Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِإِيلَافِ – परिचित होने, आदत बनाने, या सुरक्षा और सहूलियत के साथ जुड़े रहने के लिए।
- قُرَيْشٍ – क़ुरैश जनजाति, जो मक्का के प्रतिष्ठित और सम्मानित कबीले थे, और जिनकी देखरेख में काबा था।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला क़ुरैश जनजाति की उस नेमत (अनुग्रह) की ओर इशारा कर रहे हैं जो उन्हें दी गई थी। क़ुरैश मक्का के रहने वाले थे और अल्लाह ने उन्हें दो व्यापारिक यात्राओं की सुरक्षा और सुविधा प्रदान की थी—सर्दियों में यमन की ओर और गर्मियों में शाम (सीरिया) की ओर। ये यात्राएँ उनके लिए आसान और खतरों से सुरक्षित थीं, जिससे उनका व्यापार चलता था और लोग उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते थे। यह सुरक्षा और व्यवस्था अल्लाह की ओर से एक विशेष कृपा थी, क्योंकि अरब के दूसरे कबीले अक्सर लूटपाट और झगड़ों में उलझे रहते थे, लेकिन क़ुरैश को यह अमन और इज़्ज़त मिली हुई थी।
इसके अलावा, यह आयत पिछली सूरह (अल-फ़ील) से जुड़ी हुई है, जिसमें अल्लाह ने अबरहा के हाथियों वाले लश्कर को हलाक कर दिया था। यानी अल्लाह ने काबा और मक्का की हिफ़ाज़त की, ताकि क़ुरैश की यह आदत और सुरक्षा बनी रहे। अगर अबरहा काबा को तबाह कर देता, तो क़ुरैश की यह इज़्ज़त और व्यापारिक सुरक्षा खत्म हो जाती। इसलिए अल्लाह ने उन्हें यह नेमत याद दिलाई कि उनकी यह सहूलियत और शान अल्लाह की देन है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह किसी को सुख-शांति, सुरक्षा और रोज़ी की सहूलियत देता है, तो उसे चाहिए कि वह इसे अपनी ताकत या योग्यता का नतीजा न समझे, बल्कि अल्लाह की देन माने और उसका शुक्र अदा करे। क़ुरैश को यह सब कुछ मिला था, लेकिन उन्हें हिदायत दी गई कि वे अल्लाह की इबादत करें, जिसने उन्हें भूख से बचाया और डर से अमन दिया। यह हमारे लिए भी एक सबक है कि हम अपनी ज़िंदगी में जो भी सुविधाएँ और नेमतें पाते हैं—चाहे वह अमन हो, रोज़ी हो, या समाज में इज़्ज़त—उन सबका शुक्र अल्लाह का अदा करें और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। यही सच्ची कामयाबी है कि इंसान अल्लाह के दिए हुए हर अनुग्रह को पहचाने और उसके आगे सिर झुकाए।
📜 आयत 1-3 — सूरा क़ुरैश
अनुवाद — क़ुरैश 1
सूरा क़ुरैश आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : चूँकि क़ुरैश को जाड़े और गर्मी के सफ़र से मानूस…सूरा आयत 1/4 — सूरा क़ुरैश قريش (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा क़ुरैश सुनें, सूरा क़ुरैश अनुवाद, सूरा क़ुरैश mp3, सूरा क़ुरैश pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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