Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
معاني الكلمات:
- الم: حروف مقطعة، وهي من الحروف الهجائية التي افتُتحت بها بعض سور القرآن الكريم، ولا يُعلم معناها على وجه اليقين، ولكنها من المتشابه الذي استأثر الله بعلمه، وفيها إشارة إلى الإعجاز القرآني.
تفسير الآية:
ये हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत (अलिफ़ लाम मीम) हैं, जो कुरआन की कुछ सूरतों की शुरुआत में आते हैं। इन हुरूफ़ों का ज़िक्र पहले सूरह अल-बक़रह की शुरुआत में भी हुआ है। इनका असली मतलब सिर्फ़ अल्लाह ही जानता है, लेकिन इनमें एक बड़ी हिकमत यह है कि अरब के लोग, जो फ़साहत और बलाग़त में माहिर थे, उन्हें चुनौती दी गई कि यह कुरआन उन्हीं हुरूफ़ों से बना है जिनसे वे अपनी बोली और शायरी बनाते हैं, फिर भी वे इस जैसी किताब नहीं ला सकते। यह कुरआन के अलौकिक (मोजिज़ाना) होने की तरफ़ इशारा है, कि यह किताब इंसानी कलाम नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है। इन हुरूफ़ों का ज़िक्र सूरह अल-बक़रह की शुरुआत में भी आया है, और वहाँ भी यही बयान किया गया है।
फ़ायदे:
- इन हुरूफ़ों से कुरआन के मोजिज़ा (चमत्कार) का सबूत मिलता है, कि यह किताब इंसानी क़ुदरत से बाहर है।
- यह अल्लाह की क़ुदरत और उसके कलाम की अज़मत को ज़ाहिर करता है, जो हर ज़माने में लोगों के लिए चुनौती है।
- इससे मुसलमानों को अपने ईमान को मज़बूत करने की तरग़ीब मिलती है, कि जिस किताब पर हम ईमान लाए हैं, वह अल्लाह की तरफ़ से है और उसमें कोई कमी नहीं।
- यह हुरूफ़ हमें याद दिलाते हैं कि कुरआन की तिलावत और उस पर अमल ही हमारी कामयाबी का ज़रिया है, और हमें इसे पढ़कर अल्लाह की रहमत और हिदायत हासिल करनी चाहिए।
📜 आयत 1-3 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 1
सूरा आल-इमरान आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अलिफ़ लाम मीमसूरा आयत 1/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


