अन-नूर · 51/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
إِنَّمَا كَانَ قَوْلَ الْمُؤْمِنِينَ إِذَا دُعُوا إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ أَن يَقُولُوا سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ ۝٥١
Innamaa kaana qawlal mu`mineena izaa du`ooo ilal laahi wa Rasoolihee li yahkuma bainahum ai yaqooloo sami`naa wa ata`naa; wa ulaaa`ika humul muflihoon
📖 हिंदी अर्थ
ईमानदारों का क़ौल तो बस ये है कि जब उनको ख़ुदा और उसके रसूल के पास बुलाया जाता है ताकि उनके बाहमी झगड़ों का फैसला करो तो कहते हैं कि हमने (हुक्म) सुना और (दिल से) मान लिया और यही लोग (आख़िरत में) कामयाब होने वाले हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا — हमने सुना और आज्ञा का पालन किया।
  • الْمُفْلِحُونَ — सफलता पाने वाले, कामयाब लोग।

तफ़सीर:

यह आयत मोमिनिन (सच्चे ईमानवालों) की पहचान और उनके आदर्श व्यवहार को बयान करती है। जब सच्चे मोमिनों को अल्लाह की किताब और उसके रसूल (ﷺ) की ओर बुलाया जाता है ताकि वे उनके बीच फ़ैसला करें, तो उनका दस्तूर यही होता है कि वे बिना किसी हिचकिचाहट के कहते हैं: "हमने सुना और हमने आज्ञा का पालन किया।" यानी वे अल्लाह और उसके रसूल के फ़ैसले को पूरे दिल से क़बूल करते हैं, चाहे वह उनके अपने मत या इच्छा के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।

यह आयत उन लोगों के विपरीत है जो मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) की तरह जब उन्हें अल्लाह और रसूल की ओर बुलाया जाता है तो वे मुँह मोड़ लेते हैं या बहाने बनाते हैं। लेकिन सच्चे ईमानवालों की शान यह है कि वे हर मामले में अल्लाह और उसके रसूल के फ़ैसले को सिर झुकाकर क़बूल करते हैं। उनके दिल में कोई ग़िल्लत, कोई शिकायत, कोई संदेह नहीं होता। वे जानते हैं कि अल्लाह और उसके रसूल का फ़ैसला ही सबसे बेहतर और सही है।

इस आयत में "سمعنا وأطعنا" का ज़िक्र बताता है कि मोमिन की ज़बान और दिल एक होते हैं — जो सुनता है उसे मानता भी है, और जो मानता है उस पर अमल भी करता है। यही सच्ची इताअत (आज्ञाकारिता) है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यही लोग "मुफ़्लिहून" हैं — यानी दुनिया और आख़िरत में सफलता पाने वाले। उनकी सफलता का राज़ यही है कि उन्होंने अपनी इच्छाओं और अक़्ल को अल्लाह और रसूल के हुक्म के आगे झुका दिया।

प्यारे मुसलमान भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी कामयाबी इसी में है कि हम हर मामले में — चाहे वह घरेलू झगड़ा हो, आपसी मतभेद हो, या कोई और मसला — अल्लाह की किताब और रसूल (ﷺ) की सुन्नत की तरफ़ रुजू करें। जब हम दावत दी जाएँ तो हमारा जवाब "सुना और माना" होना चाहिए, न कि "सुना और नहीं माना" या "सुना और सोचेंगे।" याद रखिए, जो लोग अल्लाह और रसूल के फ़ैसले को पूरे दिल से क़बूल करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में इज़्ज़त देता है और आख़िरत में जन्नत की नेमतें अता करता है। यही असली कामयाबी है — यही असली फ़लाह है। अल्लाह हमें इस आयत पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 49-53 — अन-नूर

49وَإِن يَكُن لَّهُمُ الْحَقُّ يَأْتُوا إِلَيْهِ مُذْعِنِينَ
और (असल ये है कि) अगर हक़ उनकी तरफ होता तो गर्दन झुकाए (चुपके) रसूल के पास दौड़े हुए आते
50أَفِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ أَمِ ارْتَابُوا أَمْ يَخَافُونَ أَن يَحِيفَ اللَّهُ عَلَيْهِمْ وَرَسُولُهُ ۚ بَلْ أُولَٰئِكَ هُمُ الظَّالِمُونَ
क्या उन के दिल में (कुफ्र का) मर्ज़ (बाक़ी) है या शक में पड़े हैं या इस बात से डरते हैं कि (मुबादा) ख़ुदा और उसका रसूल उन पर ज़ुल्म कर बैठेगा- (ये सब कुछ नहीं) बल्कि यही लोग ज़ालिम हैं
51إِنَّمَا كَانَ قَوْلَ الْمُؤْمِنِينَ إِذَا دُعُوا إِلَى اللَّهِ وَرَسُولِهِ لِيَحْكُمَ بَيْنَهُمْ أَن يَقُولُوا سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
ईमानदारों का क़ौल तो बस ये है कि जब उनको ख़ुदा और उसके रसूल के पास बुलाया जाता है ताकि उनके बाहमी झगड़ों का फैसला करो तो कहते हैं कि हमने (हुक्म) सुना और (दिल से) मान लिया और यही लोग (आख़िरत में) कामयाब होने वाले हैं
52وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيَخْشَ اللَّهَ وَيَتَّقْهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَائِزُونَ
और जो शख्स ख़ुदा और उसके रसूल का हुक्म माने और ख़ुदा से डरे और उस (की नाफरमानी) से बचता रहेगा तो ऐसे ही लोग अपनी मुराद को पहुँचेगें
53۞ وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ لَئِنْ أَمَرْتَهُمْ لَيَخْرُجُنَّ ۖ قُل لَّا تُقْسِمُوا ۖ طَاعَةٌ مَّعْرُوفَةٌ ۚ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) उन (मुनाफेक़ीन) ने तुम्हारी इताअत की ख़ुदा की सख्त से सख्त क़समें खाई कि अगर तुम उन्हें हुक्म दो तो बिला उज़्र (घर बार छोड़कर) निकल खडे हों- तुम कह दो कि क़समें न खाओ दस्तूर के मुवाफिक़ इताअत (इससे बेहतर) और बेशक तुम जो कुछ करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है
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अनुवाद — अन-नूर 51

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Tuesday, August 18, 2026

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