क़ुरैश · 2/4
अनुवाद उच्चारण — सूरा क़ुरैश
إِيلَافِهِمْ رِحْلَةَ الشِّتَاءِ وَالصَّيْفِ ۝٢
Elaafihim rihlatash shitaa-i wass saif
📖 हिंदी अर्थ
तो उनको मानूस कर देने की वजह से

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِيلَافِهِمْ: उनका आदी होना, उनकी सुरक्षा और सहूलियत का प्रबंध।
  • رِحْلَةَ: यात्रा, सफ़र।
  • الشِّتَاءِ: सर्दी का मौसम।
  • الصَّيْفِ: गर्मी का मौसम।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने क़ुरैश क़बीले पर अपनी विशेष कृपा का ज़िक्र किया है कि उन्होंने उन्हें सुरक्षा और आराम दिया, और उनके व्यापार के लिए दो यात्राओं का प्रबंध किया — एक सर्दी के मौसम में यमन की ओर, क्योंकि वहाँ का मौसम गर्म और उनके लिए अनुकूल था, और दूसरी गर्मी के मौसम में शाम (सीरिया) की ओर, जहाँ ठंडक और व्यापार के अच्छे अवसर थे। यह सब उनकी सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक स्थिरता के लिए था, ताकि कोई उन्हें नुक़सान न पहुँचाए और वे अपने कामों में मुस्तक़िल रहें।

यह अल्लाह की उस महान नेमत की याद दिलाती है जो उसने क़ुरैश को दी — उन्हें अमन, इज़्ज़त और रिज़्क़ के साधन दिए। यह नेमत उन्हें इसलिए मिली क्योंकि वे बैतुल्लाह (काबा) के ख़ादिम थे और लोग उनका सम्मान करते थे। यह आयत हमें सिखाती है कि जब अल्लाह किसी को नेमत देता है, तो उसका शुक्र अदा करना चाहिए, और यह कि अल्लाह की दी हुई सुरक्षा और रिज़्क़ के साधनों को पहचानकर उसकी इबादत और आज्ञाकारिता में लगना चाहिए।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की ज़रूरतों का ख़याल रखता है और उनके लिए रिज़्क़ के रास्ते आसान करता है। जिस तरह उसने क़ुरैश को सर्दी और गर्मी की यात्राओं में सुरक्षा और सहूलियत दी, उसी तरह वह हर उस बंदे की मदद करता है जो उस पर भरोसा करता है और उसकी इबादत में लगा रहता है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन की हर नेमत — चाहे वह अमन हो, रिज़्क़ हो या सुविधाएँ — अल्लाह ही की तरफ़ से माननी चाहिए और उसका शुक्र अदा करना चाहिए। शुक्र का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि हम अल्लाह की इबादत करें, उसके बताए रास्ते पर चलें, और दूसरों के साथ भलाई करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह हमें अपनी नेमतों का शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 1-4 — सूरा क़ुरैश

1لِإِيلَافِ قُرَيْشٍ
चूँकि क़ुरैश को जाड़े और गर्मी के सफ़र से मानूस कर दिया है
2إِيلَافِهِمْ رِحْلَةَ الشِّتَاءِ وَالصَّيْفِ
तो उनको मानूस कर देने की वजह से
3فَلْيَعْبُدُوا رَبَّ هَٰذَا الْبَيْتِ
इस घर (काबा) के मालिक की इबादत करनी चाहिए
4الَّذِي أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍ وَآمَنَهُم مِّنْ خَوْفٍ
जिसने उनको भूख में खाना दिया और उनको खौफ़ से अमन अता किया
क़ुरैशकुरान सूची
4आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — क़ुरैश 2

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Thursday, October 1, 2026

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