अत-तौबा · 73/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ جَاهِدِ الْكُفَّارَ وَالْمُنَافِقِينَ وَاغْلُظْ عَلَيْهِمْ ۚ وَمَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ ۝٧٣
yaaa aiyuhan Nabiyyu jaahidil kuffaara walmunaafiqeena waghluz `alaihim; wa maawaahum jahannnamu wa bi`sal maseer
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल कुफ्फ़ार के साथ (तलवार से) और मुनाफिकों के साथ (ज़बान से) जिहाद करो और उन पर सख्ती करो और उनका ठिकाना तो जहन्नुम ही है और वह (क्या) बुरी जगह है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जाहिद (جَاهِد): पूरी कोशिश और परिश्रम करो, जिहाद करो।
  • कुफ्फार (الْكُفَّار): कुफ्र करने वाले, जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल को झुठलाया।
  • मुनाफ़िक़ीन (الْمُنَافِقِينَ): दिखावे के लिए ईमान लाने वाले, जिनके दिलों में कुफ्र है और ज़ुबान पर ईमान है।
  • वग़लुज़ (وَاغْلُظْ): सख्ती करो, कठोरता से पेश आओ।
  • मअवाहुम (مَأْوَاهُمْ): उनका ठिकाना और आश्रय स्थल।
  • मसीर (الْمَصِير): अंतिम परिणाम और लौटने की जगह।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप कुफ्फार से तलवार और युद्ध के ज़रिए जिहाद करें, और मुनाफ़िक़ीन से दलील और हुज्जत के ज़रिए जिहाद करें। दोनों ही तरह के लोगों के साथ सख्ती और कठोरता से पेश आएं, क्योंकि यही उनके लिए उचित है। उनकी सख्ती का उद्देश्य उन्हें गुमराही से रोकना और उनके शर को खत्म करना है। आख़िरत में उनका ठिकाना जहन्नम (नरक) है, जो बहुत ही बुरा ठिकाना और बुरा अंजाम है। यह उनके कुफ्र, निफाक़ और अल्लाह के रसूल के खिलाफ उनकी साजिशों का नतीजा है।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत बताती है कि जिहाद सिर्फ कुफ्फार के खिलाफ ही नहीं, बल्कि मुनाफ़िक़ीन के खिलाफ भी ज़रूरी है, लेकिन हर एक के साथ उसके हाल के मुताबिक तरीका अपनाया जाए — कुफ्फार के साथ तलवार और मुनाफ़िक़ीन के साथ दलील और हुज्जत।
  2. सच्चाई के दुश्मनों के साथ नरमी और ढील नहीं दिखानी चाहिए, बल्कि सख्ती और पुख्तगी से पेश आना चाहिए, ताकि दीन की हिफाज़त हो सके।
  3. यह आयत मुसलमानों को तसल्ली देती है कि कुफ्फार और मुनाफ़िक़ीन की साजिशें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, उनका अंजाम जहन्नम है, और यही उनका हक़ है।
  4. इस आयत से यह भी सबक मिलता है कि अल्लाह के रसूल (ﷺ) की ज़िम्मेदारी सिर्फ तब्लीग़ ही नहीं, बल्कि दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई भी है, ताकि दीन का बोलबाला कायम रहे और ज़ुल्म का सफाया हो।
  5. मुनाफ़िक़ीन का खतरा कुफ्फार से कम नहीं, बल्कि कई बार ज़्यादा होता है, इसलिए उनसे निपटने के लिए हिकमत और दलील की ज़रूरत है।
🎧 सुनें

📜 आयत 71-75 — अत-तौबा

71وَالْمُؤْمِنُونَ وَالْمُؤْمِنَاتُ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ يَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ وَيُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَيُطِيعُونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ أُولَٰئِكَ سَيَرْحَمُهُمُ اللَّهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और ईमानदार मर्द और ईमानदार औरते उनमें से बाज़ के बाज़ रफीक़ है और नामज़ पाबन्दी से पढ़ते हैं और ज़कात देते हैं और ख़ुदा और उसके रसूल की फरमाबरदारी करते हैं यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा अनक़रीब रहम करेगा बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
72وَعَدَ اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَمَسَاكِنَ طَيِّبَةً فِي جَنَّاتِ عَدْنٍ ۚ وَرِضْوَانٌ مِّنَ اللَّهِ أَكْبَرُ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
ख़ुदा ने ईमानदार मर्दों और ईमानदारा औरतों से (बेहश्त के) उन बाग़ों का वायदा कर लिया है जिनके नीचे नहरें जारी हैं और वह उनमें हमेशा रहेगें (बेहश्त) अदन के बाग़ो में उम्दा उम्दा मकानात का (भी वायदा फरमाया) और ख़ुदा की ख़ुशनूदी उन सबसे बालातर है- यही तो बड़ी (आला दर्जे की) कामयाबी है
73يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ جَاهِدِ الْكُفَّارَ وَالْمُنَافِقِينَ وَاغْلُظْ عَلَيْهِمْ ۚ وَمَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
ऐ रसूल कुफ्फ़ार के साथ (तलवार से) और मुनाफिकों के साथ (ज़बान से) जिहाद करो और उन पर सख्ती करो और उनका ठिकाना तो जहन्नुम ही है और वह (क्या) बुरी जगह है
74يَحْلِفُونَ بِاللَّهِ مَا قَالُوا وَلَقَدْ قَالُوا كَلِمَةَ الْكُفْرِ وَكَفَرُوا بَعْدَ إِسْلَامِهِمْ وَهَمُّوا بِمَا لَمْ يَنَالُوا ۚ وَمَا نَقَمُوا إِلَّا أَنْ أَغْنَاهُمُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ مِن فَضْلِهِ ۚ فَإِن يَتُوبُوا يَكُ خَيْرًا لَّهُمْ ۖ وَإِن يَتَوَلَّوْا يُعَذِّبْهُمُ اللَّهُ عَذَابًا أَلِيمًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَمَا لَهُمْ فِي الْأَرْضِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
ये मुनाफेक़ीन ख़ुदा की क़समें खाते है कि (कोई बुरी बात) नहीं कही हालॉकि उन लोगों ने कुफ़्र का कलमा ज़रूर कहा और अपने इस्लाम के बाद काफिर हो गए और जिस बात पर क़ाबू न पा सके उसे ठान बैठे और उन लोगें ने (मुसलमानों से) सिर्फ इस वजह से अदावत की कि अपने फज़ल व करम से ख़ुदा और उसके रसूल ने दौलत मन्द बना दिया है तो उनके लिए उसमें ख़ैर है कि ये लोग अब भी तौबा कर लें और अगर ये न मानेगें तो ख़ुदा उन पर दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और तमाम दुनिया में उन का न कोई हामी होगा और न मददगार
75۞ وَمِنْهُم مَّنْ عَاهَدَ اللَّهَ لَئِنْ آتَانَا مِن فَضْلِهِ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكُونَنَّ مِنَ الصَّالِحِينَ
और इन (मुनाफेक़ीन) में से बाज़ ऐसे भी हैं जो ख़ुदा से क़ौल क़रार कर चुके थे कि अगर हमें अपने फज़ल (व करम) से (कुछ माल) देगा तो हम ज़रूर ख़ैरात किया करेगें और नेकोकार बन्दे हो जाऎंगे
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अनुवाद — अत-तौबा 73

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Tuesday, August 18, 2026

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