अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْحَيُّ (अल-हय्यु): वह जो सदैव जीवित हो, जिसे कभी मृत्यु न आए, न नींद, न ऊँघ। पूर्ण जीवन वाला।
- الْقَيُّومُ (अल-क़य्यूम): वह जो स्वयं स्थिर और क़ायम हो, और सारी सृष्टि उसी के सहारे क़ायम हो। वह हर पल हर चीज़ का प्रबंधक और संभालने वाला है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत अल्लाह तआला की सबसे महान और स्पष्ट पहचान बयान करती है। अल्लाह ही एकमात्र सच्चा माबूद (पूज्य) है, उसके सिवा कोई भी इबादत के योग्य नहीं। हर वो चीज़ जिसे लोग अल्लाह के सिवा पूजते हैं—चाहे वो मूर्ति हो, इंसान हो, फ़रिश्ता हो या कोई और मख़लूक़—वह सब बातिल है, क्योंकि इबादत का हक़ सिर्फ़ उसी को है जो पूर्ण जीवन और पूर्ण सत्ता का मालिक हो।
अल्लाह अल-हय्यु है, यानी उसकी ज़ात में जीवन ऐसा है जो कभी ख़त्म नहीं होता, न उसमें कोई कमी आती है, न वह किसी पर निर्भर है। वह अल-क़य्यूम है, यानी वह अपनी ज़ात से स्वयं क़ायम है, उसे किसी की ज़रूरत नहीं, बल्कि सारा जहान—ज़मीन, आसमान, सितारे, इंसान, जानवर, हर चीज़—उसी के सहारे क़ायम है। अगर वह एक पल के लिए अपनी संभाल हटा ले, तो पूरी कायनात तहस-नहस हो जाए। यही दो सिफ़ात (गुण) उसे हर कमी और हर शरीक से पाक करती हैं।
यह आयत इसलिए भी अहम है कि यह उसी सूरह की शुरुआत में आई है जो अहले-किताब (यहूद और नसारा) के साथ बहस के संदर्भ में है। यानी अल्लाह तआला पहले ही साफ़ कर देता है कि सच्चा दीन वही है जो इस एक अल्लाह की इबादत पर क़ायम हो, जो ज़िंदा और सबका संभालने वाला है।
फ़ायदे (सीख):
- तौहीद की बुनियाद: यह आयत हमें सिखाती है कि हमारे दीन की जड़ सिर्फ़ अल्लाह की एकता है। जिसने इस एकता को समझ लिया, उसने दीन का सबसे बड़ा सुकून पा लिया।
- अल्लाह पर भरोसा: जब हमें यक़ीन हो कि अल्लाह ही सब कुछ क़ायम रखने वाला है, तो हमारा दिल किसी इंसान, किसी ताक़त या किसी हालात से नहीं डरता। हम जानते हैं कि सब कुछ उसी के हाथ में है।
- इबादत की पवित्रता: यह आयत हमें बताती है कि इबादत सिर्फ़ उसी को करनी चाहिए जो इन सिफ़ात का मालिक हो। इससे हमारी नमाज़, दुआ और हर अमल में इख़लास (शुद्ध नियत) आती है।
- ज़िंदगी का मक़सद: जो अल्लाह ज़िंदा है और कभी नहीं मरता, उसकी याद में हमारी ज़िंदगी बसर करना ही असली कामयाबी है। यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमारी रूह को सुकून सिर्फ़ उसी ज़िंदा अल्लाह की इबादत में मिलता है।
📜 आयत 1-4 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 2
सूरा आयत 2/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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