अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صَلَوَاتٌ (सलवात): यहाँ इसका अर्थ है अल्लाह की ओर से प्रशंसा और सम्मान।
- رَحْمَةٌ (रहमत): अल्लाह की विशेष दया और कृपा।
- الْمُهْتَدُونَ (अल-मुह्तदून): हिदायत पाने वाले, सीधे मार्ग पर चलने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो मुसीबत और कठिनाई के समय धैर्य दिखाते हैं और "इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन" (हम अल्लाह ही के हैं और उसी की ओर लौटने वाले हैं) कहते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐसे धैर्यवान लोगों के लिए उनके रब की ओर से विशेष प्रशंसा और सम्मान है। यह प्रशंसा केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से उन पर दया और रहमत की बारिश होती है। यह रहमत उन्हें दुनिया में सुकून, सब्र की ताकत और आखिरत में जन्नत की खुशखबरी देती है। इसके अलावा, ये लोग सच्चे मार्गदर्शन (हिदायत) पर होते हैं, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के फैसले पर संतोष किया और उसकी रजा पर भरोसा किया। वे दुनिया की मुसीबतों में भी सीधे रास्ते पर चलते हैं और उनका दिल अल्लाह की याद में शांत रहता है।
फायदे (उपदेश):
- यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत में धैर्य और अल्लाह के फैसले पर संतोष करना बहुत बड़ी नेमत है, जिसका इनाम अल्लाह की प्रशंसा और रहमत है।
- अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए खास होती है जो उस पर भरोसा करते हैं और उसकी रजा पर राजी रहते हैं।
- यह आयत हमें बताती है कि असली हिदायत (मार्गदर्शन) वही है जो इंसान को अल्लाह की याद, सब्र और उसकी रहमत की ओर ले जाए।
- मुसीबत के वक्त घबराना नहीं चाहिए, बल्कि यह समझना चाहिए कि हम अल्लाह के हैं और उसी की ओर लौटना है — यही सच्ची सफलता का रास्ता है।
- यह आयत मुसलमानों को खुशखबरी देती है कि दुनिया की परीक्षाओं में सब्र करने वालों के लिए अल्लाह के पास बड़ा इनाम और सम्मान है, जो किसी दुनियावी चीज़ से बेहतर है।
📜 आयत 155-159 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 157
सूरा अल-बकरा आयत 157 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं…सूरा आयत 157/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 155–159. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








