अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَكْتُمُونَ: छिपाना, गुप्त रखना।
- ثَمَنًا قَلِيلًا: थोड़ा सा मूल्य, अर्थात् सांसारिक लाभ।
- يُزَكِّيهِمْ: उन्हें पवित्र करे, उनके गुनाहों को धोए।
तफसीर:
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की मज़म्मत (निंदा) कर रहा है जो अल्लाह की नाज़िल की हुई किताबों में मौजूद सच्चाई को छिपाते हैं, ख़ास तौर पर हज़रत मुहम्मद ﷺ की नबुव्वत और उनकी सिफ़ात (विशेषताओं) को, जो पहले की आसमानी किताबों में मौजूद थीं। यहूद और नसारा के उलमा ने जब देखा कि अगर वे इन बातों को ज़ाहिर कर देंगे तो उनकी रियासत, दुनियावी फायदे और लोगों की नज़रों में उनकी अज़्ज़त खत्म हो जाएगी, तो उन्होंने हक़ को छिपा दिया और उसके बदले दुनिया का थोड़ा सा माल, रुत्बा या जाह हासिल किया।
अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोग अपने पेट में आग के सिवा कुछ नहीं भर रहे। यानी जो रिश्वत और हराम माल वे खाते हैं, वह उन्हें जहन्नम की आग तक पहुंचाएगा, गोया वे अपने पेट में आग डाल रहे हैं। क़यामत के दिन अल्लाह उनसे रहमत और मुहब्बत के साथ बात नहीं करेगा, बल्कि उन्हें डांटेगा और उनकी रुसवाई करेगा। अल्लाह उन्हें पाक नहीं करेगा, न उनके गुनाह माफ करेगा और न उनकी तारीफ करेगा। आखिर में उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इल्म अल्लाह की अमानत है। जिसे अल्लाह ने इल्म दिया, उसे चाहिए कि उसे बयान करे, छिपाए नहीं। दुनिया का माल, रुत्बा या खौफ किसी को भी हक़ छिपाने पर मजबूर नहीं करना चाहिए। जो हक़ छिपाता है, वह दुनिया में भी रुसवा होता है और आख़िरत में भी। मुसलमान को चाहिए कि वह इल्म को अमानत समझे और उसे आगे पहुंचाए। अल्लाह से डरने वाला कभी हक़ को नहीं छिपा सकता। याद रखें, अल्लाह के पास जो इनाम है वह दुनिया की सारी दौलत से बेहतर है। आइए हम सच्चाई को अपनाएं, उसे फैलाएं और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।
📜 आयत 172-176 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 174
सूरा अल-बकरा आयत 174 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब…सूरा आयत 174/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 172–176. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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