Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُصِيبَةٌ (मुसीबत): कोई भी कठिनाई, दुख, हानि या संकट जो इंसान पर आए।
- إِنَّا لِلَّهِ (इन्ना लिल्लाह): हम अल्लाह ही के हैं (हम उसकी मिल्कियत में हैं)।
- وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ (व इन्ना इलैहि राजिऊन): और हमें उसी की ओर लौटकर जाना है।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन सब्र करने वाले मोमिनों की खूबी बयान करती है जिन्हें अल्लाह ने इस दुनिया में इम्तिहान के तौर पर मुसीबतों से दो-चार होने का हुक्म दिया है। जब उन पर कोई मुसीबत आती है—चाहे वह माल का नुकसान हो, जान का सदमा हो, बीमारी हो, या कोई और तकलीफ—तो वे घबराते नहीं, बल्कि अपनी ज़ुबान से यह कलिमा कहते हैं: "إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ" (हम अल्लाह ही के हैं और हमें उसी की ओर लौटना है)।
इस जुमले में दो बड़ी हक़ीक़तें छिपी हैं:
- "إِنَّا لِلَّهِ" — यानी हम अल्लाह की मिल्कियत में हैं। हम खुद अपने मालिक नहीं, बल्कि अल्लाह के बंदे और उसकी मिल्कियत हैं। जिस तरह एक मालिक अपनी चीज़ में जो चाहे करता है, उसी तरह अल्लाह हमारे साथ जो चाहे करता है। हमारी जान, हमारा माल, हमारी औलाद—सब कुछ अल्लाह की अमानत है। जब वह अपनी अमानत वापस लेता है, तो हमें क्या शिकायत हो सकती है?
- "وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ" — यानी हमें एक दिन इस दुनिया से जाना है और क़यामत के दिन हम सब उसी की ओर लौटकर जाएंगे। यह दुनिया फ़ानी है, यहाँ की हर चीज़ चंद रोज़ की है। असली घर तो आख़िरत का है। जब यह यक़ीन हो कि हमें अल्लाह की तरफ लौटना है, तो मुसीबतें बड़ी नहीं लगतीं, क्योंकि हम जानते हैं कि यह दुनिया का इम्तिहान है और इसका अच्छा अंजाम हमारे लिए जन्नत है।
यह कलिमा सिर्फ़ ज़ुबान से कहना नहीं है, बल्कि दिल से इस पर यक़ीन करना और मुसीबत के वक़्त सब्र करना है। यही सब्र और रज़ा-ब-रज़ा (अल्लाह की मरज़ी पर राज़ी रहना) इंसान को अल्लाह के करीब लाता है और उसके दर्जे बुलंद करता है।
दावती पहलू (प्रेरक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! याद रखिए, यह दुनिया आराम की जगह नहीं, बल्कि इम्तिहान की जगह है। अल्लाह हर बंदे को उसकी हैसियत के मुताबिक़ आज़माता है। जब मुसीबत आए, तो घबराना नहीं चाहिए, बल्कि यह कलिमा पढ़ना चाहिए और अल्लाह से सब्र की दुआ माँगनी चाहिए। यह कलिमा इंसान के दिल को सुकून देता है और उसे यक़ीन दिलाता है कि अल्लाह उसके साथ है। जो लोग इस तरह सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें बेशुमार अज्र (सवाब) देता है और उनके गुनाह माफ़ कर देता है। यही वो रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको इस कलिमे पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 154-158 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 156
सूरा अल-बकरा आयत 156 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि जब उन पर कोई मुसीबत आ पड़ी तो वह…सूरा आयत 156/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 154–158. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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