अल-कहफ · 18/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَتَحْسَبُهُمْ أَيْقَاظًا وَهُمْ رُقُودٌ ۚ وَنُقَلِّبُهُمْ ذَاتَ الْيَمِينِ وَذَاتَ الشِّمَالِ ۖ وَكَلْبُهُم بَاسِطٌ ذِرَاعَيْهِ بِالْوَصِيدِ ۚ لَوِ اطَّلَعْتَ عَلَيْهِمْ لَوَلَّيْتَ مِنْهُمْ فِرَارًا وَلَمُلِئْتَ مِنْهُمْ رُعْبًا ۝١٨
Wa tahsabuhum ayqaazanw wa hum ruqood; wa nuqallibuhum zaatal yameeni wa zaatash shimaali wa kalbuhum baasitun ziraa`ayhi bilwaseed; lawit tala`ta `alaihim la wallaita minhum firaaranw wa lamuli`ta minhum rubaa
📖 हिंदी अर्थ
तू उनको समझेगा कि वह जागते हैं हालॉकि वह (गहरी नींद में) सो रहे हैं और हम कभी दाहिनी तरफ और कभी बायीं तरफ उनकी करवट बदलवा देते हैं और उनका कुत्ताा अपने आगे के दोनो पाँव फैलाए चौखट पर डटा बैठा है (उनकी ये हालत है कि) अगर कहीं तू उनको झाक कर देखे तो उलटे पाँव ज़रुर भाग खड़े हो और तेरे दिल में दहशत समा जाए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَيْقَاظًا: जागते हुए, चौकन्ने
  • رُقُود: सोए हुए (बहुवचन)
  • نُقَلِّبُهُمْ: हम उन्हें करवट दिलाते हैं
  • ذَاتَ الْيَمِينِ وَذَاتَ الشِّمَالِ: दाईं ओर और बाईं ओर
  • بَاسِطٌ ذِرَاعَيْهِ: अपनी दोनों बाहें फैलाए हुए
  • الْوَصِيدِ: गुफा के द्वार/दहलीज़
  • لَوَلَّيْتَ: तुम पीठ फेरकर भाग जाते
  • رُعْبًا: भय, दहशत

तफसीर:

ऐ नज़र करने वाले! तू उन्हें देखकर यही समझेगा कि वे जाग रहे हैं, जबकि वास्तव में वे गहरी नींद में सोए हुए हैं। उनकी आँखें खुली हुई थीं, इसलिए देखने वाला धोखा खा जाता था, लेकिन वे सोए हुए थे। अल्लाह तआला अपनी कुदरत से उन्हें सुरक्षित रखते हुए उनकी करवटें बदलता रहता था—कभी दाईं ओर, कभी बाईं ओर—ताकि ज़मीन उनके जिस्मों को खा न जाए और वे लंबी अवधि तक सुरक्षित रहें। उनका वफ़ादार कुत्ता भी गुफा के द्वार पर अपनी दोनों बाहें फैलाए हुए पड़ा था, जैसे कोई पहरेदार उनकी हिफ़ाज़त कर रहा हो।

ऐ नबी! अगर तू उन्हें देख लेता, तो उनकी हैबत और उस अजीबो-ग़रीब मंज़र से तू घबराकर भाग खड़ा होता, और तेरा दिल उनके खौफ़ से भर जाता। अल्लाह ने उन्हें ऐसी हैबत और रौब दी थी कि कोई उनके पास आने की जुर्रत न कर सके, ताकि जब तक अल्लाह का फैसला आए, वे किसी के हाथ से सुरक्षित रहें।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमें अल्लाह की कुदरत और उसकी हिफ़ाज़त का अज़ीमुश्शान नमूना दिखाता है। जिस अल्लाह ने इन नौजवानों को सैकड़ों सालों तक गुफा में सुरक्षित रखा, वही अल्लाह आज भी अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है। जब हम अपने ईमान की खातिर दुनिया से किनारा कर लेते हैं, तो अल्लाह हमारी हर मुश्किल में हमारे साथ होता है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखो, वह तुम्हें हर हाल में संभाल लेगा। जिस तरह उसने इन नौजवानों को सोते हुए भी करवटें दिलाकर उनकी हिफ़ाज़त की, उसी तरह वह हमारी भी हिफ़ाज़त करता है, बशर्ते हम उसकी राह पर साबित-क़दम रहें। यह ईमान की ताक़त है कि इंसान अकेला होते हुए भी अल्लाह के साथ हो तो वह अजेय है।



📜 आयत 16-20 — अल-कहफ

16وَإِذِ اعْتَزَلْتُمُوهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ إِلَّا اللَّهَ فَأْوُوا إِلَى الْكَهْفِ يَنشُرْ لَكُمْ رَبُّكُم مِّن رَّحْمَتِهِ وَيُهَيِّئْ لَكُم مِّنْ أَمْرِكُم مِّرْفَقًا
(फिर बाहम कहने लगे कि) जब तुमने उन लोगों से और ख़ुदा के सिवा जिन माबूदों की ये लोग परसतिश करते हैं उनसे किनारा कशी करली तो चलो (फलॉ) ग़ार में जा बैठो और तुम्हारा परवरदिगार अपनी रहमत तुम पर वसीह कर देगा और तुम्हारा काम में तुम्हारे लिए आसानी के सामान मुहय्या करेगा
17۞ وَتَرَى الشَّمْسَ إِذَا طَلَعَت تَّزَاوَرُ عَن كَهْفِهِمْ ذَاتَ الْيَمِينِ وَإِذَا غَرَبَت تَّقْرِضُهُمْ ذَاتَ الشِّمَالِ وَهُمْ فِي فَجْوَةٍ مِّنْهُ ۚ ذَٰلِكَ مِنْ آيَاتِ اللَّهِ ۗ مَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِ ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَلَن تَجِدَ لَهُ وَلِيًّا مُّرْشِدًا
(ग़रज़ ये ठान कर ग़ार में जा पहुँचे) कि जब सूरज निकलता है तो देखेगा कि वह उनके ग़ार से दाहिनी तरफ झुक कर निकलता है और जब ग़ुरुब (डुबता) होता है तो उनसे बायीं तरफ कतरा जाता है और वह लोग (मजे से) ग़ार के अन्दर एक वसीइ (बड़ी) जगह में (लेटे) हैं ये ख़ुदा (की कुदरत) की निशानियों में से (एक निशानी) है जिसको हिदायत करे वही हिदायत याफ्ता है और जिस को गुमराह करे तो फिर उसका कोई सरपरस्त रहनुमा हरगिज़ न पाओगे
18وَتَحْسَبُهُمْ أَيْقَاظًا وَهُمْ رُقُودٌ ۚ وَنُقَلِّبُهُمْ ذَاتَ الْيَمِينِ وَذَاتَ الشِّمَالِ ۖ وَكَلْبُهُم بَاسِطٌ ذِرَاعَيْهِ بِالْوَصِيدِ ۚ لَوِ اطَّلَعْتَ عَلَيْهِمْ لَوَلَّيْتَ مِنْهُمْ فِرَارًا وَلَمُلِئْتَ مِنْهُمْ رُعْبًا
तू उनको समझेगा कि वह जागते हैं हालॉकि वह (गहरी नींद में) सो रहे हैं और हम कभी दाहिनी तरफ और कभी बायीं तरफ उनकी करवट बदलवा देते हैं और उनका कुत्ताा अपने आगे के दोनो पाँव फैलाए चौखट पर डटा बैठा है (उनकी ये हालत है कि) अगर कहीं तू उनको झाक कर देखे तो उलटे पाँव ज़रुर भाग खड़े हो और तेरे दिल में दहशत समा जाए
19وَكَذَٰلِكَ بَعَثْنَاهُمْ لِيَتَسَاءَلُوا بَيْنَهُمْ ۚ قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ كَمْ لَبِثْتُمْ ۖ قَالُوا لَبِثْنَا يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ ۚ قَالُوا رَبُّكُمْ أَعْلَمُ بِمَا لَبِثْتُمْ فَابْعَثُوا أَحَدَكُم بِوَرِقِكُمْ هَٰذِهِ إِلَى الْمَدِينَةِ فَلْيَنظُرْ أَيُّهَا أَزْكَىٰ طَعَامًا فَلْيَأْتِكُم بِرِزْقٍ مِّنْهُ وَلْيَتَلَطَّفْ وَلَا يُشْعِرَنَّ بِكُمْ أَحَدًا
और (जिस तरह अपनी कुदरत से उनको सुलाया) उसी तरह (अपनी कुदरत से) उनको (जगा) उठाया ताकि आपस में कुछ पूछ गछ करें (ग़रज़) उनमें एक बोलने वाला बोल उठा कि (भई आख़िर इस ग़ार में) तुम कितनी मुद्दत ठहरे कहने लगे (अरे ठहरे क्या बस) एक दिन से भी कम उसके बाद कहने लगे कि जितनी देर तुम ग़ार में ठहरे उसको तुम्हारे परवरदिगार ही (कुछ तुम से) बेहतर जानता है (अच्छा) तो अब अपने में से किसी को अपना ये रुपया देकर शहर की तरफ भेजो तो वह (जाकर) देखभाल ले कि वहाँ कौन सा खाना बहुत अच्छा है फिर उसमें से (ज़रुरत भर) खाना तुम्हारे वास्ते ले आए और उसे चाहिए कि वह आहिस्ता चुपके से आ जाए और किसी को तुम्हारी ख़बर न होने दे
20إِنَّهُمْ إِن يَظْهَرُوا عَلَيْكُمْ يَرْجُمُوكُمْ أَوْ يُعِيدُوكُمْ فِي مِلَّتِهِمْ وَلَن تُفْلِحُوا إِذًا أَبَدًا
इसमें शक़ नहीं कि अगर उन लोगों को तुम्हारी इत्तेलाअ हो गई तो बस फिर तुम को संगसार ही कर देंगें या फिर तुम को अपने दीन की तरफ फेर कर ले जाएँगे और अगर ऐसा हुआ तो फिर तुम कभी कामयाब न होगे
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अनुवाद — अल-कहफ 18

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Wednesday, August 19, 2026

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