अन-नहल · 107/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اسْتَحَبُّوا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَأَنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِرِينَ ۝١٠٧
Zaalika bi annahumus tahabbul hayaatad dunyaa `alal Aakhirati wa annal laaha laa yahdil qawmal kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
ये इस वजह से कि उन लोगों ने दुनिया की चन्द रोज़ा ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह दी और इस वजह से की ख़ुदा काफिरों को हरगिज़ मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَحَبُّوا: उन्होंने प्राथमिकता दी, पसंद किया, दुनिया को आख़िरत पर तरजीह दी।
  • لَا يَهْدِي: हिदायत नहीं देता, सीधे रास्ते पर नहीं लाता, तौफ़ीक़ नहीं देता।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह अज़ाब और ग़ज़ब जो उन काफ़िरों के लिए है, जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ़्र का रास्ता अपनाया और अपने दिल से कुफ़्र को खुशी से क़बूल किया — यह सज़ा इसलिए है क्योंकि उन्होंने दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी, उसके माल-ओ-मताअ और खोखले सुखों को आख़िरत की हमेशा रहने वाली ज़िंदगी और उसके अनंत इनामों पर पसंद किया। उन्होंने दुनिया की फ़ानी चीज़ों को आख़िरत की बाक़ी नेमतों पर तरजीह दी। यानी उनका यह कृत्य उनके दिल की गहराई से निकला था, सिर्फ़ ज़बान से नहीं। और यह भी कि अल्लाह तआला काफ़िरों की ऐसी जमात को हिदायत नहीं देता जो हक़ को जानते हुए भी उसे ठुकरा देते हैं और सच्चाई से मुँह मोड़ लेते हैं। अल्लाह उन्हें सीधे रास्ते की तौफ़ीक़ नहीं देता, बल्कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ देता है, क्योंकि उन्होंने ख़ुद गुमराही को चुना है।

फ़ायदे (सबक़ और नसीहत):

  1. दुनिया की मुहब्बत आख़िरत की बरबादी का सबब है: जो इंसान दुनिया को आख़िरत पर पसंद करता है, वह धीरे-धीरे ईमान से दूर हो जाता है। इसलिए मोमिन को चाहिए कि वह दुनिया को आख़िरत का खेत समझे, मक़सद नहीं।
  2. दिल की पाकीज़गी हिदायत की शर्त है: अल्लाह उसी को हिदायत देता है जो सच्चाई को क़बूल करने के लिए तैयार हो। जो लोग हठ और अहंकार से सच्चाई को ठुकराते हैं, उनके दिल पर अल्लाह मुहर लगा देता है।
  3. ईमान की हक़ीक़त दिल से होती है: ईमान सिर्फ़ ज़बान का इक़रार नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन है। जो दिल से कुफ़्र को पसंद करे, उसका ईमान बेकार है।
  4. अल्लाह की रहमत से निराश न हों: यह आयत उन लोगों के लिए सख़्त चेतावनी है जो ईमान के बाद कुफ़्र की तरफ़ लौटते हैं, लेकिन साथ ही यह भी सिखाती है कि इंसान को हमेशा अल्लाह से डरना चाहिए और अपने दिल को दुनिया की मुहब्बत से पाक रखना चाहिए, ताकि अल्लाह की हिदायत उसके साथ रहे।
  5. आख़िरत ही असली ज़िंदगी है: यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया क्षणभंगुर है, और असली सुख-चैन आख़िरत में है। जो इसे समझ लेता है, वह कभी दुनिया के लिए अपना ईमान नहीं बेचता।
🎧 सुनें

📜 आयत 105-109 — अन-नहल

105إِنَّمَا يَفْتَرِي الْكَذِبَ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْكَاذِبُونَ
झूठ बोहतान तो बस वही लोग बॉधा करते हैं जो खुदा की आयतों पर ईमान नहीं रखतें
106مَن كَفَرَ بِاللَّهِ مِن بَعْدِ إِيمَانِهِ إِلَّا مَنْ أُكْرِهَ وَقَلْبُهُ مُطْمَئِنٌّ بِالْإِيمَانِ وَلَٰكِن مَّن شَرَحَ بِالْكُفْرِ صَدْرًا فَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ مِّنَ اللَّهِ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
और हक़ीक़त अम्र ये है कि यही लोग झूठे हैं उस शख्स के सिवा जो (कलमाए कुफ्र) पर मजबूर किया जाए और उसका दिल ईमान की तरफ से मुतमइन हो जो शख्स भी ईमान लाने के बाद कुफ्र एख्तियार करे बल्कि खूब सीना कुशादा (जी खोलकर) कुफ्र करे तो उन पर ख़ुदा का ग़ज़ब है और उनके लिए बड़ा (सख्त) अज़ाब है
107ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ اسْتَحَبُّوا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا عَلَى الْآخِرَةِ وَأَنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِرِينَ
ये इस वजह से कि उन लोगों ने दुनिया की चन्द रोज़ा ज़िन्दगी को आख़िरत पर तरजीह दी और इस वजह से की ख़ुदा काफिरों को हरगिज़ मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
108أُولَٰئِكَ الَّذِينَ طَبَعَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ
ये वही लोग हैं जिनके दिलों पर और उनके कानों पर और उनकी ऑंखों पर खुदा ने अलामात मुक़र्रर कर दी है
109لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْخَاسِرُونَ
(कि ईमान न लाएँगे) और यही लोग (इस सिरे के) बेखबर हैं कुछ शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में भी यक़ीनन घाटा उठाने वाले हैं
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अनुवाद — अन-नहल 107

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Tuesday, August 18, 2026

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