अल-बकरा · 174/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ الْكِتَابِ وَيَشْتَرُونَ بِهِ ثَمَنًا قَلِيلًا ۙ أُولَٰئِكَ مَا يَأْكُلُونَ فِي بُطُونِهِمْ إِلَّا النَّارَ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝١٧٤
Innal lazeena yaktumoona maaa anzalal laahu minal kitaabi wa yashtaroona bihee samanan qaleelan ulaaa`ika maa yaakuloona fee butoonihim illan Naara wa laa yukallimu humul laahu Yawmal Qiyaamati wa laa yuzakkeehim wa lahum `azaabun aleem
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब में नाज़िल की है छिपाते हैं और उसके बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी नफ़ा) ले लेतें है ये लोग बस अंगारों से अपने पेट भरते हैं और क़यामत के दिन ख़ुदा उन से बात तक तो करेगा नहीं और न उन्हें (गुनाहों से) पाक करेगा और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَكْتُمُونَ: छिपाना, गुप्त रखना।
  • ثَمَنًا قَلِيلًا: थोड़ा सा मूल्य, अर्थात् सांसारिक लाभ।
  • يُزَكِّيهِمْ: उन्हें पवित्र करे, उनके गुनाहों को धोए।

तफसीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की मज़म्मत (निंदा) कर रहा है जो अल्लाह की नाज़िल की हुई किताबों में मौजूद सच्चाई को छिपाते हैं, ख़ास तौर पर हज़रत मुहम्मद ﷺ की नबुव्वत और उनकी सिफ़ात (विशेषताओं) को, जो पहले की आसमानी किताबों में मौजूद थीं। यहूद और नसारा के उलमा ने जब देखा कि अगर वे इन बातों को ज़ाहिर कर देंगे तो उनकी रियासत, दुनियावी फायदे और लोगों की नज़रों में उनकी अज़्ज़त खत्म हो जाएगी, तो उन्होंने हक़ को छिपा दिया और उसके बदले दुनिया का थोड़ा सा माल, रुत्बा या जाह हासिल किया।

अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोग अपने पेट में आग के सिवा कुछ नहीं भर रहे। यानी जो रिश्वत और हराम माल वे खाते हैं, वह उन्हें जहन्नम की आग तक पहुंचाएगा, गोया वे अपने पेट में आग डाल रहे हैं। क़यामत के दिन अल्लाह उनसे रहमत और मुहब्बत के साथ बात नहीं करेगा, बल्कि उन्हें डांटेगा और उनकी रुसवाई करेगा। अल्लाह उन्हें पाक नहीं करेगा, न उनके गुनाह माफ करेगा और न उनकी तारीफ करेगा। आखिर में उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इल्म अल्लाह की अमानत है। जिसे अल्लाह ने इल्म दिया, उसे चाहिए कि उसे बयान करे, छिपाए नहीं। दुनिया का माल, रुत्बा या खौफ किसी को भी हक़ छिपाने पर मजबूर नहीं करना चाहिए। जो हक़ छिपाता है, वह दुनिया में भी रुसवा होता है और आख़िरत में भी। मुसलमान को चाहिए कि वह इल्म को अमानत समझे और उसे आगे पहुंचाए। अल्लाह से डरने वाला कभी हक़ को नहीं छिपा सकता। याद रखें, अल्लाह के पास जो इनाम है वह दुनिया की सारी दौलत से बेहतर है। आइए हम सच्चाई को अपनाएं, उसे फैलाएं और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें।

🎧 सुनें

📜 आयत 172-176 — अल-बकरा

172يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُلُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَاشْكُرُوا لِلَّهِ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ
ऐ ईमानदारों जो कुछ हम ने तुम्हें दिया है उस में से सुथरी चीज़ें (शौक़ से) खाओं और अगर ख़ुदा ही की इबादत करते हो तो उसी का शुक्र करो
173إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنزِيرِ وَمَا أُهِلَّ بِهِ لِغَيْرِ اللَّهِ ۖ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَلَا إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर ज़बह के वक्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है पस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
174إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ الْكِتَابِ وَيَشْتَرُونَ بِهِ ثَمَنًا قَلِيلًا ۙ أُولَٰئِكَ مَا يَأْكُلُونَ فِي بُطُونِهِمْ إِلَّا النَّارَ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब में नाज़िल की है छिपाते हैं और उसके बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी नफ़ा) ले लेतें है ये लोग बस अंगारों से अपने पेट भरते हैं और क़यामत के दिन ख़ुदा उन से बात तक तो करेगा नहीं और न उन्हें (गुनाहों से) पाक करेगा और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है
175أُولَٰئِكَ الَّذِينَ اشْتَرَوُا الضَّلَالَةَ بِالْهُدَىٰ وَالْعَذَابَ بِالْمَغْفِرَةِ ۚ فَمَا أَصْبَرَهُمْ عَلَى النَّارِ
यही लोग वह हैं जिन्होंने हिदायत के बदले गुमराही मोल ली और बख्यिय (ख़ुदा) के बदले अज़ाब पस वह लोग दोज़ख़ की आग के क्योंकर बरदाश्त करेंगे
176ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ نَزَّلَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ ۗ وَإِنَّ الَّذِينَ اخْتَلَفُوا فِي الْكِتَابِ لَفِي شِقَاقٍ بَعِيدٍ
ये इसलिए कि ख़ुदा ने बरहक़ किताब नाज़िल की और बेशक जिन लोगों ने किताबे ख़ुदा में रद्दो बदल की वह लोग बड़े पल्ले दरजे की मुख़ालेफत में हैं
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अनुवाद — अल-बकरा 174

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Tuesday, August 18, 2026

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