अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُمَّتُكُمْ (उम्मतुकुम): यहाँ इसका अर्थ है "तुम्हारा दीन (धर्म)" या "तुम्हारी शरीअत"।
- أُمَّةً وَاحِدَةً (उम्मतन वाहिदतन): एक ही दीन और एक ही राह, यानी एक ही मिल्लत।
- فَاتَّقُونِ (फ़त्तक़ून): मुझसे डरो, मेरे अज़ाब से बचो, मेरे हुक्मों की पालना करो और मेरी मनाही से बचो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबियों (अलैहिमुस्सलाम) को ख़िताब करके फ़रमाता है कि तुम सबका दीन एक ही है—और वह है इस्लाम। हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक, जितने भी नबी और रसूल आए, उन सबकी तालीमात और शरीअत का बुनियादी पैग़ाम एक ही था—अल्लाह की इबादत करो, उसका कोई शरीक न बनाओ, और उसके हुक्मों के आगे सर झुकाओ। शरीअत के कुछ अहकाम (नियम) समय के साथ बदलते रहे, लेकिन असूल (बुनियादी सिद्धांत) हमेशा एक ही रहे—तौहीद, रिसालत और आख़िरत पर ईमान।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और मैं तुम्हारा रब हूँ।" यानी मैं ही तुम्हारा पालनहार, ख़ालिक़ और मालिक हूँ, मेरे सिवा तुम्हारा कोई रब नहीं। इसलिए तुम मुझसे डरो, मेरे अज़ाब से बचो, मेरे हुक्मों की पालना करो और मेरी मनाही से रुको। यही तक़वा (परहेज़गारी) तुम्हारी कामयाबी की कुंजी है।
यह आयत हमें सिखाती है कि सभी नबियों का पैग़ाम एक ही था, और आज भी हमारा एक ही रास्ता है—इस्लाम। हमें चाहिए कि हम इस एक राह पर चलें, आपस में फूट न डालें, और अल्लाह के हुक्मों को अपनी ज़िंदगी में नफ़ाज़ करें। जो शख्स अल्लाह से डरता है और उसके हुक्मों पर अमल करता है, अल्लाह उसकी हिफ़ाज़त करता है, उसके रिज़्क़ में बरकत देता है और उसे दुनिया और आख़िरत की कामयाबी अता फ़रमाता है।
तो आओ, हम सब मिलकर इस एक दीन (इस्लाम) पर साबित क़दम रहें, अल्लाह के तक़वा को अपना ज़रिया बनाएँ, और उसकी रहमत और मग़फ़िरत के हक़दार बनें। यही हमारी नजात (मुक्ति) की राह है।
📜 आयत 50-54 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 52
सूरा अल-मोमिनुन आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (लोगों ये दीन इस्लाम) तुम सबका मज़हब एक ही मज़हब…सूरा आयत 52/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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