अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُكْرِهَ: जिसे विवश किया गया (अर्थात् जबरदस्ती कुछ कहने पर मजबूर किया गया)।
- مُطْمَئِنٌّ: जिसका दिल पूर्ण विश्वास के साथ स्थिर और संतुष्ट हो।
- شَرَحَ بِالْكُفْرِ صَدْرًا: जिसने कुफ्र को खुले दिल से, अपनी इच्छा और रजामंदी से स्वीकार किया और उस पर दिल से संतुष्ट हुआ।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो ईमान लाने के बाद कुफ्र की ओर लौट जाते हैं। ऐसे लोगों पर अल्लाह का क्रोध और बड़ा अज़ाब है। लेकिन इस आयत में एक महत्वपूर्ण अपवाद (छूट) बताई गई है: जिस व्यक्ति को कुफ्र का शब्द बोलने पर मजबूर किया जाए (जैसे जान का खतरा हो), और वह केवल ज़ुबान से वह शब्द कह दे, लेकिन उसका दिल ईमान पर पूरी तरह स्थिर और संतुष्ट रहे, तो उस पर कोई गुनाह नहीं है। उसकी नीयत और दिल का ईमान ही असली चीज़ है।
लेकिन जो व्यक्ति खुद अपनी मर्जी से, दिल की खुशी और रज़ामंदी के साथ कुफ्र को अपनाए, उसे इस्लाम पर तरजीह दे, और खुले दिल से उसका इज़हार करे, तो ऐसे लोगों पर अल्लाह का ग़ज़ब है और उनके लिए बहुत बड़ा अज़ाब है। यह अज़ाब इसलिए है क्योंकि उन्होंने दुनिया और उसकी चमक-दमक को आख़िरत और उसके अनंत सुखों पर प्राथमिकता दी, और अल्लाह ऐसे काफिरों को सीधा रास्ता नहीं दिखाता।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम में नीयत और दिल की पवित्रता का बहुत महत्व है। ज़बान से निकला हुआ शब्द तब तक मायने नहीं रखता जब तक दिल उस पर सहमत न हो।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि ईमान की हिफ़ाज़त (रक्षा) कितनी अहम है। एक सच्चा मुसलमान अपने ईमान को किसी भी कीमत पर नहीं बेचता, और दुनिया की कोई भी चीज़ उसे ईमान से दूर नहीं कर सकती।
- अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है — उसने उन कमज़ोर लोगों के लिए भी राहत का दरवाज़ा खुला रखा है जो विवश होकर कुछ कहने पर मजबूर हो जाएं, बशर्ते उनका दिल ईमान पर कायम रहे।
- यह आयत हमें आगाह करती है कि दुनिया की मोहब्बत और आख़िरत को भूल जाना इंसान को सबसे बड़े गुनाह (कुफ्र) तक पहुंचा सकता है। इसलिए हमेशा अल्लाह की रज़ा को अपने सामने रखना चाहिए।
📜 आयत 104-108 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 106
सूरा अन-नहल आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हक़ीक़त अम्र ये है कि यही लोग झूठे हैं…सूरा आयत 106/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 104–108. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








