अल-मोमिनुन · 51/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
يَا أَيُّهَا الرُّسُلُ كُلُوا مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَاعْمَلُوا صَالِحًا ۖ إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ ۝٥١
Yaaa aiyuhar Rusulu kuloo minat taiyibaati wa`maloo saalihan innee bimaa ta`maloona `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और मेरा आम हुक्म था कि ऐ (मेरे पैग़म्बर) पाक व पाकीज़ा चीज़ें खाओ और अच्छे अच्छे काम करो (क्योंकि) तुम जो कुछ करते हो मैं उससे बख़ूबी वाक़िफ हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الطَّيِّبَاتِ (अत-तय्यिबात): पवित्र, हलाल और अच्छी चीज़ें।
  • صَالِحًا (सालिहन): वह अच्छा काम जो शरीयत के अनुसार हो और जिससे अल्लाह की रज़ा हासिल हो।
  • عَلِيمٌ (अलीम): सब कुछ जानने वाला, जिसे हर छोटे-बड़े काम का पूरा इल्म हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने सभी पैग़म्बरों को—चाहे वे पिछले हों या आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ—एक ही महत्वपूर्ण निर्देश दिया: "हे रसूलो! पवित्र और हलाल चीज़ें खाओ और अच्छे काम करो।" यह निर्देश केवल पैग़म्बरों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी उम्मतों के लिए भी एक सामान्य शिक्षा है। यानी जो लोग अल्लाह के पैग़म्बरों पर ईमान रखते हैं, उन्हें भी यही रास्ता अपनाना चाहिए।

इस आयत में अल्लाह ने दो चीज़ों को एक साथ जोड़ा है: हलाल खाना और नेक काम करना। इससे साफ़ पता चलता है कि हलाल रोज़ी और पवित्र जीवन का आपस में गहरा ताल्लुक़ है। जो व्यक्ति हराम कमाई से दूर रहता है और हलाल कमाई पर गुज़ारा करता है, उसके दिल में नूर पैदा होता है और उसके अच्छे कामों में बरकत होती है। इसके विपरीत, हराम खाने वाले का दिल कठोर हो जाता है, उसकी दुआएँ क़ुबूल नहीं होतीं और उसके अच्छे कामों का असर ख़त्म हो जाता है।

अल्लाह ने आगे फ़रमाया: "मैं तुम्हारे सभी कामों को जानता हूँ।" यह एक बहुत बड़ी चेतावनी भी है और तसल्ली भी। चेतावनी इसलिए कि अल्लाह को हर छोटे-बड़े काम का इल्म है—चाहे वह अच्छा हो या बुरा, छिपा हो या खुला। वह हर चीज़ का हिसाब लेगा और उसका बदला देगा। तसल्ली इसलिए कि जो लोग नेक काम करते हैं, उनकी मेहनत अल्लाह से छिपी नहीं है; वह उन्हें भरपूर अज्र (इनाम) देगा।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि एक मुसलमान को अपनी कमाई और खान-पान में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। हलाल कमाना और हलाल खाना सिर्फ़ एक दुनियावी मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे दीन और आख़िरत से जुड़ा हुआ है। जब हम हलाल खाएँगे, तो हमारे अच्छे काम क़ुबूल होंगे, हमारी दुआएँ रास्ता पाएँगी और हमारा दिल अल्लाह की याद में लगा रहेगा। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में इस नसीहत को अपनाएँ—हलाल कमाएँ, पवित्र जीवन जिएँ और नेक कामों में लगे रहें, क्योंकि अल्लाह हमारे हर अमल को देख रहा है और उसका बदला देने वाला है।



📜 आयत 49-53 — अल-मोमिनुन

49وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ
और हमने मूसा को किताब (तौरैत) इसलिए अता की थी कि ये लोग हिदायत पाएँ
50وَجَعَلْنَا ابْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُ آيَةً وَآوَيْنَاهُمَا إِلَىٰ رَبْوَةٍ ذَاتِ قَرَارٍ وَمَعِينٍ
और हमने मरियम के बेटे (ईसा) और उनकी माँ को (अपनी कुदरत की निशानी बनाया था) और उन दोनों को हमने एक ऊँची हमवार ठहरने के क़ाबिल चश्में वाली ज़मीन पर (रहने की) जगह दी
51يَا أَيُّهَا الرُّسُلُ كُلُوا مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَاعْمَلُوا صَالِحًا ۖ إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ
और मेरा आम हुक्म था कि ऐ (मेरे पैग़म्बर) पाक व पाकीज़ा चीज़ें खाओ और अच्छे अच्छे काम करो (क्योंकि) तुम जो कुछ करते हो मैं उससे बख़ूबी वाक़िफ हूँ
52وَإِنَّ هَٰذِهِ أُمَّتُكُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَأَنَا رَبُّكُمْ فَاتَّقُونِ
(लोगों ये दीन इस्लाम) तुम सबका मज़हब एक ही मज़हब है और मै तुम लोगों का परवरदिगार हूँ
53فَتَقَطَّعُوا أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ زُبُرًا ۖ كُلُّ حِزْبٍ بِمَا لَدَيْهِمْ فَرِحُونَ
तो बस मुझी से डरते रहो फिर लोगों ने अपने काम (में एख़तिलाफ करके उस) को टुकड़े टुकड़े कर डाला हर गिरो जो कुछ उसके पास है उसी में निहाल निहाल है
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 51

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Tuesday, August 18, 2026

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