अल-हज · 77/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا ارْكَعُوا وَاسْجُدُوا وَاعْبُدُوا رَبَّكُمْ وَافْعَلُوا الْخَيْرَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ۩ ۝٧٧
Yaaa ayyuhal lazeena aamanur ka`oo wasjudoo wa`budoo Rabbakum waf`alul khaira la`allakum tuflihoon
📖 हिंदी अर्थ
और तमाम उमूर की रूजू खुदा ही की तरफ होती है ऐ ईमानवालों रूकू करो और सजदे करो और अपने परवरदिगार की इबादत करो और नेकी करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ارْكَعُوا: रुकू करो (नमाज़ में झुको)।
  • وَاسْجُدُوا: सजदा करो।
  • وَاعْبُدُوا: इबादत करो, अकेले अल्लाह की बंदगी करो।
  • وَافْعَلُوا الْخَيْرَ: भलाई के काम करो।
  • لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ: ताकि तुम सफल हो जाओ (दुनिया और आख़िरत में)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाया है, अल्लाह तआला तुम्हें हिदायत देता है कि अपनी नमाज़ में रुकू और सजदा करो। यह नमाज़ का सबसे बड़ा रुक्न है और बंदे के अल्लाह के सबसे करीब होने का ज़रिया है। सजदा वह मुकाम है जहाँ बंदा अपने रब के सामने सबसे ज़्यादा झुकता है और अपनी कमज़ोरी का इज़हार करता है।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और अपने रब की इबादत करो" यानी उसे अकेला पूजो, उसका कोई शरीक न बनाओ। इबादत का मतलब है पूरी तरह से अल्लाह के सामने झुकना, उसके हुक्म को मानना और उसकी रज़ा के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देना।

और फिर फ़रमाया: "और भलाई के काम करो" यानी नेकी करो, चाहे वह नमाज़ हो, ज़कात हो, रिश्तेदारों से सिला-रहमी हो, अच्छे अख़्लाक़ हों, लोगों की मदद करना हो, या कोई और अच्छा काम हो। अल्लाह तआला ने यहाँ पर खुले लफ़्ज़ों में कहा है ताकि हर तरह की भलाई शामिल हो जाए।

"ताकि तुम सफल हो जाओ" यानी यह सब कुछ इसलिए करो ताकि तुम्हें दुनिया में भी भलाई मिले और आख़िरत में भी जन्नत की सफलता नसीब हो। सफलता सिर्फ़ उसी को मिलती है जो अल्लाह की इबादत करता है और भलाई के कामों में लगा रहता है।

याद रखो! अल्लाह तआला ने तुम्हें इस दीन को उठाने के लिए चुना है। उसने अपनी रहमत से तुम्हारे लिए इस दीन को आसान बना दिया है, जिसमें कोई सख़्ती और तंगी नहीं है। यही तुम्हारे बाप इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की मिल्लत है। अल्लाह ने तुम्हें पहले की किताबों में भी "मुस्लिम" का नाम दिया था और इस क़ुरआन में भी। उसने तुम्हें इसलिए चुना ताकि रसूल ﷺ तुम पर गवाह हों और तुम दूसरी उम्मतों पर गवाह बनो।

इसलिए इस नेमत की क़द्र करो, नमाज़ को उसके पूरे अरकान और शर्तों के साथ क़ायम करो, ज़कात दो, अल्लाह पर भरोसा रखो और उसी की तरफ रुजू करो। वही सबसे अच्छा मालिक है और वही सबसे अच्छा मददगार है। जो उसका सहारा लेता है, उसे कभी निराश नहीं करता।

अल्लाह तआला से दुआ है कि हम सबको इन हिदायात पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 75-78 — अल-हज

75اللَّهُ يَصْطَفِي مِنَ الْمَلَائِكَةِ رُسُلًا وَمِنَ النَّاسِ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ
खुदा फरिश्तों में से बाज़ को अपने एहकाम पहुँचाने के लिए मुन्तख़िब कर लेता है
76يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۗ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
और (इसी तरह) आदमियों में से भी बेशक खुदा (सबकी) सुनता देखता है जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका है) (खुदा सब कुछ) जानता है
77يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا ارْكَعُوا وَاسْجُدُوا وَاعْبُدُوا رَبَّكُمْ وَافْعَلُوا الْخَيْرَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ۩
और तमाम उमूर की रूजू खुदा ही की तरफ होती है ऐ ईमानवालों रूकू करो और सजदे करो और अपने परवरदिगार की इबादत करो और नेकी करो
78وَجَاهِدُوا فِي اللَّهِ حَقَّ جِهَادِهِ ۚ هُوَ اجْتَبَاكُمْ وَمَا جَعَلَ عَلَيْكُمْ فِي الدِّينِ مِنْ حَرَجٍ ۚ مِّلَّةَ أَبِيكُمْ إِبْرَاهِيمَ ۚ هُوَ سَمَّاكُمُ الْمُسْلِمِينَ مِن قَبْلُ وَفِي هَٰذَا لِيَكُونَ الرَّسُولُ شَهِيدًا عَلَيْكُمْ وَتَكُونُوا شُهَدَاءَ عَلَى النَّاسِ ۚ فَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَاعْتَصِمُوا بِاللَّهِ هُوَ مَوْلَاكُمْ ۖ فَنِعْمَ الْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ النَّصِيرُ
ताकि तुम कामयाब हो और जो हक़ जिहाद करने का है खुदा की राह में जिहाद करो उसी नें तुमको बरगुज़ीदा किया और उमूरे दीन में तुम पर किसी तरह की सख्ती नहीं की तुम्हारे बाप इबराहीम ने मजहब को (तुम्हारा मज़हब बना दिया उसी (खुदा) ने तुम्हारा पहले ही से मुसलमान (फरमाबरदार बन्दे) नाम रखा और कुरान में भी (तो जिहाद करो) ताकि रसूल तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बने और तुम पाबन्दी से नामज़ पढ़ा करो और ज़कात देते रहो और खुदा ही (के एहकाम) को मज़बूत पकड़ो वही तुम्हारा सरपरस्त है तो क्या अच्छा सरपरस्त है और क्या अच्छा मददगार है
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
77आयत

अनुवाद — अल-हज 77

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Tuesday, August 18, 2026

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