Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَقَّ جِهَادِهِ: अल्लाह के लिए सच्चा और पूरा जिहाद, जो खालिस नियत से हो।
- اجْتَبَاكُمْ: उसने तुम्हें चुन लिया, तुम्हें विशेष सम्मान दिया।
- حَرَجٍ: तंगी, कठिनाई, या ऐसी बात जो दीन में बोझ बने।
- مِلَّةَ: धर्म, पद्धति, रास्ता।
- سَمَّاكُمُ: उसने तुम्हारा नाम रखा।
- مَوْلَاكُمْ: तुम्हारा संरक्षक, तुम्हारा मालिक और मददगार।
- نَصِيرٌ: मदद करने वाला, सहायक।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को एक महान और व्यापक आदेश दे रहा है—वह है अल्लाह के लिए सच्चा जिहाद करना। यह जिहाद सिर्फ युद्ध का नाम नहीं, बल्कि अपने नफ्स (इच्छाओं) के खिलाफ जिहाद, शैतान के खिलाफ जिहाद, और अल्लाह के दीन को ऊपर उठाने के लिए अपनी जान, माल, ज़बान और दिल से जिहाद शामिल है। यानी पूरी कोशिश करो कि तुम्हारा जीवन अल्लाह की रज़ा के अनुसार हो, और उसके दीन की खिदमत में लगा रहे।
फिर अल्लाह फरमाता है कि उसने तुम्हें चुना है—यह बहुत बड़ा सम्मान है। उसने तुम्हारे लिए दीन को आसान बनाया है, उसमें कोई तंगी या कठिनाई नहीं रखी। इस्लाम में वो सख्तियाँ नहीं हैं जो पहले की उम्मतों पर थीं। यही आसानी वाला दीन तुम्हारे बाप इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की मिल्लत है। अल्लाह ने तुम्हें पहले की किताबों में भी "मुस्लिम" का नाम दिया था और इस कुरआन में भी, ताकि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तुम्हारे ऊपर गवाह हों कि उन्होंने अल्लाह का पैगाम पूरा पहुँचा दिया, और तुम लोगों पर गवाह बनो कि उनके पैग़म्बरों ने उन्हें अल्लाह का संदेश पहुँचाया था।
इस महान नेमत का शुक्रिया अदा करने के लिए अल्लाह तुम्हें हिदायत देता है: नमाज़ क़ायम करो (पूरी पाबंदी के साथ), ज़कात दो (अपने माल से अल्लाह का हक अदा करो), और अल्लाह से मजबूती से जुड़ जाओ—उसी पर भरोसा रखो, उसी की तरफ रुजू करो। वही तुम्हारा मालिक और संरक्षक है। कितना अच्छा मालिक है वह! और कितना अच्छा मददगार है वह! जो उसकी पनाह लेता है, वह कभी नाकाम नहीं होता।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत मोमिन को गरिमा और पहचान देती है—तुम अल्लाह के चुने हुए बंदे हो, तुम्हारा दीन आसान है, तुम्हारा नाम "मुस्लिम" है जो अल्लाह ने खुद रखा है। यह कितनी बड़ी बात है कि अल्लाह तुम्हें अपने नबी का उम्मती बनाकर दुनिया के सामने गवाह बनाना चाहता है। इसलिए नमाज़, ज़कात और अल्लाह से जुड़ाव—ये तीन चीज़ें तुम्हें वो ताकत देती हैं जो दुनिया की कोई ताकत नहीं दे सकती। जब तुम अल्लाह के साथ होते हो, तो अल्लाह तुम्हारे साथ होता है, और जिसका मालिक अल्लाह हो, उसे किसी का डर नहीं। यही सच्ची कामयाबी है—इस दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 76-78 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 78
सूरा अल-हज आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि तुम कामयाब हो और जो हक़ जिहाद करने का…सूरा आयत 78/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 76–78. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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