अल-बकरा · 175/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ اشْتَرَوُا الضَّلَالَةَ بِالْهُدَىٰ وَالْعَذَابَ بِالْمَغْفِرَةِ ۚ فَمَا أَصْبَرَهُمْ عَلَى النَّارِ ۝١٧٥
Ulaaa`ikal lazeenash tarawud dalaalata bilhudaa wal`azaaba bilmaghfirah; famaaa asbarahum `alan Naar
📖 हिंदी अर्थ
यही लोग वह हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही मोल ली और बख्यिय (ख़ुदा) के बदले अज़ाब पस वह लोग दोज़ख़ की आग के क्योंकर बरदाश्त करेंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اشْتَرَوُا: उन्होंने खरीदा, अर्थात बदला या विनिमय किया।
  • الضَّلَالَةَ: गुमराही, सत्य पथ से भटकना।
  • بِالْهُدَى: मार्गदर्शन के बदले में।
  • وَالْعَذَابَ بِالْمَغْفِرَةِ: क्षमा के बदले में यातना को लिया।
  • فَمَا أَصْبَرَهُمْ عَلَى النَّارِ: यह आश्चर्यजनक प्रशंसा है, अर्थात वे आग पर कितने धैर्यवान हैं! (व्यंग्य के रूप में)

विस्तृत तफसीर:

ये वे लोग हैं जिन्होंने हिदायत (मार्गदर्शन) को छोड़कर गुमराही को खरीद लिया, और अल्लाह की माफी को ठुकराकर उसके अज़ाब (यातना) को अपने लिए चुन लिया। यानी उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी जानबूझकर उसे छिपाया और उसके विपरीत चल पड़े। उन्होंने अपनी स्पष्ट समझ और ज्ञान के बावजूद अल्लाह की रहमत और मगफिरत को त्याग दिया और अपने लिए विनाश का रास्ता अपनाया।

अल्लाह तआला इस आयत में उनकी हालत पर अचंभा व्यक्त कर रहे हैं कि कैसे ये लोग उन कामों को करते हैं जो उन्हें जहन्नम की आग तक ले जाते हैं, और फिर भी वे इस आग के प्रति इतने निडर और बेपरवाह हैं। "فَمَا أَصْبَرَهُمْ عَلَى النَّارِ" — यह वाक्य उनके धैर्य पर ताज्जुब का इज़हार है, लेकिन यहाँ धैर्य का अर्थ प्रशंसा नहीं, बल्कि उनकी मूर्खता और अंधी जिद पर व्यंग्य है। वे ऐसे काम कर रहे हैं जो उन्हें आग में झोंक देंगे, फिर भी वे उस आग से डरते नहीं, जैसे उन्होंने उस आग को सहन करने का फैसला कर लिया हो!

यह आयत उन लोगों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो सच्चाई जानने के बाद भी उसे छिपाते हैं या उसके विरुद्ध काम करते हैं। वे अपने ज्ञान को बेचकर दुनिया के मामूली फायदे खरीद रहे हैं, लेकिन इसका परिणाम अल्लाह की यातना होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने ज्ञान और समझ का सही उपयोग करना चाहिए। अल्लाह ने हमें हिदायत दी है, हमें उसे पकड़ना चाहिए और उसे छोड़कर गुमराही की तरफ नहीं जाना चाहिए। जो लोग सच्चाई जानते हुए भी उसे छिपाते हैं या उसका मज़ाक उड़ाते हैं, वे अपने लिए बहुत बड़ा नुकसान खरीद रहे हैं। अल्लाह की मगफिरत और रहमत इतनी विशाल है कि अगर इंसान तौबा कर ले, तो उसके सारे गुनाह माफ हो सकते हैं। लेकिन जो लोग इस रहमत को ठुकराकर अज़ाब को चुनते हैं, वे सचमुच सबसे बड़े घाटे में हैं।

आओ, हम अपने जीवन में हिदायत को अपनाएँ, सच्चाई को फैलाएँ, और अल्लाह की मगफिरत के हकदार बनें। यही कामयाबी का रास्ता है, और यही हमें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की राह दिखाएगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 173-177 — अल-बकरा

173إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنزِيرِ وَمَا أُهِلَّ بِهِ لِغَيْرِ اللَّهِ ۖ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَلَا إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर ज़बह के वक्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है पस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
174إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ الْكِتَابِ وَيَشْتَرُونَ بِهِ ثَمَنًا قَلِيلًا ۙ أُولَٰئِكَ مَا يَأْكُلُونَ فِي بُطُونِهِمْ إِلَّا النَّارَ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब में नाज़िल की है छिपाते हैं और उसके बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी नफ़ा) ले लेतें है ये लोग बस अंगारों से अपने पेट भरते हैं और क़यामत के दिन ख़ुदा उन से बात तक तो करेगा नहीं और न उन्हें (गुनाहों से) पाक करेगा और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है
175أُولَٰئِكَ الَّذِينَ اشْتَرَوُا الضَّلَالَةَ بِالْهُدَىٰ وَالْعَذَابَ بِالْمَغْفِرَةِ ۚ فَمَا أَصْبَرَهُمْ عَلَى النَّارِ
यही लोग वह हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही मोल ली और बख्यिय (ख़ुदा) के बदले अज़ाब पस वह लोग दोज़ख़ की आग के क्योंकर बरदाश्त करेंगे
176ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ نَزَّلَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ ۗ وَإِنَّ الَّذِينَ اخْتَلَفُوا فِي الْكِتَابِ لَفِي شِقَاقٍ بَعِيدٍ
ये इसलिए कि ख़ुदा ने बरहक़ किताब नाज़िल की और बेशक जिन लोगों ने किताबे ख़ुदा में रद्दो बदल की वह लोग बड़े पल्ले दरजे की मुख़ालेफत में हैं
177۞ لَّيْسَ الْبِرَّ أَن تُوَلُّوا وُجُوهَكُمْ قِبَلَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَلَٰكِنَّ الْبِرَّ مَنْ آمَنَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالْكِتَابِ وَالنَّبِيِّينَ وَآتَى الْمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِ ذَوِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينَ وَابْنَ السَّبِيلِ وَالسَّائِلِينَ وَفِي الرِّقَابِ وَأَقَامَ الصَّلَاةَ وَآتَى الزَّكَاةَ وَالْمُوفُونَ بِعَهْدِهِمْ إِذَا عَاهَدُوا ۖ وَالصَّابِرِينَ فِي الْبَأْسَاءِ وَالضَّرَّاءِ وَحِينَ الْبَأْسِ ۗ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ صَدَقُوا ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُتَّقُونَ
नेकी कुछ यही थोड़ी है कि नमाज़ में अपने मुँह पूरब या पश्चिम की तरफ़ कर लो बल्कि नेकी तो उसकी है जो ख़ुदा और रोज़े आख़िरत और फ़रिश्तों और ख़ुदा की किताबों और पैग़म्बरों पर ईमान लाए और उसकी उलफ़त में अपना माल क़राबत दारों और यतीमों और मोहताजो और परदेसियों और माँगने वालों और लौन्डी ग़ुलाम (के गुलू खलासी) में सर्फ करे और पाबन्दी से नमाज़ पढे और ज़कात देता रहे और जब कोई एहद किया तो अपने क़ौल के पूरे हो और फ़क्र व फाक़ा रन्ज और घुटन के वक्त साबित क़दम रहे यही लोग वह हैं जो दावए ईमान में सच्चे निकले और यही लोग परहेज़गार है
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अनुवाद — अल-बकरा 175

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Tuesday, August 18, 2026

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