अल-कहफ · 44/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
هُنَالِكَ الْوَلَايَةُ لِلَّهِ الْحَقِّ ۚ هُوَ خَيْرٌ ثَوَابًا وَخَيْرٌ عُقْبًا ۝٤٤
Hunaalikal walaayatu lillaahil haqq; huwa khairun sawaabanw wa khairun `uqbaa
📖 हिंदी अर्थ
कि सरपरस्ती ख़ास ख़ुदा ही के लिए है जो सच्चा है वही बेहतर सवाब (देने) वाला है और अन्जाम के जंगल से भी वही बेहतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ (معاني الكلمات):

  • هُنَالِكَ: उस समय, उस स्थान पर (यहाँ अर्थ है उस कठिन परिस्थिति में)।
  • الْوَلَايَةُ: सहायता, समर्थन, संरक्षण, और अधिकार।
  • الْحَقِّ: सत्य, जो वास्तव में सत्य है (अल्लाह का विशेषण)।
  • ثَوَابًا: बदला, पुरस्कार, प्रतिफल।
  • عُقْبًا: परिणाम, अंतिम परिणाम, आख़िरत का नतीजा।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला बताते हैं कि जब उस दिन (क़ियामत के दिन) सारे झूठे सहारे और मिथ्या शक्तियाँ नष्ट हो जाएँगी, जब हर रिश्ता और हर वास्ता टूट जाएगा, और जब इंसान अपनी सारी कमज़ोरी और लाचारी को महसूस करेगा—उस समय सारी सहायता, सारा अधिकार और सारी संरक्षा केवल और केवल अल्लाह ही के लिए होगी। वही सच्चा मालिक है, वही सच्चा मददगार है। उसके सिवा जिन्हें लोग अपना सहारा समझते थे, वे सब उस दिन बेबस और नाकारा साबित होंगे।

अल्लाह तआला ही वह हस्ती है जो अपने ईमानवाले बंदों को सबसे अच्छा बदला देता है। उसका इनाम सबसे उत्तम है, क्योंकि वह अपने बंदों के छोटे-से-छोटे अच्छे काम को भी बड़ा करके देता है, और उनकी बुराइयों को माफ कर देता है। उसका दिया हुआ इनाम ऐसा है जो कभी ख़त्म नहीं होता—जन्नत, जो हमेशा रहने वाली है। और उसका अंतिम परिणाम भी सबसे अच्छा है, यानी आख़िरत में ईमानवालों का अंजाम जन्नत है, जहाँ न कोई दुख है, न कोई चिंता, न कोई मौत—बल्कि हमेशा की खुशियाँ और अल्लाह की रज़ा है।

यह आयत हमें सिखाती है कि इस दुनिया में चाहे हमें कितनी भी मुश्किलें आएँ, चाहे लोग हमारा साथ छोड़ दें, चाहे हमारे सारे ज़रिए बंद हो जाएँ—हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए। क्योंकि हमारा असली सहारा अल्लाह है, और वह कभी अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ता। जो लोग उस पर भरोसा करते हैं, उनके लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरी है। याद रखिए, इस दुनिया की कामयाबी चाहे जितनी बड़ी हो, वह आख़िरत की कामयाबी के सामने कुछ भी नहीं। इसलिए हमें हमेशा वही काम करने चाहिए जो अल्लाह को पसंद हैं, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से हों जिन्हें सबसे अच्छा बदला और सबसे अच्छा अंजाम मिले। अल्लाह हम सबको यह तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 42-46 — अल-कहफ

42وَأُحِيطَ بِثَمَرِهِ فَأَصْبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيْهِ عَلَىٰ مَا أَنفَقَ فِيهَا وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُشْرِكْ بِرَبِّي أَحَدًا
(चुनान्चे अज़ाब नाज़िल हुआ) और उसके (बाग़ के) फल (आफत में) घेर लिए गए तो उस माल पर जो बाग़ की तैयारी में सर्फ (ख़र्च) किया था (अफसोस से) हाथ मलने लगा और बाग़ की ये हालत थी कि अपनी टहनियों पर औंधा गिरा हुआ पड़ा था तो कहने लगा काश मै अपने परवरदिगार का किसी को शरीक न बनाता
43وَلَمْ تَكُن لَّهُ فِئَةٌ يَنصُرُونَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا
और ख़ुदा के सिवा उसका कोई जत्था भी न था कि उसकी मदद करता और न वह बदला ले सकता था इसी जगह से (साबित हो गया
44هُنَالِكَ الْوَلَايَةُ لِلَّهِ الْحَقِّ ۚ هُوَ خَيْرٌ ثَوَابًا وَخَيْرٌ عُقْبًا
कि सरपरस्ती ख़ास ख़ुदा ही के लिए है जो सच्चा है वही बेहतर सवाब (देने) वाला है और अन्जाम के जंगल से भी वही बेहतर है
45وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ فَأَصْبَحَ هَشِيمًا تَذْرُوهُ الرِّيَاحُ ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ مُّقْتَدِرًا
और (ऐ रसूल) इनसे दुनिया की ज़िन्दगी की मसल भी बयान कर दो कि उसके हालत पानी की सी है जिसे हमने आसमान से बरसाया तो ज़मीन की उगाने की ताक़त उसमें मिल गई और (खूब फली फूली) फिर आख़िर रेज़ा रेज़ा (भूसा) हो गई कि उसको हवाएँ उड़ाए फिरती है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
46الْمَالُ وَالْبَنُونَ زِينَةُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ أَمَلًا
(ऐ रसूल) माल और औलाद (इस ज़रा सी) दुनिया की ज़िन्दगी की ज़ीनत हैं और बाक़ी रहने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब में उससे कही ज्यादा अच्छी हैं और तमन्नाएँ व आरजू की राह से (भी) बेहतर हैं
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अनुवाद — अल-कहफ 44

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Tuesday, August 18, 2026

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