अत-तौबा · 103/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
خُذْ مِنْ أَمْوَالِهِمْ صَدَقَةً تُطَهِّرُهُمْ وَتُزَكِّيهِم بِهَا وَصَلِّ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّ صَلَاتَكَ سَكَنٌ لَّهُمْ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ۝١٠٣
Khuz min amwaalihim sadaqtan tutahhiruhum wa tuzakkeehim bihaa wa salli `alaihim inna salaataka sakanul lahum; wallaahu Samee`un `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम उनके माल की ज़कात लो (और) इसकी बदौलत उनको (गुनाहो से) पाक साफ करों और उनके वास्ते दुआएं ख़ैर करो क्योंकि तुम्हारी दुआ इन लोगों के हक़ में इत्मेनान (का बाइस है) और ख़ुदा तो (सब कुछ) सुनता (और) जानता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَدَقَةً: यहाँ अर्थ है ज़कात (अनिवार्य दान) या वह धन जो अल्लाह की राह में दिया जाए।
  • تُطَهِّرُهُمْ: उन्हें पवित्र करे, गुनाहों के मैल से साफ़ करे।
  • وَتُزَكِّيهِم: उनके अच्छे कर्मों को बढ़ाए और उन्हें बरकत दे, या उन्हें नेकी के उच्च स्तर तक पहुँचाए।
  • صَلِّ عَلَيْهِمْ: उनके लिए दुआ करो और उनकी मग़फिरत की प्रार्थना करो।
  • سَكَنٌ: राहत, चैन और मन की तसल्ली।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! उन लोगों (तौबा करने वालों) के माल में से ज़कात और सदक़ा लीजिए, जिन्होंने अच्छे और बुरे कर्मों को मिलाया था और अपने गुनाहों पर पश्चाताप किया है। यह सदक़ा उनके गुनाहों की गंदगी को धोकर उन्हें पवित्र करता है और उनके अच्छे कर्मों को बढ़ाता है, उन्हें मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के दर्जे से निकालकर मुख़लिस (सच्चे) लोगों के दर्जे तक उठाता है। और आप उनके लिए दुआ करें और उनकी मग़फिरत की प्रार्थना करें। बेशक आपकी दुआ उनके लिए रहमत, सुकून और दिल की तसल्ली का ज़रिया है। अल्लाह सब कुछ सुनने वाला है — वह आपकी दुआ और उनका इक़रार (स्वीकारोक्ति) सुनता है — और वह उनके कर्मों और नीयतों से भली-भाँति अवगत है। वह हर कर्म करने वाले को उसके कर्म का पूरा बदला देगा।

फ़ायदे (सबक़):

  1. ज़कात और सदक़ा सिर्फ़ एक आर्थिक इबादत नहीं, बल्कि यह गुनाहों से पवित्रता और आत्मा की तज़्किया (शुद्धि) का ज़रिया है। यह इंसान को अल्लाह के करीब लाता है और उसके दिल को साफ़ करता है।
  2. नबी की दुआ मोमिन के लिए बहुत बड़ी नेमत है — यह उसे सुकून, रहमत और अल्लाह की पनाह में ले आती है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने भाइयों के लिए दुआ करनी चाहिए, ख़ासकर उनके लिए जो तौबा करते हैं।
  3. यह आयत बताती है कि अल्लाह तौबा करने वालों को कितना प्यार करता है — वह उन्हें पवित्र करने के लिए सदक़ा का हुक्म देता है और नबी से उनके लिए मग़फिरत की दुआ करवाता है। यह अल्लाह की रहमत की खिड़की है जो हर गुनाहगार के लिए खुली है।
  4. इससे यह भी सीख मिलती है कि माल को सिर्फ़ अपनी ज़रूरतों के लिए नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसमें अल्लाह का हक़ भी है। जो अपने माल में से अल्लाह की राह में देता है, वह अपने लिए ही भलाई कमाता है।
  5. अल्लाह सुनने वाला और जानने वाला है — वह हमारी दुआओं, हमारे पश्चाताप और हमारी नीयतों को जानता है। यह हमें सच्चाई और ईमानदारी के साथ अल्लाह की ओर रुजू करने की तरग़ीब देता है।


📜 आयत 101-105 — अत-तौबा

101وَمِمَّنْ حَوْلَكُم مِّنَ الْأَعْرَابِ مُنَافِقُونَ ۖ وَمِنْ أَهْلِ الْمَدِينَةِ ۖ مَرَدُوا عَلَى النِّفَاقِ لَا تَعْلَمُهُمْ ۖ نَحْنُ نَعْلَمُهُمْ ۚ سَنُعَذِّبُهُم مَّرَّتَيْنِ ثُمَّ يُرَدُّونَ إِلَىٰ عَذَابٍ عَظِيمٍ
और (मुसलमानों) तुम्हारे एतराफ़ (आस पास) के गॅवार देहातियों में से बाज़ मुनाफिक़ (भी) हैं और ख़ुद मदीने के रहने वालों मे से भी (बाज़ मुनाफिक़ हैं) जो निफ़ाक पर अड़ गए हैं (ऐ रसूल) तुम उन को नहीं जानते (मगर) हम उनको (ख़ूब) जानते हैं अनक़रीब हम (दुनिया में) उनकी दोहरी सज़ा करेगें फिर ये लोग (क़यामत में) एक बड़े अज़ाब की तरफ लौटाए जाऎंगे
102وَآخَرُونَ اعْتَرَفُوا بِذُنُوبِهِمْ خَلَطُوا عَمَلًا صَالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا عَسَى اللَّهُ أَن يَتُوبَ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और कुछ लोग हैं जिन्होंने अपने गुनाहों का (तो) एकरार किया (मगर) उन लोगों ने भले काम को और कुछ बुरे काम को मिला जुला (कर गोलमाल) कर दिया क़रीब है कि ख़ुदा उनकी तौबा कुबूल करे (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनी बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान हैं
103خُذْ مِنْ أَمْوَالِهِمْ صَدَقَةً تُطَهِّرُهُمْ وَتُزَكِّيهِم بِهَا وَصَلِّ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّ صَلَاتَكَ سَكَنٌ لَّهُمْ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम उनके माल की ज़कात लो (और) इसकी बदौलत उनको (गुनाहो से) पाक साफ करों और उनके वास्ते दुआएं ख़ैर करो क्योंकि तुम्हारी दुआ इन लोगों के हक़ में इत्मेनान (का बाइस है) और ख़ुदा तो (सब कुछ) सुनता (और) जानता है
104أَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ هُوَ يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ وَيَأْخُذُ الصَّدَقَاتِ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
क्या इन लोगों ने इतने भी नहीं जाना यक़ीनन ख़ुदा बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और वही ख़ैरातें (भी) लेता है और इसमें शक़ नहीं कि वही तौबा का बड़ा कुबूल करने वाला मेहरबान है
105وَقُلِ اعْمَلُوا فَسَيَرَى اللَّهُ عَمَلَكُمْ وَرَسُولُهُ وَالْمُؤْمِنُونَ ۖ وَسَتُرَدُّونَ إِلَىٰ عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम लोग अपने अपने काम किए जाओ अभी तो ख़ुदा और उसका रसूल और मोमिनीन तुम्हारे कामों को देखेगें और बहुत जल्द (क़यामत में) ज़ाहिर व बातिन के जानने वाले (ख़ुदा) की तरफ लौटाए जाऎंगे तब वह जो कुछ भी तुम करते थे तुम्हें बता देगा
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अनुवाद — अत-तौबा 103

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Tuesday, August 18, 2026

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