Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُطِعِ: आज्ञा का पालन करे
- وَيَخْشَ: डरे
- وَيَتَّقْهِ: उससे बचे (अल्लाह के अज़ाब से सुरक्षित रहे)
- الْفَائِزُونَ: सफलता पाने वाले, कामयाब लोग
तफ़सीर:
यह आयत मोमिनों को उस सर्वोच्च सफलता की ओर मार्गदर्शन करती है जो हर इंसान की असली चाहत होती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो व्यक्ति अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की आज्ञा का पालन करता है—यानी जो कुछ अल्लाह और उसके नबी ने हुक्म दिया है उसे मानता है और जिससे रोका है उससे रुक जाता है—और साथ ही वह अल्लाह से डरता है, अपने गुनाहों पर शर्मिंदा होता है और उसके अज़ाब से सहमा रहता है, और अपनी बाकी ज़िंदगी में गुनाहों से बचता हुआ तक़वा अपनाता है, तो ऐसे लोग ही असली कामयाब हैं।
यहाँ "फ़व्ज़" (सफलता) का मतलब सिर्फ़ दुनिया की कामयाबी नहीं, बल्कि दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई है। यह वह सफलता है जो जन्नत की नेमतों, अल्लाह की रज़ा और उसकी रहमत तक पहुँचाती है। यह वही सफलता है जिसके लिए हर नेक इंसान कोशिश करता है और जिसके बिना दुनिया की हर दौलत बेकार है।
प्यारे भाइयो और बहनो! इस आयत में अल्लाह ने तीन चीज़ों को सफलता की शर्त बताया है: पहली—अल्लाह और रसूल की इताअत (आज्ञापालन), दूसरी—अल्लाह का ख़ौफ़ (डर), और तीसरी—तक़वा (परहेज़गारी)। यानी सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान काफ़ी नहीं, बल्कि अमल, दिल का डर और गुनाहों से बचाव—यह तीनों मिलकर इंसान को असली कामयाब बनाते हैं।
अल्लाह ने यहाँ "هُمُ الْفَائِزُونَ" (वही लोग सफल हैं) कहकर सिर्फ़ इन्हीं लोगों को सफल ठहराया है, यानी सफलता उन्हीं के लिए ख़ास है। यह एक बड़ी ख़ुशख़बरी है कि अल्लाह ने अपने बंदों के लिए सफलता का रास्ता साफ़ कर दिया है—बस ज़रूरत है उस पर चलने की। जो इन तीन गुणों को अपना ले, वह समझ ले कि उसकी मंज़िल जन्नत है, और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को इस नुक़्ते पर ढालें—अल्लाह और रसूल की इताअत को अपना निशाना बनाएँ, अपने दिलों में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करें, और हर उस चीज़ से बचें जो अल्लाह को नापसंद है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की बेचैनियों से निकालकर आख़िरत की सुकून भरी ज़िंदगी तक पहुँचाएगा। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ अता करे। आमीन।
📜 आयत 50-54 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 52
सूरा अन-नूर आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स ख़ुदा और उसके रसूल का हुक्म माने…सूरा आयत 52/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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