अल-कहफ · 43/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَلَمْ تَكُن لَّهُ فِئَةٌ يَنصُرُونَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا ۝٤٣
Wa lam takul lahoo fi`atuny yansuroonahoo min doonil laahi wa maa kaana muntasiraa
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा के सिवा उसका कोई जत्था भी न था कि उसकी मदद करता और न वह बदला ले सकता था इसी जगह से (साबित हो गया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فِئَةٌ – समूह, जत्था, साथी
  • يَنصُرُونَهُ – उसकी सहायता करते
  • مِن دُونِ اللَّهِ – अल्लाह के सिवा, अल्लाह से हटकर
  • مُنتَصِرًا – अपनी ताकत से बच निकलने वाला, प्रतिशोध लेने वाला

तफ़सीर:

यह आयत उस धनवान व्यक्ति के दुखद अंत का वर्णन कर रही है जिसने अपने धन और बाग़ों पर घमंड किया था और अल्लाह के दिए हुए आशीर्वादों को भुला दिया था। जब उसके बाग़ तबाह हो गए और उसकी सारी दौलत बर्बाद हो गई, तो वह बिल्कुल अकेला रह गया।

उस समय उसके पास न तो कोई ऐसा समूह था जो उसकी मदद करता, और न ही वह अपनी ताकत से अल्लाह की पकड़ से बच सका। यह वही व्यक्ति था जो पहले अपने साथियों और धन-दौलत पर इतराया करता था, लेकिन जब मुसीबत आई तो उसके सारे साथी उससे दूर हो गए और उसकी ताकत भी काम न आई।

यह एक बहुत बड़ा सबक है हमारे लिए कि अल्लाह के सिवा कोई भी सहारा, कोई भी ताकत, कोई भी समूह हमें उसकी पकड़ से नहीं बचा सकता। जिस व्यक्ति ने अपने धन, अपनी औलाद, अपनी सामाजिक हैसियत पर भरोसा किया, वह अंततः निराश हुआ।

प्यारे भाइयों और बहनों! याद रखिए, यह दुनिया की सारी चीज़ें – धन, संपत्ति, रिश्तेदार, दोस्त – सब कुछ अल्लाह की देन हैं। जब अल्लाह चाहता है, तो ये सब छीन सकता है। इसलिए हमें इन पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह का शुक्रिया अदा करना चाहिए और उसकी राह में इन्हें खर्च करना चाहिए।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची इज़्ज़त और सुरक्षा सिर्फ अल्लाह के पास है। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता। लेकिन जो अल्लाह को भूलकर दुनिया के सहारों पर निर्भर हो जाता है, उसका अंजाम बहुत बुरा होता है।

आओ, हम सब अपने जीवन में यह संकल्प करें कि हम हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखेंगे, उसकी दी हुई नेमतों का सही इस्तेमाल करेंगे और कभी घमंड नहीं करेंगे। क्योंकि असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की राह पर चले।



📜 आयत 41-45 — अल-कहफ

41أَوْ يُصْبِحَ مَاؤُهَا غَوْرًا فَلَن تَسْتَطِيعَ لَهُ طَلَبًا
उसका पानी नीचे उतर (के खुश्क) हो जाए फिर तो उसको किसी तरह तलब न कर सके
42وَأُحِيطَ بِثَمَرِهِ فَأَصْبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيْهِ عَلَىٰ مَا أَنفَقَ فِيهَا وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُشْرِكْ بِرَبِّي أَحَدًا
(चुनान्चे अज़ाब नाज़िल हुआ) और उसके (बाग़ के) फल (आफत में) घेर लिए गए तो उस माल पर जो बाग़ की तैयारी में सर्फ (ख़र्च) किया था (अफसोस से) हाथ मलने लगा और बाग़ की ये हालत थी कि अपनी टहनियों पर औंधा गिरा हुआ पड़ा था तो कहने लगा काश मै अपने परवरदिगार का किसी को शरीक न बनाता
43وَلَمْ تَكُن لَّهُ فِئَةٌ يَنصُرُونَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا
और ख़ुदा के सिवा उसका कोई जत्था भी न था कि उसकी मदद करता और न वह बदला ले सकता था इसी जगह से (साबित हो गया
44هُنَالِكَ الْوَلَايَةُ لِلَّهِ الْحَقِّ ۚ هُوَ خَيْرٌ ثَوَابًا وَخَيْرٌ عُقْبًا
कि सरपरस्ती ख़ास ख़ुदा ही के लिए है जो सच्चा है वही बेहतर सवाब (देने) वाला है और अन्जाम के जंगल से भी वही बेहतर है
45وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ فَأَصْبَحَ هَشِيمًا تَذْرُوهُ الرِّيَاحُ ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ مُّقْتَدِرًا
और (ऐ रसूल) इनसे दुनिया की ज़िन्दगी की मसल भी बयान कर दो कि उसके हालत पानी की सी है जिसे हमने आसमान से बरसाया तो ज़मीन की उगाने की ताक़त उसमें मिल गई और (खूब फली फूली) फिर आख़िर रेज़ा रेज़ा (भूसा) हो गई कि उसको हवाएँ उड़ाए फिरती है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
अल-कहफकुरान सूची
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अनुवाद — अल-कहफ 43

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सूरा आयत 43/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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