Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ (जहद अयमानिहिम): अपनी क़समों में पूरी कोशिश और सख्ती करना, यानी बड़ी-बड़ी क़समें खाना।
- لَيَخْرُجُنَّ (लयखरुजुन्न): वे अवश्य निकलेंगे (जिहाद के लिए)।
- طَاعَةٌ مَّعْرُوفَةٌ (ताअतुन मारूफ़ा): अच्छी और जानी-पहचानी आज्ञाकारिता, यानी सच्ची और खरी आज्ञाकारिता।
तफसीर:
यह आयत मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के उस रवैये का पर्दाफाश करती है जो वे रसूलुल्लाह ﷺ के सामने अपनाते थे। वे लोग बड़ी-बड़ी क़समें खाकर कहते थे कि अगर आप हमें जिहाद का हुक्म देंगे तो हम ज़रूर निकल पड़ेंगे और आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे। लेकिन अल्लाह तआला ने उनकी इस झूठी बात का पोस्टमार्टम करते हुए फ़रमाया कि ऐ रसूल! इनसे कह दो कि तुम क़समें खाना बंद करो, क्योंकि तुम्हारी आज्ञाकारिता तो सिर्फ़ ज़ुबानी है, दिल से उसमें कोई सच्चाई नहीं। तुम्हारी असली आज्ञाकारिता तो वह है जो अच्छे और सच्चे इरादे से हो, न कि वह जो सिर्फ़ दिखावे के लिए ज़ुबान से निकाली जाए।
अल्लाह तआला ने उन्हें आगाह किया कि वह हर उस चीज़ से पूरी तरह वाक़िफ़ है जो तुम करते हो, चाहे तुम उसे छिपाओ या दिखाओ। तुम्हारी नीयतें, तुम्हारे दिल के राज़, तुम्हारे अंदर की खोट — सब कुछ उसके इल्म में है। वह तुम्हारे अमल का पूरा-पूरा हिसाब लेगा और तुम्हें तुम्हारे किए का बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का इक़रार नहीं, बल्कि दिल की गवाही और अमल की सच्चाई है। अल्लाह तआला उस बंदे को पसंद करता है जो सच्चे दिल से उसकी इताअत करे, चाहे उसकी ज़ुबान पर क़समों की बहार न भी हो। याद रखिए, अल्लाह के नाम की क़समें उस वक़्त बेकार हैं जब दिल में झूठ और दिखावा हो। सच्ची इताअत ही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और उसकी रहमत का हक़दार बनाती है। आइए, हम अपने अमल को सच्चाई और ख़ुलूस से भरें, क्योंकि अल्लाह हर छोटे-बड़े अमल से बाख़बर है और वह अपने सच्चे बंदों को इस दुनिया और आख़िरत में कामयाबी से नवाज़ेगा।
📜 आयत 51-55 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 53
सूरा अन-नूर आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) उन (मुनाफेक़ीन) ने तुम्हारी इताअत की ख़ुदा…सूरा आयत 53/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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