अल-हज · 26/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَإِذْ بَوَّأْنَا لِإِبْرَاهِيمَ مَكَانَ الْبَيْتِ أَن لَّا تُشْرِكْ بِي شَيْئًا وَطَهِّرْ بَيْتِيَ لِلطَّائِفِينَ وَالْقَائِمِينَ وَالرُّكَّعِ السُّجُودِ ۝٢٦
Wa iz bawwaanaa li Ibraaheema makaanal Baiti allaa tushrik bee shai`anw wa tahhir Baitiya litaaa`ifeena walqaaa` imeena warrukka `is sujood
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने इबराहीम के ज़रिये से इबरहीम के वास्ते ख़ानए काबा की जगह ज़ाहिर कर दी (और उनसे कहा कि) मेरा किसी चीज़ को शरीक न बनाना और मेरे घर को तवाफ और क़याम और रूकू सुजूद करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखना

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَوَّأْنَا: हमने ठिकाना बताया, जगह निर्धारित की और उसे तैयार किया।
  • مَكَانَ الْبَيْتِ: काबा (बैतुल्लाह) का स्थान।
  • طَهِّرْ: पवित्र करो, साफ़ करो (शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की गंदगी से)।
  • لِلطَّائِفِينَ: तवाफ़ (परिक्रमा) करने वालों के लिए।
  • الْقَائِمِينَ: वहाँ ठहरने वाले (या खड़े होकर इबादत करने वाले)।
  • الرُّكَّعِ السُّجُودِ: रुकू' और सजदा करने वाले (यानी नमाज़ पढ़ने वाले)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस समय को याद करो जब हमने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को काबा का वह स्थान दिखाया और निर्धारित किया, जो उस समय तक किसी को मालूम नहीं था। हमने उन्हें वहाँ बैतुल्लाह बनाने का आदेश दिया और उनसे कहा: "मेरे साथ किसी को शरीक मत करना, केवल मेरी ही इबादत करना। मेरे इस घर को हर तरह की गंदगी से पवित्र रखना — चाहे वह शारीरिक गंदगी हो, मूर्तियाँ हों, या फिर शिर्क और बिद'अत जैसी आध्यात्मिक गंदगी हो — ताकि यह घर उन लोगों के लिए पवित्र और उपयुक्त रहे जो इसका तवाफ़ करते हैं, जो वहाँ ठहरकर इबादत करते हैं, और जो रुकू' और सजदे के साथ नमाज़ अदा करते हैं।"

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का घर (काबा) दुनिया का सबसे पवित्र स्थान है। अल्लाह ने इसे हज़रत इब्राहीम के माध्यम से तवहीद (एकेश्वरवाद) का केंद्र बनाया। यहाँ से यह सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन को भी शिर्क और गुनाहों से पवित्र रखना चाहिए, और अल्लाह के घर की तरह अपने दिल को भी साफ रखना चाहिए। जिस तरह काबा को तवाफ़ करने वालों और नमाज़ पढ़ने वालों के लिए पवित्र किया गया, उसी तरह हमारा दिल भी अल्लाह की इबादत और उसके ज़िक्र के लिए पवित्र होना चाहिए।

आज जब हम काबा की तरफ रुख करके नमाज़ पढ़ते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह वही घर है जिसे अल्लाह ने खुद पवित्र किया और हज़रत इब्राहीम को इसके निर्माण का आदेश दिया। यह हमारे लिए बहुत बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने हमें इस पवित्र घर से जोड़ा है। हमें चाहिए कि इस घर की तरफ मुंह करके जो भी दुआ माँगें, वह पूरे दिल से माँगें, और अपनी ज़िंदगी को भी अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए समर्पित कर दें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 24-28 — अल-हज

24وَهُدُوا إِلَى الطَّيِّبِ مِنَ الْقَوْلِ وَهُدُوا إِلَىٰ صِرَاطِ الْحَمِيدِ
और (ये इस वजह से कि दुनिया में) उन्हें अच्छी बात (कलमाए तौहीद) की हिदायत की गई और उन्हें सज़ावारे हम्द (खुदा) का रास्ता दिखाया गया
25إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ الَّذِي جَعَلْنَاهُ لِلنَّاسِ سَوَاءً الْعَاكِفُ فِيهِ وَالْبَادِ ۚ وَمَن يُرِدْ فِيهِ بِإِلْحَادٍ بِظُلْمٍ نُّذِقْهُ مِنْ عَذَابٍ أَلِيمٍ
बेशक जो लोग काफिर हो बैठे और खुदा की राह से और मस्जिदें मोहतरम (ख़ानए काबा) से जिसे हमने सब लोगों के लिए (माबद) बनाया है (और) इसमें शहरी और बेरूनी सबका हक़ बराबर है (लोगों को) रोकते हैं (उनको) और जो शख्स इसमें शरारत से गुमराही करे उसको हम दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखा देंगे
26وَإِذْ بَوَّأْنَا لِإِبْرَاهِيمَ مَكَانَ الْبَيْتِ أَن لَّا تُشْرِكْ بِي شَيْئًا وَطَهِّرْ بَيْتِيَ لِلطَّائِفِينَ وَالْقَائِمِينَ وَالرُّكَّعِ السُّجُودِ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने इबराहीम के ज़रिये से इबरहीम के वास्ते ख़ानए काबा की जगह ज़ाहिर कर दी (और उनसे कहा कि) मेरा किसी चीज़ को शरीक न बनाना और मेरे घर को तवाफ और क़याम और रूकू सुजूद करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखना
27وَأَذِّن فِي النَّاسِ بِالْحَجِّ يَأْتُوكَ رِجَالًا وَعَلَىٰ كُلِّ ضَامِرٍ يَأْتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٍ
और लोगों को हज की ख़बर कर दो कि लोग तुम्हारे पास (ज़ूक दर ज़ूक) ज्यादा और हर तरह की दुबली (सवारियों पर जो राह दूर दराज़ तय करके आयी होगी चढ़-चढ़ के) आ पहुँचेगें
28لِّيَشْهَدُوا مَنَافِعَ لَهُمْ وَيَذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ فِي أَيَّامٍ مَّعْلُومَاتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّن بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ ۖ فَكُلُوا مِنْهَا وَأَطْعِمُوا الْبَائِسَ الْفَقِيرَ
ताकि अपने (दुनिया व आखेरत के) फायदो पर फायज़ हों और खुदा ने जो जानवर चारपाए उन्हें अता फ़रमाए उनपर (ज़िबाह के वक्त) चन्द मुअय्युन दिनों में खुदा का नाम लें तो तुम लोग कुरबानी के गोश्त खुद भी खाओ और भूखे मोहताज को भी खिलाओ
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अनुवाद — अल-हज 26

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Tuesday, August 18, 2026

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