तुम्हारे घर से (जंग बदर) में निकाला था और मोमिनीन का एक गिरोह (उससे) नाखुश था
6يُجَادِلُونَكَ فِي الْحَقِّ بَعْدَمَا تَبَيَّنَ كَأَنَّمَا يُسَاقُونَ إِلَى الْمَوْتِ وَهُمْ يَنظُرُونَ
कि वह लोग हक़ के ज़ाहिर होने के बाद भी तुमसे (ख्वाह माख्वाह) सच्ची बात में झगड़तें थें और इस तरह (करने लगे) गोया (ज़बरदस्ती) मौत के मुँह में ढकेले जा रहे हैं
7وَإِذْ يَعِدُكُمُ اللَّهُ إِحْدَى الطَّائِفَتَيْنِ أَنَّهَا لَكُمْ وَتَوَدُّونَ أَنَّ غَيْرَ ذَاتِ الشَّوْكَةِ تَكُونُ لَكُمْ وَيُرِيدُ اللَّهُ أَن يُحِقَّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ وَيَقْطَعَ دَابِرَ الْكَافِرِينَ
और उसे (अपनी ऑंखों से) देख रहे हैं और (ये वक्त था) जब ख़ुदा तुमसे वायदा कर रहा था कि (कुफ्फार मक्का) दो जमाअतों में से एक तुम्हारे लिए ज़रूरी हैं और तुम ये चाहते थे कि कमज़ोर जमाअत तुम्हारे हाथ लगे (ताकि बग़ैर लड़े भिड़े माले ग़नीमत हाथ आ जाए) और ख़ुदा ये चाहता था कि अपनी बातों से हक़ को साबित (क़दम) करें और काफिरों की जड़ काट डाले
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
5आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 5

सूरा अल-अनफाल आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस तरह तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हें बिल्कुल ठीक (मसलहत से)…

सूरा आयत 5/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Wednesday, September 30, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए