Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ارْكَعُوا: रुकू करो (नमाज़ में झुको)।
- وَاسْجُدُوا: सजदा करो।
- وَاعْبُدُوا: इबादत करो, अकेले अल्लाह की बंदगी करो।
- وَافْعَلُوا الْخَيْرَ: भलाई के काम करो।
- لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ: ताकि तुम सफल हो जाओ (दुनिया और आख़िरत में)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालों! जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाया है, अल्लाह तआला तुम्हें हिदायत देता है कि अपनी नमाज़ में रुकू और सजदा करो। यह नमाज़ का सबसे बड़ा रुक्न है और बंदे के अल्लाह के सबसे करीब होने का ज़रिया है। सजदा वह मुकाम है जहाँ बंदा अपने रब के सामने सबसे ज़्यादा झुकता है और अपनी कमज़ोरी का इज़हार करता है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और अपने रब की इबादत करो" यानी उसे अकेला पूजो, उसका कोई शरीक न बनाओ। इबादत का मतलब है पूरी तरह से अल्लाह के सामने झुकना, उसके हुक्म को मानना और उसकी रज़ा के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देना।
और फिर फ़रमाया: "और भलाई के काम करो" यानी नेकी करो, चाहे वह नमाज़ हो, ज़कात हो, रिश्तेदारों से सिला-रहमी हो, अच्छे अख़्लाक़ हों, लोगों की मदद करना हो, या कोई और अच्छा काम हो। अल्लाह तआला ने यहाँ पर खुले लफ़्ज़ों में कहा है ताकि हर तरह की भलाई शामिल हो जाए।
"ताकि तुम सफल हो जाओ" यानी यह सब कुछ इसलिए करो ताकि तुम्हें दुनिया में भी भलाई मिले और आख़िरत में भी जन्नत की सफलता नसीब हो। सफलता सिर्फ़ उसी को मिलती है जो अल्लाह की इबादत करता है और भलाई के कामों में लगा रहता है।
याद रखो! अल्लाह तआला ने तुम्हें इस दीन को उठाने के लिए चुना है। उसने अपनी रहमत से तुम्हारे लिए इस दीन को आसान बना दिया है, जिसमें कोई सख़्ती और तंगी नहीं है। यही तुम्हारे बाप इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की मिल्लत है। अल्लाह ने तुम्हें पहले की किताबों में भी "मुस्लिम" का नाम दिया था और इस क़ुरआन में भी। उसने तुम्हें इसलिए चुना ताकि रसूल ﷺ तुम पर गवाह हों और तुम दूसरी उम्मतों पर गवाह बनो।
इसलिए इस नेमत की क़द्र करो, नमाज़ को उसके पूरे अरकान और शर्तों के साथ क़ायम करो, ज़कात दो, अल्लाह पर भरोसा रखो और उसी की तरफ रुजू करो। वही सबसे अच्छा मालिक है और वही सबसे अच्छा मददगार है। जो उसका सहारा लेता है, उसे कभी निराश नहीं करता।
अल्लाह तआला से दुआ है कि हम सबको इन हिदायात पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 75-78 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 77
सूरा अल-हज आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तमाम उमूर की रूजू खुदा ही की तरफ होती…सूरा आयत 77/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 75–78. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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