अल-बकरा · 157/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
أُولَٰئِكَ عَلَيْهِمْ صَلَوَاتٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَرَحْمَةٌ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُهْتَدُونَ ۝١٥٧
Ulaaa`ika `alaihim salawaatun mir Rabbihim wa rahma; wa ulaaa`ika humul muhtadoon
📖 हिंदी अर्थ
उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं और रहमत और यही लोग हिदायत याफ्ता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَلَوَاتٌ (सलवात): यहाँ इसका अर्थ है अल्लाह की ओर से प्रशंसा और सम्मान।
  • رَحْمَةٌ (रहमत): अल्लाह की विशेष दया और कृपा।
  • الْمُهْتَدُونَ (अल-मुह्तदून): हिदायत पाने वाले, सीधे मार्ग पर चलने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो मुसीबत और कठिनाई के समय धैर्य दिखाते हैं और "इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन" (हम अल्लाह ही के हैं और उसी की ओर लौटने वाले हैं) कहते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐसे धैर्यवान लोगों के लिए उनके रब की ओर से विशेष प्रशंसा और सम्मान है। यह प्रशंसा केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से उन पर दया और रहमत की बारिश होती है। यह रहमत उन्हें दुनिया में सुकून, सब्र की ताकत और आखिरत में जन्नत की खुशखबरी देती है। इसके अलावा, ये लोग सच्चे मार्गदर्शन (हिदायत) पर होते हैं, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के फैसले पर संतोष किया और उसकी रजा पर भरोसा किया। वे दुनिया की मुसीबतों में भी सीधे रास्ते पर चलते हैं और उनका दिल अल्लाह की याद में शांत रहता है।

फायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत में धैर्य और अल्लाह के फैसले पर संतोष करना बहुत बड़ी नेमत है, जिसका इनाम अल्लाह की प्रशंसा और रहमत है।
  2. अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए खास होती है जो उस पर भरोसा करते हैं और उसकी रजा पर राजी रहते हैं।
  3. यह आयत हमें बताती है कि असली हिदायत (मार्गदर्शन) वही है जो इंसान को अल्लाह की याद, सब्र और उसकी रहमत की ओर ले जाए।
  4. मुसीबत के वक्त घबराना नहीं चाहिए, बल्कि यह समझना चाहिए कि हम अल्लाह के हैं और उसी की ओर लौटना है — यही सच्ची सफलता का रास्ता है।
  5. यह आयत मुसलमानों को खुशखबरी देती है कि दुनिया की परीक्षाओं में सब्र करने वालों के लिए अल्लाह के पास बड़ा इनाम और सम्मान है, जो किसी दुनियावी चीज़ से बेहतर है।


📜 आयत 155-159 — अल-बकरा

155وَلَنَبْلُوَنَّكُم بِشَيْءٍ مِّنَ الْخَوْفِ وَالْجُوعِ وَنَقْصٍ مِّنَ الْأَمْوَالِ وَالْأَنفُسِ وَالثَّمَرَاتِ ۗ وَبَشِّرِ الصَّابِرِينَ
और हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएगें और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को ख़ुशख़बरी दे दो
156الَّذِينَ إِذَا أَصَابَتْهُم مُّصِيبَةٌ قَالُوا إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
कि जब उन पर कोई मुसीबत आ पड़ी तो वह (बेसाख्ता) बोल उठे हम तो ख़ुदा ही के हैं और हम उसी की तरफ लौट कर जाने वाले हैं
157أُولَٰئِكَ عَلَيْهِمْ صَلَوَاتٌ مِّن رَّبِّهِمْ وَرَحْمَةٌ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُهْتَدُونَ
उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं और रहमत और यही लोग हिदायत याफ्ता है
158۞ إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِن شَعَائِرِ اللَّهِ ۖ فَمَنْ حَجَّ الْبَيْتَ أَوِ اعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَن يَطَّوَّفَ بِهِمَا ۚ وَمَن تَطَوَّعَ خَيْرًا فَإِنَّ اللَّهَ شَاكِرٌ عَلِيمٌ
बेशक (कोहे) सफ़ा और (कोह) मरवा ख़ुदा की निशानियों में से हैं पस जो शख्स ख़ानए काबा का हज या उमरा करे उस पर उन दोनो के (दरमियान) तवाफ़ (आमद ओ रफ्त) करने में कुछ गुनाह नहीं (बल्कि सवाब है) और जो शख्स खुश खुश नेक काम करे तो फिर ख़ुदा भी क़दरदाँ (और) वाक़िफ़कार है
159إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلْنَا مِنَ الْبَيِّنَاتِ وَالْهُدَىٰ مِن بَعْدِ مَا بَيَّنَّاهُ لِلنَّاسِ فِي الْكِتَابِ ۙ أُولَٰئِكَ يَلْعَنُهُمُ اللَّهُ وَيَلْعَنُهُمُ اللَّاعِنُونَ
बेशक जो लोग हमारी इन रौशन दलीलों और हिदायतों को जिन्हें हमने नाज़िल किया उसके बाद छिपाते हैं जबकि हम किताब तौरैत में लोगों के सामने साफ़ साफ़ बयान कर चुके हैं तो यही लोग हैं जिन पर ख़ुदा भी लानत करता है और लानत करने वाले भी लानत करते हैं
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अनुवाद — अल-बकरा 157

सूरा अल-बकरा आयत 157 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन्हीं लोगों पर उनके परवरदिगार की तरफ से इनायतें हैं…

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Tuesday, August 18, 2026

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