अल-हज · 27/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَأَذِّن فِي النَّاسِ بِالْحَجِّ يَأْتُوكَ رِجَالًا وَعَلَىٰ كُلِّ ضَامِرٍ يَأْتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٍ ۝٢٧
Wa azzin fin naasi bil Hajji yaatooka rijaalanw wa `alaa kulli daamiriny yaateena min kulli fajjin `ameeq
📖 हिंदी अर्थ
और लोगों को हज की ख़बर कर दो कि लोग तुम्हारे पास (ज़ूक दर ज़ूक) ज्यादा और हर तरह की दुबली (सवारियों पर जो राह दूर दराज़ तय करके आयी होगी चढ़-चढ़ के) आ पहुँचेगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अज़्ज़िन (وَأَذِّن): एलान करो, पुकारो, आवाज़ दो।
  • रिजालन (رِجَالًا): पैदल चलकर आने वाले लोग।
  • ज़ामिर (ضَامِر): दुबला-पतला ऊँट जो लंबी यात्रा से थका हुआ हो, लेकिन मतलब यहाँ कमज़ोरी नहीं, बल्कि यात्रा की थकान से हल्का हुआ जानवर है।
  • फ़ज्ज (فَجّ): रास्ता, मार्ग।
  • अमीक़ (عَمِيق): बहुत दूर, लंबा और दूर का रास्ता।

तफ़सीर:

यह आयत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को संबोधित करते हुए अल्लाह तआला का वह आदेश है जब उन्होंने काबा की दीवारें खड़ी कर दीं। अल्लाह ने उनसे कहा: "ऐ इब्राहीम! तुम लोगों के बीच जाकर एलान करो कि वे हज के लिए आएँ।" यह एलान इतना प्रभावशाली था कि अल्लाह की क़ुदरत से यह आवाज़ पूरी दुनिया में पहुँच गई और तब से लेकर आज तक लाखों-करोड़ों लोग बुलावे पर लब्बैक कहते हुए उस पवित्र घर की ओर निकल पड़ते हैं।

अल्लाह ने बताया कि लोग किस हालत में आएँगे—कुछ पैदल चलकर, कुछ दुबले-पतले ऊँटों पर सवार होकर जो लंबी यात्रा से थक चुके होंगे। वे दूर-दूर के रास्तों से आएँगे, हर घाटी और हर दिशा से, ताकि वे अपने लिए फ़ायदे हासिल करें—अपने गुनाहों की माफ़ी, अपने अच्छे कर्मों का सवाब, और दुनिया की रोज़ी भी। वे अल्लाह का नाम लेंगे निर्धारित दिनों में क़ुर्बानी के जानवरों पर, और उनमें से खाएँगे भी और ग़रीबों को खिलाएँगे भी।

यह आयत हमें सिखाती है कि हज सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से एक प्यारा बुलावा है। जो बंदा इस बुलावे पर लब्बैक कहता है, वह दुनिया के सारे रिश्तों और मोह-माया को छोड़कर अपने मालिक की तरफ चल पड़ता है। यही वह सफ़र है जो दिल को साफ़ करता है, गुनाहों को धोता है और इंसान को नया जीवन देता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हज को इबादत का ऐसा ज़रिया बनाया है जिसमें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई है। जो लोग हज करते हैं, वे अल्लाह के मेहमान होते हैं। उनके गुनाह माफ़ हो जाते हैं और वे ऐसे पाक हो जाते हैं जैसे आज ही माँ के पेट से पैदा हुए हों। अल्लाह हम सबको अपने घर की ज़ियारत की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 25-29 — अल-हज

25إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَالْمَسْجِدِ الْحَرَامِ الَّذِي جَعَلْنَاهُ لِلنَّاسِ سَوَاءً الْعَاكِفُ فِيهِ وَالْبَادِ ۚ وَمَن يُرِدْ فِيهِ بِإِلْحَادٍ بِظُلْمٍ نُّذِقْهُ مِنْ عَذَابٍ أَلِيمٍ
बेशक जो लोग काफिर हो बैठे और खुदा की राह से और मस्जिदें मोहतरम (ख़ानए काबा) से जिसे हमने सब लोगों के लिए (माबद) बनाया है (और) इसमें शहरी और बेरूनी सबका हक़ बराबर है (लोगों को) रोकते हैं (उनको) और जो शख्स इसमें शरारत से गुमराही करे उसको हम दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखा देंगे
26وَإِذْ بَوَّأْنَا لِإِبْرَاهِيمَ مَكَانَ الْبَيْتِ أَن لَّا تُشْرِكْ بِي شَيْئًا وَطَهِّرْ بَيْتِيَ لِلطَّائِفِينَ وَالْقَائِمِينَ وَالرُّكَّعِ السُّجُودِ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब हमने इबराहीम के ज़रिये से इबरहीम के वास्ते ख़ानए काबा की जगह ज़ाहिर कर दी (और उनसे कहा कि) मेरा किसी चीज़ को शरीक न बनाना और मेरे घर को तवाफ और क़याम और रूकू सुजूद करने वालों के वास्ते साफ सुथरा रखना
27وَأَذِّن فِي النَّاسِ بِالْحَجِّ يَأْتُوكَ رِجَالًا وَعَلَىٰ كُلِّ ضَامِرٍ يَأْتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٍ
और लोगों को हज की ख़बर कर दो कि लोग तुम्हारे पास (ज़ूक दर ज़ूक) ज्यादा और हर तरह की दुबली (सवारियों पर जो राह दूर दराज़ तय करके आयी होगी चढ़-चढ़ के) आ पहुँचेगें
28لِّيَشْهَدُوا مَنَافِعَ لَهُمْ وَيَذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ فِي أَيَّامٍ مَّعْلُومَاتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّن بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ ۖ فَكُلُوا مِنْهَا وَأَطْعِمُوا الْبَائِسَ الْفَقِيرَ
ताकि अपने (दुनिया व आखेरत के) फायदो पर फायज़ हों और खुदा ने जो जानवर चारपाए उन्हें अता फ़रमाए उनपर (ज़िबाह के वक्त) चन्द मुअय्युन दिनों में खुदा का नाम लें तो तुम लोग कुरबानी के गोश्त खुद भी खाओ और भूखे मोहताज को भी खिलाओ
29ثُمَّ لْيَقْضُوا تَفَثَهُمْ وَلْيُوفُوا نُذُورَهُمْ وَلْيَطَّوَّفُوا بِالْبَيْتِ الْعَتِيقِ
फिर लोगों को चाहिए कि अपनी-अपनी (बदन की) कसाफ़त दूर करें और अपनी नज़रें पूरी करें और क़दीम (इबादत) ख़ानए काबा का तवाफ करें यही हुक्म है
अल-हजकुरान सूची
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मदनीRevelation
27आयत

अनुवाद — अल-हज 27

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Tuesday, August 18, 2026

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