अल-मोमिनुन · 52/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَإِنَّ هَٰذِهِ أُمَّتُكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَأَنَا رَبُّكُمْ فَاتَّقُونِ ۝٥٢
Wa inna haaziheee ummatukum ummatanw waahidatanw wa Ana Rabbukum fattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
(लोगों ये दीन इस्लाम) तुम सबका मज़हब एक ही मज़हब है और मै तुम लोगों का परवरदिगार हूँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُمَّتُكُمْ (उम्मतुकुम): यहाँ इसका अर्थ है "तुम्हारा दीन (धर्म)" या "तुम्हारी शरीअत"।
  • أُمَّةً وَاحِدَةً (उम्मतन वाहिदतन): एक ही दीन और एक ही राह, यानी एक ही मिल्लत।
  • فَاتَّقُونِ (फ़त्तक़ून): मुझसे डरो, मेरे अज़ाब से बचो, मेरे हुक्मों की पालना करो और मेरी मनाही से बचो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबियों (अलैहिमुस्सलाम) को ख़िताब करके फ़रमाता है कि तुम सबका दीन एक ही है—और वह है इस्लाम। हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक, जितने भी नबी और रसूल आए, उन सबकी तालीमात और शरीअत का बुनियादी पैग़ाम एक ही था—अल्लाह की इबादत करो, उसका कोई शरीक न बनाओ, और उसके हुक्मों के आगे सर झुकाओ। शरीअत के कुछ अहकाम (नियम) समय के साथ बदलते रहे, लेकिन असूल (बुनियादी सिद्धांत) हमेशा एक ही रहे—तौहीद, रिसालत और आख़िरत पर ईमान।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और मैं तुम्हारा रब हूँ।" यानी मैं ही तुम्हारा पालनहार, ख़ालिक़ और मालिक हूँ, मेरे सिवा तुम्हारा कोई रब नहीं। इसलिए तुम मुझसे डरो, मेरे अज़ाब से बचो, मेरे हुक्मों की पालना करो और मेरी मनाही से रुको। यही तक़वा (परहेज़गारी) तुम्हारी कामयाबी की कुंजी है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सभी नबियों का पैग़ाम एक ही था, और आज भी हमारा एक ही रास्ता है—इस्लाम। हमें चाहिए कि हम इस एक राह पर चलें, आपस में फूट न डालें, और अल्लाह के हुक्मों को अपनी ज़िंदगी में नफ़ाज़ करें। जो शख्स अल्लाह से डरता है और उसके हुक्मों पर अमल करता है, अल्लाह उसकी हिफ़ाज़त करता है, उसके रिज़्क़ में बरकत देता है और उसे दुनिया और आख़िरत की कामयाबी अता फ़रमाता है।

तो आओ, हम सब मिलकर इस एक दीन (इस्लाम) पर साबित क़दम रहें, अल्लाह के तक़वा को अपना ज़रिया बनाएँ, और उसकी रहमत और मग़फ़िरत के हक़दार बनें। यही हमारी नजात (मुक्ति) की राह है।

🎧 सुनें

📜 आयत 50-54 — अल-मोमिनुन

50وَجَعَلْنَا ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ آيَةً وَآوَيْنَاهُمَا إِلَىٰ رَبْوَةٍ ذَاتِ قَرَارٍ وَمَعِينٍ
और हमने मरियम के बेटे (ईसा) और उनकी माँ को (अपनी कुदरत की निशानी बनाया था) और उन दोनों को हमने एक ऊँची हमवार ठहरने के क़ाबिल चश्में वाली ज़मीन पर (रहने की) जगह दी
51يَا أَيُّهَا الرُّسُلُ كُلُوا مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَاعْمَلُوا صَالِحًا ۖ إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ
और मेरा आम हुक्म था कि ऐ (मेरे पैग़म्बर) पाक व पाकीज़ा चीज़ें खाओ और अच्छे अच्छे काम करो (क्योंकि) तुम जो कुछ करते हो मैं उससे बख़ूबी वाक़िफ हूँ
52وَإِنَّ هَٰذِهِ أُمَّتُكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَأَنَا رَبُّكُمْ فَاتَّقُونِ
(लोगों ये दीन इस्लाम) तुम सबका मज़हब एक ही मज़हब है और मै तुम लोगों का परवरदिगार हूँ
53فَتَقَطَّعُوا أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ زُبُرًا ۖ كُلُّ حِزْبٍ بِمَا لَدَيْهِمْ فَرِحُونَ
तो बस मुझी से डरते रहो फिर लोगों ने अपने काम (में एख़तिलाफ करके उस) को टुकड़े टुकड़े कर डाला हर गिरो जो कुछ उसके पास है उसी में निहाल निहाल है
54فَذَرْهُمْ فِي غَمْرَتِهِمْ حَتَّىٰ حِينٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उन की ग़फलत में एक ख़ास वक्त तक (पड़ा) छोड़ दो
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 52

सूरा अल-मोमिनुन आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (लोगों ये दीन इस्लाम) तुम सबका मज़हब एक ही मज़हब…

सूरा आयत 52/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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